देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के शासनकाल में देश के कुछ राज्यों के बडे-बडे नामचीन राज्य के अन्दर दलाली करने का जो ठेका लिया करते थे उससे हमेशा उनके नामों को लेकर उत्तराखण्ड के चप्पे-चप्पे पर एक बहस छिडती थी कि आखिरकार बाहरी राज्यों के कुछ दलाल कैसे उत्तराखण्ड के अन्दर अपने आपको पॉवरफुल समझकर दलाली करने का खुला खेल खेलने में कामयाब होते चले गये थे? कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के शासनकाल पर तो ऐसे ही दलालों ने खूब दाग लगाये थे और उसको लेकर सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली तक में भी ऐसे दलालों के नामों को लेकर खूब शोर मचा करता था? उत्तराखण्ड में तीन साल से मुख्यमंत्री पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ सरकार चलाकर आवाम का दिल जीतने में कामयाबी की सीढियां चढ चुके हैं। हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री ने बार-बार यह ऐलान किया है कि राज्य के अन्दर अगर किसी ने भी सरकारी काम में दलाली करने का मनसूबा भी पाला तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल मे लाई जायेगी लेकिन राज्य के अन्दर लम्बे समय से यह चर्चाएं पनप रही हैं कि कुछ बाहरी राज्यों के लोग उत्तराखण्ड के अन्दर अपने आपको ‘सरकारÓ समझकर दलाली करने का जो कुछ अफसरों के साथ बडे नाटकीय ढंग से खेल खेल रहे हैं उससे सवाल पनप रहे हैं कि आखिरकार इन दलालों के चेहरे कब बेनकाब होंगे जो सरकार के मुखिया के विजन को हवा-हवाई करने के एजेंडे पर आगे बढे हुये हैं? चर्चाएं तो यहां तक हैं कि कुछ दलालों की दावतों में राज्य के कुछ अफसरों का भी आना जाना रहता है और वह जिस हेकडी के साथ अपने आपको राज्य के अन्दर पॉवरफुल समझ रहे हैं उससे यह बहस भी चल रही है कि आखिरकार कुछ दलालों के साथ राज्य के चंद अफसरों ने क्यों याराना रखा हुआ है? अब मुख्यमंत्री को ऐसे दलालों और उनकी दावतों में शामिल होने वाले कुछ अफसरों पर अपनी रडार लगानी चाहिए जो उनकी पारदर्शी शैली को कहीं न कहीं ग्रहण लगा रहे हैं?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभालते ही ऐलान किया था कि राज्य के अन्दर किसी ने भी दलाली करने का काम किया और यह ठेका लिया कि वह सरकार से कोई भी काम करा सकता है तो ऐसे दलालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल मे लाई जायेगी। मुख्यमंत्री के इस स्पष्ट आदेश से दलालों के कॉकस में हडकम्प मच गया था जो सम्भवत: कुछ पूर्व सरकारों के कार्यकाल में अपने आपको बाहुबली साबित करते रहे थे? उत्तराखण्ड के अन्दर बाहरी राज्यों के लगभग आधा दर्जन से अधिक कुछ चेहरे उत्तराखण्ड के अन्दर अपनी एंट्री किये हुये हैं जो काफी अफसरों को यह भौकाल दिखाते हैं कि अगर कोई भी काम कराना हो तो उनसे वह सम्पर्क करें जिसे वह चुटकियों में करा सकते हैं? चंद बाहरी लोगों के नाम उत्तराखण्ड के अन्दर दलाली को लेकर जिस तरह से आये दिन चर्चाओं में बने हुये हैं उससे सवाल खडा होता है कि आखिरकार यह दलाल आखिरकार राज्य के अन्दर किसकी शह पर पनप रहे हैं जो अपने आपको काफी अफसरों के सामने अपना राजनीतिक भौकाल दिखाने का खूब ढोल पीटते आ रहे हैं? दो तीन नाम ऐसे हैं जिनको लेकर उत्तराखण्ड के अधिकांश जिलों में एक नई चर्चा को जन्म दिये हुये हैं और कुछ अफसरों ने कहीं न कहीं मुख्यमंत्री की आंखों में धूल झोंककर इन चंद दलालों से जो पर्दे के पीछे रहकर गुप्त यारी कर रखी है उससे उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस भी खामोशी के साथ अकसर चल रही है कि आखिरकार ऐसे दलालों के चेहरों को बेनकाब करने के लिए कब कोई बडा कदम उठाया जायेगा? मुख्यमंत्री शुरूआती दौर से ही दलालों की एंट्री हर तरफ बंद करने का हुक्म दिये हुये हैं लेकिन गजब की बात तो यह है कि चंद दलालों की दावतों में कुछ अफसरों की अकसर होने वाली एंट्री कई शंकाओं को जन्म देती आ रही है कि आखिरकार राज्य के मुख्यमंत्री जो कि राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार और दलालों की एंट्री पर हर समय हंटर चलाने के लिए आगे रहते हैं उन्हें कुछ अफसर क्यों अपना हमराज बनाये हुये हैं?
मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी उत्तराखण्ड को गुलजार करने के लिए रात-दिन एक किये हुये हैं लेकिन कुछ अफसरों की चंद दलालों के साथ दिखाई दे रही गुप्त यारी उत्तराखण्ड के अन्दर एक नई परिपार्टी को जन्म देते हुए दिखाई दे रही है? अब यह भी सम्भावना है कि मुख्यमंत्री हर उस शख्स पर नजर रखकर उनके खिलाफ जरूर एक्शन करेंगे जो सरकार की छवि को धूमिल करने के लिए कहीं न कहीं कोई दाग लगा रहे हैं?

