भाजपा किसे बनायेगी मेयर उम्मीदवार

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के अन्दर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है और भाजपा व कांग्रेस ने पार्टी उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी कर दी है जिससे कि पार्टी उम्मीदवार आवाम के बीच जाकर अपना प्रचार-प्रसार करने का सिलसिला शुरू कर दें। वहीं अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि कांग्रेस व भाजपा राजधानी में किस राजनेता को मेयर का रण लडवाने के लिए अपनी हरी झंडी देगी। शहरवासियों की नजर सबसे ज्यादा भाजपा के मेयर उम्मीदवार पर लगी हुई है और उसको लेकर राजधानी में सट्टा बाजार भी सज चुका है और यह हार जीत लग रही है कि भाजपा किसे अपना उम्मीदवार बना सकती है? वहीं यह बहस भी जन्म ले रही है कि क्या भाजपा हाईकमान एक बार फिर शहर मे मेयर का रण लडने के लिए तत्कालीन मेयर को अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है? सोशल मीडिया पर आये दिन मुख्यमंत्री के साथ तत्कालीन मेयर की आ रही तस्वीरों को लेकर यह शोर मच रहा है कि सम्भवत: भाजपा एक बार फिर तत्कालीन मेयर गामा को मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है? हालांकि नामांकन से ठीक पहले भाजपा अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा करने के लिए आगे बढ सकती है जिससे कि पार्टी के किसी भी नेता को बगावत करने का मौका ही न मिल पाये अगर वह मौजूदा दौर में चुनाव लडने का सपना देख रहा है? वहीं कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री रहे हीरा सिंह बिष्ट का नाम भी मेयर उम्मीदवार के लिए खूब उछल रहा है लेकिन अभी यह सबकुछ कयासबाजी से ज्यादा कुछ नहीं माना जा सकता?
उत्तराखण्ड के अन्दर निकाय चुनाव का डंका बज चुका है और भाजपा व कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची को हरी झंडी दे दी है और इस सूची जारी होने के बाद दोनो राजनीतिक दलों में कहीं से भी बगावत की चिंगारी उठते हुए नजर नहीं आ रही है। हालांकि कुछ राजनेता तो इस सूची से सहमत नहीं है और वह निर्दलीय के रूप में भी अपनी ताल ठोकने का मन बना रहे हैं लेकिन दोनो राजनीतिक दल किसी भी कीमत पर अपनी पार्टी के किसी भी नेता को बगावत का झंडा उठाने से रोकने की पूरी पृष्ठभूमि तैयार कर चुके हैं? निकाय चुनाव में कांग्रेस व भाजपा के बीच मेयर व नगर पालिका अध्यक्ष पदों पर होने वाले चुनाव को लेकर सीधा मुकाबला माना जा रहा है इसलिए दोनो राजनीतिक दल जिताऊ प्रत्याशी को ही मैदान में उतारने के लिए आगे बढ रहे हैं। उत्तराखण्ड की राजधानी में मेयर की कुर्सी सरकार की प्रतिष्ठा का सवाल रहती है और इसीलिए सरकार मेयर की कुर्सी पर अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए हमेशा से ही अपनी पूरी ताकत झोंकती रही है और उसी के चलते मेयर की कुर्सी भी उनके पास आती रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरूआती दौर में ही ऐलान कर दिया था कि राज्य में होने वाले निकाय चुनाव में हर तरफ कमल खिलता हुआ नजर आयेगा क्योंकि राज्य की जनता को पिछले तीन सालों से विकास का जो नया आईना दिखा है उसके चलते वह राज्य के अन्दर भाजपा पर अटूट विश्वास कर रही है।
राजधानी के शहर में मेयर उम्मीदवार के नाम पर गहरा रखे रहस्य से जल्द पर्दा हटेगा और यह साफ हो जायेगा कि मेयर का रण भाजपा का कौन नेता लडेगा। हालांकि सोशल मीडिया पर आये दिन भाजपा की ओर से कुछ उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो रखा है और इन नामो को लेकर राजधानी के अन्दर सट्टा बाजार भी सज रहा है और सट्टा बाजार में मेयर उम्मीदवार के लिए सबसे पहला नाम तत्कालीन मेयर सुनील उनियाल गामा का लिया जा रहा है तो वहीं दूसरे नम्बर पर डोईवाला से युवा नेता सौरभ थपलियाल का नाम भी मेयर उम्मीदवार के रूप में सामने आ रहा है लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि भाजपा हाईकमान ने पूर्व में ही शहर के अन्दर यह गोपनीय सर्वे करवा लिया था कि भाजपा का कौन नेता ऐसा है जो मेयर का रण जितने का बूता रखता है? सोशल मीडिया पर भाजपा के कुछ राजनेताओं के नाम भले ही मेयर उम्मीदवार को लेकर उछल रहे हों लेकिन आवाम के बीच उनकी पहचान उस तरह से नहीं है कि वह मेयर का चुनाव जीतने का दम रखते हों? वहीं कांग्रेस में मेयर पद के उम्मीदवार को लेकर भी कई नामों का शोर मच रहा है जिसमें सूर्यकांत धस्माना, वीरेन्द्र पोखरियाल और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का नाम शामिल है। वहीं राजधानी के अन्दर यह बहस भी चल रही है कि भाजपा जिसे भी अपना उम्मीदवार बनाती है तो वह उसे जिताने के लिए खुद अगली पक्ति मे खडी रहती है जबकि कांग्रेस की ओर से खडे होने वाला प्रत्याशी अकसर खुद ही चुनावी रण लडता हुआ नजर आया है जिसके चलते अकसर कांग्रेसी नेताओं को चुनावी रणभूमि में हार का सामना करना पडा है।

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