केन्द्र सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम पर किया महिलाओं के साथ छलावा

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देहरादून(नगर संवाददाता)। अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका सिंह ने महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि महिलाओं को मृगतृष्णा दिखाकर देश की आधी आबादी की महिलाओं के साथ छलावा किया है और इस अधिनियम में परिसीमन एवं जनगणना को जोड दिया गया है जिससे यह अधिनियम 2०39 तक भी लागू नहीं हो सकता है। उन्होंने केन्द्र सरकार से तत्काल इस बिल को लागू किये जाने की मांग की है जिससे महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके।
यहां कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि जहां नारी की पूजा होती है वहां देवताओं का वास होता है और देश भर एवं उत्तराखंड में नारी की स्थिति क्या है वह सभी जानते है। उन्होंने कहा कि उन्नाव, हाथरस, लखीमपुर खीरी, मणिपुर, उत्तराखंड की अंकिता भंडारी के साथ दुराचार व अत्याचार हुआ है और संसद में इस मामले में भाजपा की महिला सांसदों ने एक शब्द भी नहीं बोला है और वह पूरी तरह से मौन रही है। उन्होंने कहा कि संसद का विशेष सत्र बुलाया गया जिसे एक इवेंट के रूप में बनाया गया और महिला आरक्षण विधेयक के रूप में पेश किया और देश की महिलाओं के साथ धोखा किया है और परिसीमन व जनगणना को लाद दिया है और यह केवल देश की महिलाओं के साथ केन्द्र सरकार ने मजाक किया और उन्होंने कहा कि 1989 प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत की और जब कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण के लिए कांग्रेस संसद में बिल लाई तो बीजेपी के दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेई, यशवंत सिंह और राम जेठमलानी ने उसके विरोध में वोट किया। उन्होंने कहा कि दिसंबर 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। उन्होंने कहा कि दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कोटे के भीतर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की गईं।
उन्होंने कहा कि आज पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की दूरदृष्टि से भारत में 15 लाख महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है। इनमें लगभग 4० प्रतिशत निर्वाचित महिला प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पेश किया जो कि राज्यसभा से पारित हुआ था। उन्होंने कहा कि विधेयक में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि एससी और एसटी के लिए उप-कोटा था। उन्होंने कहा कि राज्यसभा से नौ मार्च 2०1० को यह विधेयक पास हो गया था। उन्होंने कहा कि लेकिन सर्वसम्मति न होने के कारण यह लोकसभा में पास नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि 2०16 में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार आठ मार्च 2०16 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लंबे समय से प्रतीक्षित विधेयक को पास करने की मांग की। पीएम मोदी के मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस नारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैक्सिमम गवर्नेंस का मतलब महिलाओं को उनका हक देना है। उन्होंने कहा कि फिर उन्होंने 2०17 में पीएम मोदी को पत्र लिखा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश की थी कि अभी लोकसभा में भाजपा सरकार बहुमत में हैं और इस बहुमत का फायदा उठाते हुए वे लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास करा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पत्र में उन्होंने यह भी लिखा था कि कांग्रेस पार्टी हमेशा इस कानून का समर्थन करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्हेांने कहा कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मांग की कि मोदी सरकार लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित करेे। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी जुलाई 2०18 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि मैं संसद के आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए समर्थन हेतु लिख रहे है। उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, नौ मार्च, 2०1० को राज्यसभा द्वारा पारित महिला आरक्षण विधेयक पिछले आठ वर्षों से भी अधिक समय से लोकसभा में पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जब यह बिल भाजपा के समर्थन से राज्यसभा में पारित हुआ, तब तत्कालीन विपक्ष के नेता स्वर्गीय अरुण जेटली ने इसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा िक तब से कांग्रेस पार्टी इस विधेयक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में अटल रही है। उन्होंने कहा कि जबकि भाजपा का विचार बदल गया है। भले ही यह 2०14 के घोषणापत्र में उसके प्रमुख वादों में से एक था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बिना बहुमत के स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया था। हमने बहुमत के बिना ही राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित किया था। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार साढ़े नौ साल तक महिला आरक्षण बिल को पास क्यों नहीं करवा पाई है। उन्होंने कहा कि सरकार अभी भी देर करने के लिए जनगणना और परिसीमन की शर्तें क्यों थोप रही है। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना का मुद्दा पर उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी जिसने पहली बार 2०11-12 में सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) की थी। मोदी सरकार ने इनके आंकड़ों को जारी करने से भी इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, मोदी सरकार ने (बिहार) जैसे राज्यों द्वारा किए जाने वाले जाति सर्वेक्षणों पर भी रोक लगाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने विभिन्न राज्यों में ओबीसी समुदाय के लोगों से मुलाकघत की। उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान उन लोगों ने जाति जनगणना की मांग की थी। राहुल गांधी ने उनकी मांगों का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि 85वें पूर्ण अधिवेशन में पास रायपुर प्रस्ताव में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने दशकीय जनगणना के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना कराने के लिए प्रतिबद्धता जताई। जाति जनगणना में विमुक्त जनजातियों और घूमंतू जनजातियों की भी गणना शामिल था।
उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि भारत की भावी महिला सांसद आज की भाजपा सांसदों की तरह चुप नहीं रहेंगी। वह बैखोफ होकर महिलाओं के खघ्लिाफ बढ़ते हुए जघन्य अपराधों पर बोलेंगी, उनकी भत्र्सना कर सकेंगी और अपराधियों को सजा दिलाने के लिए निडर हो कर माँग करेंगी। उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टियों और सरकारों पर यौन अत्याचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग और निंदा करने को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में करेंगी, जैसा कि मणिपुर में हुआ था। क्योंकि सत्तारूढ़ दल की महिला सांसदों ने अपनी चुप्पी और महिलाओं के खघ्लिाफ अपराधों में संलिप्तता से भारत की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सत्तासीन होती है तो महिला आरक्षण बिल को संशोधन कर लागू किया जायेगा और महिलाओं को उनका अधिकार दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम देश की आधी आबादी मातृशक्ति के साथ छलावा और धोखे के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जिस तरह से केंद्र की भाजपा सरकार ने जनगणना और परिसीमन की शर्तें जोड़ दी हैं उस वजह से निकट भविष्य में तो महिलाओं को आरक्षण मिलता दिखाई नहीं दे रहा। इस अवसर पर पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन प्रशासन) मथुरादास जोशी वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना,मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी, प्रदेश अध्यक्ष महिला कांग्रेस ज्योति रौतेला ,पूर्व विधायक शैलेंद्र रावत, प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट मौजूद रहे।

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