‘स्मार्ट सिटी तूने बडा दर्द दीना’?

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देहरादून मानसून की पहली बरसात से लेकर अब तक जितने दिन भी वर्षा चली उसने बार-बार स्मार्ट सिटी के नाम पर जनता की आंखों में जो धूल झोंकी जा रही है उसका परत दर परत खुलासा सड़कों पर होता हुआ नजर आ रहा है? शायद ही ऐसी कोई सडक होगी जहां जल भराव न हुआ हो। इतना ही नहीं सडको में गढ्ढे हैं या गढ्ढो में सडके इसका भी अंदाजा नही लगाया जा रहा है। आम गली मोहल्लो की सडके तो दूर वीआईपी सडकों के गढ्ढे भी शायद गिने जा पाए। सबसे बडा वीआईपी मार्ग ईसी रोड को कहा जा सकता है। इस मार्ग से राज्य के प्रथम नागरिक से लेकर सरकार चलाने वाले मुखिया लेकर शासन के आला अधिकारी एवं जिला प्रशासन के अधिकारी एक बार नही दर्जनो बार आवागमन करते हैं लेकिन कमाल की बात तो यह है कि जिनके मजबूत कंधो पर स्मार्ट सिटी बनाने का दायित्व है वह भी आंखे मूंदे बैठे हैं। आखिर सरकार से लेकर प्रशासन तक की जलभराव एवं गढ्ढो पर आंखे क्यों नही खुल रही यह तो वह ही बेहतर जानते हैं लेकिन इतना जरूर है कि स्मार्ट सिटी की जनता वर्तमान हालातों से बेहद दुखी है। रह-रहकर यही बात दिमाग में आ रही है कि स्मार्ट सिटी से बेहतर अपना वो पुराना दून था जिसमें राहत की सांस आया करती थी। वैसे यह भी कहा जा सकता है कि देहरादून का सुकून उस समय काफूर हो गया था जब देहरादून को एक तरह से राजधानी के रूप में ही देखा जाने लगा क्योंकि यहां आवाम का बढता दबाव और आये दिन वीआईपी का मुवमेंट देहरादून की शांति पर ग्रहण लगा रहा है? आवाम उस गीत को गाने से नहीं चूक रहे हैं कि ‘स्मार्ट सिटी तूने बडा दर्द दीनाÓ?
उल्लेखनीय है कि सडक चौडीकरण के नाम पर नदी, नाले, खाले पाट दिए गए। पुराने दून के स्वरूप को सात माले, दस माले भवन निर्माणों ने खो दिया। जिस देहरादून में कभी दो माले से ऊपर निर्माण कार्य नही हुआ करता था उसी देहरादून में गगन चुंबी बिल्डिंगे खडी हो गयी। एमडीडीए से लेकर जिम्मेदार विभाग तक यह भूल गए कि भूकंप की दृष्टि देहरादून अति संवेदनशील क्षेत्रें में आता है। जिन प्लेटो के हिलने से भूंकप आता है वह राजपुर में मौजूद है। यदि रिक्टर पैमाने पर भूंकप तीव्रता अधिक मापी गयी तो निश्चित रूप से राजपुर के आस-पास के क्षेत्रें में जो खाईयां पाटकर बहुमंजिले इमारते तैयार की गयी है उनका कैसा हाल होगा यह सोचकर ही रूह कांप जाती है। बात बहराल स्मार्ट सिटी की हो रही है उस पर ही ध्यान केंद्रीत किया जा रहा है।
आज की बरसात के लिए मौसम विभाग ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था। मौसम विभाग के अनुसार आज से चार दिन तक भीषण बारिश की उम्मीद है। पहले ही दिन बरसात ने स्मार्ट सिटी ने चार चांद लगा दिए। ईसी रोड, राजपुर रोड, नेशविला रोड, घंटाघर, सुभाष नगर, क्लेमंटाउन, सेवलाकलां, रायपुर रोड आदि सहित अनेक ऐसे स्थान मौजूद रहे जहां गढ्ढो में बरसात का पानी भरा। अभी गत दिवस की बात करें तो ईसी रोड पर मौजूद सडक खुदायी के बाद जो मिट्टी डाली गयी उसमें स्थानीय क्षेत्रवासी की कार तीन घंटे तक फंसी रही। भला हो उन लोगो ने अपनी शक्ति परिचय देते हुए कार को उठाकर मिट्टी से बाहर निकाला। अभी कुछ दिन पहले जब भारी बारिश हुयी तो भारतीय जनता पार्टी के बलवीर रोड स्थित प्रदेश मुख्यालय में मौजूद मीडिया प्रभारी का कक्ष भी जलमग्न हो गया था। जब रूलिंग पार्टी के कार्यालय में ही जल भराव हो रहा हो तो सूबे का क्या हाल होगा इसका स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है। बरसात के मौसम से ठीक पहले शहर की सडक के दोनो ओर कई इलाकों को खोद दिये जाने के बाद उसमें काम तो शुरू किया गया लेकिन बरसात के कारण इस सभी कामों पर ग्रहण लग गया और उसमें जिस तरह से जल भराव हो रहा है वह आवाम के लिए मुसीबत का कारण बनता जा रहा है और वहां कब क्या दुर्धटना हो जाये इसका अंदेशा हमेशा लगा रहा है? फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि स्मार्ट सिटी से बेहतर अपना देहरादून पुराना था। जहां कम से कम जलभराव की समस्या, गढ्ढो की समस्याएं तो नही थी। दूर-दूर तक हरे वृक्ष बरसात में कुछ राहत प्रदान करने का काम करते थे। आज न ही हरे वृक्ष दूर-दूर तक दिखाई देते हैं और न ही खाली सडके। आम जन तो केवल इतना ही कह रहा है कि शासन प्रशान के पास पुरी मशीनरी मौजूद है जो समय-समय पर मौसम की पूर्व घोषणा करता रहता। लेकिन इसके बावजूद स्मार्ट सिटी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी यह भी अनुमान नही लगा सके कि इस बार दो माह का सावन है और इन 6० दिनो में भारी से भारी बारिश होने का अनुमान लगाया जा चुका है ऐसे में भी स्मार्ट सिटी का कार्य बरसात से पहले पूर्ण नही कराया गया। निश्चित रूप से यह घोर लापरवाही की ओर इंगित करता है। स्मार्ट सिटी के कारण जो नुकसान हो रहा है उसकी भरपाई कौन करेगा यह भी तय किया जाना जरूरी है। स्मार्ट सिटी के कार्यो के कारण अभी हाल ही में पल्टन बाजार, दर्शनी गेट में स्थित दुकानो में भारी जलभराव हो गया था जिसमें कई दुकानदारो का लाखों का माल खराब हुआ। स्मार्ट सिटी के अधिकारियो को इस संबंध में व्यापारिक संगठनो ने ज्ञापन भी दिए थे लेकिन आज तक व्यापारियो की समस्याओं का भी समाधान नही हुआ।

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