ऋषिकेश(अमित सूरी)। साहसिक पर्यटन के लिए दुनियाभर में विख्यात ऋषिकेश के घाटों पर पर्यटकों की डुबकी उनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है। कोडिय़ाला से लेकर ऋषिकेश तक करीब पैंतीस किमी के राफ्टिंग जोन में पडऩे वाले विभिन्न घाट गंगा स्नान के लिए बेहद असुरक्षित हैं।सैंकड़ों पर्यटकों की जान पिछले कुछ वर्षों में मद्मस्ज मस्ती के लिए इन घाटों पर डुबकी लगाने के लिए जा चुकी है। बावजूद इसके तीन जनपदों की पुलिस इस पर रोक लगाने में कामयाब नही हो पा रही है।
तीर्थनगरी आने वाले पर्यटक तथा श्रद्धालु अक्सर गंगा के ऐसे घाटों पर स्नान के लिए पहुंच जाते हैं, जो घाट सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत खतरनाक हैं। दरअसल, यहां पानी का ऊपरी बहाव बेहद धीमा प्रतीत होता है, मगर सतह के नीचे बहाव बेहद तेज होता है। कई स्थानों पर घाटों पर गहरी चट्टानें और तेज भंवर हैं, जिन्हें सामान्य रूप से महसूस नहीं किया जा सकता। गंगा घाटों पर लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन चिंतिततो है पर हादसों पर अंकुश नही लगा पा रहा है।कई-कई किलोमीटर तक विस्तार लिए गंगा के घाटों पर पहरेदारी कर पाना पुलिस के लिए संभव नहीं हो पा रहा है। पुलिस ने ऐसे घाटों को जाने वाले रास्तों पर चेतावनी बोर्ड भी लगाए हैं। मगर, पर्यटक इनकी अनदेखी कर घाटों तक पहुंच जाते हैं। ऋषिकेश, मुनिकीरेती, लक्ष्मणझूला के गंगा घाटों पर लगातार डूबने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इनमें से अधिकांश गंगा घाट ऐसे हैं, जो सामान्य रूप से गंगा स्नान के लिए चिह्नित नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन के समक्ष अब ऐसे घाटों पर सुरक्षात्मक कदम उठाने की जरूरत है।गौरतलब ये भी है किसूचना और चेतावनी को पर्यटक लगातार अनसुना करते रहे हैं,जिसका अंजाम कई मर्तबा बेहद भयावह रूप में सामने भी आता रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि बेबस पुलिस प्रशासन के सामने गंगा में डूबने की घटनाओं पर अंकुश लगेगा तो फिर लगेगा कैसे।