कब तक होंगे दरोगा भर्ती घोटाले?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार और घोटाले तो बाइस सालों से राज्य की जनता देखती आ रही है लेकिन जिस पुलिस पर राज्यवासियों की सुरक्षा का जिम्मा है अगर उस पुलिस में भी भ्रष्टाचार और घोटाले का गुनाह होने लगे तो फिर आम आदमी कैसे खाकी पर विश्वास कर पायेगा यह अब राज्य के अन्दर एक बडा सवाल खडा हो चुका है? राज्य बनने के बाद दरोगा भर्ती घोटाला हुआ तो उसकी आंच पुलिस मुख्यालय में भी खुलकर देखने को मिली थी और उससे पुलिस के कई अफसर आवाम के निशाने पर आये थे अभी यह दरोगा भर्ती घोटाला राज्य के युवाओं के जहन से निकला भी नहीं था कि हरीश रावत राज में हुये दरोगा भर्ती में भी जिस तरह से एक बडे घोटाले की बात सामने आई और उसमें अब तक बीस संदिग्ध दरोगाओं को चिन्हित कर निलम्बित किया गया है वह पुलिस महकमें के बडे अफसरों पर भी सवालिया निशान लगा रहा है? दरोगा भर्ती घोटाले की जांच विजिलेंस कर रही है लेकिन वह भी पुलिस का अंग है जिससे राज्य के अन्दर बहस छिड गई है कि क्या विजिलेंस इस घोटाले में उन सभी गुनाहगारों को बेनकाब कर पायेगी जिन्होंने इस भर्ती में पर्दे के पीछे से भ्रष्टाचार का खेल खेल रखा है?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर सख्त हैं और उन्होंने राज्य के आयोगों द्वारा हुई कई भर्तियों की जब जांच करानी शुरू की तो उनमें से काफी भर्तियां भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी हुई नजर आई और उसके बाद भर्तियों में भ्रष्टाचार का खेल खेलने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया और संदेश दिया गया कि भर्तियों में भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा। वहीं हरीश रावत के कार्यकाल में 2०15-16 में राज्य के अन्दर दरोगा भर्ती हुये थे और इन भर्तियों में भी जब भ्रष्टाचार की बात उठने लगी तो राज्य के मुख्यमंत्री ने मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी थी और उसके बाद बीस संदिग्ध दरोगा विजिलेंस की रडार पर आये जिन्हें जांच पूरी होने तक निलम्बित किया गया है लेकिन सवाल यह खडा हो रहा है कि आखिरकार राज्य में कब तक दरोगाओं की भर्ती में घोटाले होते रहेंगे? यह घोटाला एक बडा घोटाला हो सकता है जैसी आशंकायें व्यक्त की जा रही हैं और अब तो जनसंघर्ष मोर्चा ने भी पुलिस के बडे अधिकारियों को रडार पर लिया है कि उन पर कार्यवाही कब होगी?

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