जोशीमठवासियों को सीएम पुष्कर से बहुत उम्मीद
चमोली/देहरादून। आदि जगदगुरू शंकराचार्य ने संपूर्ण भारत में भगवान विष्णु के चार धामों की स्थापना की थी। यह धाम हैं, बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, द्वारिका और रामेश्वरम्। माना जाता है कि बद्रीनाथ धाम की स्थापना करने के दौरान ही उन्होंने जोशीमठ शहर की भी स्थापना की थी। आदि जगदगुरू शंकराचार्य का यह शहर जोशीमठ आज एक बड़े संकट से गुजर रहा है। जोशीमठ में जमीन नीचे धंस रही है, जिसके कारण वहां की इमारतों में दरारों की बाड़ सी आ गई है। भूधंसाव और दरारों के कारण को यदि खंगाला जाए तो वह ठीक वैसा ही होगा जैसा कि किसी के जख्मों पर नमक लगाना। मौजूदा समय की स्थिति को देखकर ऐसा करना उचित नहीं समझा जा सकता। परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए वक्त है जख्मों पर मरहम लगाने का। यह मामला कितना संवेदनशील है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रधानमंत्री सहित पूरी केन्द्र सरकार की नजरें जोशीमठ के उपर लगी हुई है। उत्तराखण्ड की प्रचंड बहुमत वाली सरकार ने भी अपना पूरा फोकस जोशीमठ पर केंद्रित कर रखा है तथा वह जोशीमठवासियों की हर परेशानी को दूर करने के लिए चरणबद्ध नजर आ रही है। इस बात का प्रमाण ऐसे लगाया जा सकता है कि खुद सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी उसकी मॉनिट्रिंग स्वयं कर रहे है और उन्होंने शासन व प्रशासन के अधिकारियों को मुस्तैद किया हुआ है स्थानीय लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए मैदान पर उतार रखा है। जोशीमठ में इस समय जैसे हालात है वह कुछ दिनों पूर्व से आंशिक मात्र कुछ बेहतर नजर आ रहे है और इसका मुख्य कारण है सीएम पुष्कर सिंह धामी का संजिदगी से इस मामले की विवेचना करना और आपदा प्रभावितों को हर संभव लाभ पंहुचाना। यह नजारा देखकर ऐसा लग रहा है मानो जोशीमठ के आपदा प्रभावित लोगों की नैय्या को पार लगाने के लिए सूबे के मुखिया ने लिया हो धामी अवतार?
संवीदनशील इलाकों में शुमार चीन सीमा से सटे सीमांत जनपद चमोली कभी न कभी कुछ न कुछ ऐसा घटित हो जाता है जो सरकार से लेकर स्थानीय लोगों के लिए चिंता का सबब बन जाता है। वर्ष 2021 के फरवरी महीने में चमोली जनपद में स्थित नंदा देवी ग्लेशियर में हुए हिमस्खलन ने नीचे आते आते रौद्र रूप ले लिया था जिसकी वजह से काफी बड़ी संख्या में जनहानि हुई थी और कई लापता हो गए थे। मौजूदा समय में उसी चमोली जनपद के अब जोशीमठ शहर में भूधंसाव की वजह से शहर की इमारतों में दरारें आनी शुरू हो गई है। लोग पालायन को मजबूर है। हालांकि पिछली आपदाओं में और अभी की आपदा में अंतर जो नजर आ रहा है वह यह है कि इस बार सरकार की ओर से आपदा प्रभावितों को सिर्फ आश्वासन नहीं दिए जा रहे बल्कि सरकार खुद आपदा प्रभावितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई है? बीते सप्ताह प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने सारे कार्यक्रमों को रद्द करके आपदाप्रभावितों के दर्द को सुनने और उसके निवारण के लिए खुद जोशीमठ पंहुचे थे। जहां उन्होंने साफ कर दिया था कि आपदाग्रस्त जोशीमठ शहर में घर नहीं तोड़े जाएंगे। साथ ही प्रभावितों को बाजार दर पर मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि ‘किसी भी घर को तोडने का न कोई निर्णय हुआ है और न ऐसा कदम भविष्य में उठाया जाएगा। केवल अपरिहार्य होने पर ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी और वह भी भवन स्वामी की सहमति से। उन्होंने कहा था कि प्रभावितों को बाजार दर पर मुआवजा देने के लिए हितधारकों से सुझाव लेकर और जनहित में यह दर घोषित की जाएगी।
विदित है कि उत्तराखण्ड राज्य से देश के प्रधानमंत्री का एक अनूठा लगाव है। यहीं कारण है कि जब भी उत्तराखण्ड मंे कोई आपदा आती है तो वह स्वयं पहाड़ी प्रदेश की व्यवस्थाओं का जायजा लेते है। आपदाग्रस्त जोशीमठ की मदद के लिए भी उन्होंने केन्द्र से हर संभव मदद करने दम भरा है। केन्द्रीय कैबिनेट के अन्य मंत्री भी समय समय पर जोशीमठ मामले की अपडेट ले रहे है और वह उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लगातार संपर्क में बने हुए हैं। जोशीमठ वासियों को सीएम पुष्कर से बहुत उम्मीद है और इन उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए सीएम धामी युद्धस्तर पर जुटे हुए है।