मेरा जोशीमठ बचा लो हुजूर

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार के लिए कभी हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे लाईन पर हो रखे अतिक्रमण हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले वह विपक्ष के निशाने पर रही तो वहीं चमोली के जोशीमठ में भूधसाव से धरों, होटलों, सडकों में आ रही बडी दरारों ने जोशीमठ में रहने वाले हजारों लोगों के सामने अपने आशियाने बचाने की आस पर धीरे-धीरे ग्रहण लगता जा रहा है? जोशीमठ जिस तरह से आये दिन धस रहा है उससे जोशीमठ में रहने वाले आवाम की आंखों में आंसू और डर देखने को मिल रहा है और वह सरकार से यही पुकार लगा रहे हैं कि मेरा जोशीमठ बचा लो हुजूर? जोशीमठ अचानक जिस तरह से धसना शुरू हुआ है उससे सरकार के सामने उन्हें सुरक्षित बचाना और उनका पुर्नवास करने की एक बडी चुनौती आ खडी हुई है और विशेषज्ञों की राय के बाद जिस तरह से जोशीमठ के काफी हिस्से को आपदाग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है उससे यह आशंका भी प्रबल होने लगी है कि क्या आने वाले दिनों में जोशीमठ पर भूधसाव को लेकर जो संकट आ खडा हुआ है उस संकट से सरकार जोशीमठ को बचा पायेगी या फिर जोशीमठ धीरे-धीरे धसता चला जायेगा? जोशीमठ पर समूचे भारत की निगाह लगी हुई है और यह बहस भी छिड रही है कि आखिरकार जोशीमठ के धसने के पीछे के कारणों पर सरकार मंथन व चिंतन करेगी कि कहीं यह भू धसाव बेतहासा भवन निर्माण, सडक निर्माण और बिजली परियोजना का ही परिणाम तो नहीं है जिसके चलते जोशीमठ आज चप्पे-चप्पे पर दिखाई दे रही दरारों से डर के मुहाने पर खडा हो गया है?
उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से जोशीमठ में हो रहे बेतहासा भवन निर्माण, सडक निर्माण और बिजली परियोजना को स्थापित किये जाने को लेकर जोशीमठ बचाव समिति के मन में एक शंका खडी होती आ रही थी कि जिस तरह से वहां बिजली परियोजना का निर्माण हो रहा है उसके चलते कहीं जोशीमठ को इसका खामियाजा भुगतना न पड जाये? पिछले कुछ समय से अचानक जोशीमठ के घरों में शुरूआती दौर में दरारें पडनी शुरू हुई तो उससे जोशीमठवासियों के मन में एक बडा डर देखने को मिलने लगा और उनमें इस बात को लेकर शंका पैदा होने लगी कि कहीं यह दरारें आने वाले दिनों में उनके सामने विनाश का कारण न बन जायें? घरों में आ रही दरारों को लेकर जहां लोग अभी डरे और सहमें हुये थे वहीं कुछ होटलों में भी दरारें पडनी शुरू हुई तो उससे जोशीमठ एकाएक समूचे देश में चर्चा का विषय बन गया कि आखिर क्या कारण है कि जोशीमठ में लोगों के घरों और होटलों में दरारें आनी शुरू हो गई हैं और तो और सडकों में भी जिस तरह से दरारें देखने को मिली उससे जोशीमठवासियों के दिल दहलने लगे और उन्होंने अपने आशियाने और व्यवसाय बचाने के लिए आंदोलन की राह पकडी और जोशीमठ में तेजी के साथ हो रहे भूधसाव को देखते हुए उन्होंने अपने आशियानों और व्यापार पर खडे हुये एक बडे संकट को देखते हुए नम आंखों से सरकार की ओर टकटकी लगानी शुरू की कि हुजूर मेरे जोशीमठ को बचा लो? जोशीमठ में भूधसाव से आये संकट को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते रोज जोशीमठ में डेरा डाला और उन्होंने वहां जिस तरह से आवाम से मिलकर उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खडी हुई है और उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने राजधानी में आकर आपातकालीन बैठक बुलाकर गढवाल मण्डल आयुक्त सुशील कुमार और अपने सचिव मीनाक्षी सुन्दरम् को जोशीमठ में कैम्प करने के आदेश दिये थे। सरकार ने जोशीमठ में आये संकट से वहां के लोगों को बचाने के लिए अपनी सारी ताकत झोंक दी है और जैसे ही विशेषज्ञों ने भूधसाव को लेकर जोशीमठ में आ रही दरारों को लेकर अपना अध्ययन किया तो उन्होंने सरकार को अपनी सलाह दी तो उसके बाद सरकार ने शहर के डेढ किलोमीटर इलाके को आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया है और इस क्षेत्र को खाली कराया जा रहा है वहीं सेना ने भी चर्चा है कि अपनी कालोनी को खाली कर दिया है। जोशीमठ के डेढ किलोमीटर इलाके को आपदाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिये जाने से वहां रह रहे लोगों के मन में अपने आशियानों को बचाने की आस टूटती हुई नजर आ रही है और वह सरकार की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं कि हुजूर उनके जोशीमठ को बचा लो? वहीं यह बहस भी शुरू हो गई है कि जिस तरह से जोशीमठ धीरे-धीरे दरक रहा है उसे बचाने के लिए सरकार के पास ऐसी कोई जादू की छडी नहीं है कि उसे वह खिसकने से बचा सके? सवाल खडे हो रहे हैं कि पहाड में रहने वाला व्यक्ति जानता है कि पहाड में रहने का मतलब क्या है? पहाड की अपनी बोझ उठाने की एक क्षमता होती है और एक हद के बाद पहाड बोझ कैसे सह सकता है यह बात आज जोशीमठ पर भी सटीक दिखाई दे रही है। अब जोशीमठ कैसे बचेगा इस पर देशभर की निगाहें लगी हुई हैं?

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