हाईकोर्ट के आदेश पर विवादित भूमि ओर अवैध पातन की जांच शुरु

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विकासनगर(सतपाल धानिया)। राजावाला अवैध कटान और भूमि समतलीकरण मामले में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरने का सिलसिला लगातार जारी है। तो वहीं हाईकोर्ट के आदेश पर गठित टीमों द्वारा मौके की जांच पड़ताल भी जारी है।
इसी क्रम में आज तहसील विकासनगर अंतर्गत राजावाला की इस जंगल से लगती विवादित भूमि पर प्रमुख वन संरक्षक द्वारा गठित टीम द्वारा सीमांकन कर वहां से काटे गए प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों के साथ अन्य पेड़ों की गिनती शुरू कर दी है। दरअसल आपको बता दें कि जंगल से लगती यह भूमि प्राइवेट फोरेस्ट बताई जा रही इस भूमि पर अवैध तरीके से न केवल सैकड़ों की संख्या में प्रतिबंधित प्रजाति के साल व अन्य पेड़ों का कटान किया गया, बल्कि तहसील कर्मियों की सांठगांठ से नियम विरुद्ध भूमि समतलीकरण भी किया गया। मामला पिछले साल प्रकाश में आया और मीडिया की सुर्खियां बनी। तो वहीं मामला जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट पहुंचा। जिसका संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख वन संरक्षक की अगुवाई में जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए। जिसके चलते इस मामले में अब तक वन विभाग एक अधिकारी व दो कर्मचारियों और तीन राजस्व कर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है। तो वहीं तत्कालीन नायब तहसीलदार के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज हो चुका है।
वहीं अब प्रमुख वन संरक्षक द्वारा गठित वन विभाग की टीम द्वारा विवादित भूमि पर कटे पेड़ों की गिनती शुरू कर दी है। देहरादून डीएफओ नितेश मणी त्रिपाठी की अध्यक्षता में गठित वन विभाग की टीम ने जंगल से लगती विवादित भूमि का सीमांकन कर मौके पर पाए गए ठूंठों पर निशानदेही कर नंबर डालकर गिनती शुरू की। वहीं दूसरी ओर इस जांच पड़ताल के दौरान भू स्वामी और याचिकाकर्ता के साथ तीखी झड़प हुई। इतना ही नहीं भू स्वामी इस दौरान कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों से भी उलझते हुए नजर आए। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बामुश्किल मामले को शांत कराया।
अब देखना यह होगा कि आखिरकार इस मामले में किस किस पर गाज गिरती है, और पर्यावरण को पहुंचाये गये नुकसान की भरपाई हो पाती है या नहीं। तो वहीं याचिकाकर्ता राकेश तोमर उत्तराखंडी की पेड़ों के बचाने की मुहिम क्या रंग लायेगी ओर माननीय उच्च न्यायालय इस प्रकरण पर क्या फैसला सुनाता है क्या सैकड़ों बीघा जमीन पर खड़े जंगल को अवैध रूप से काटने वाले दोषियों को भी मिलेगा दंड हालाकि मामला करोड़ों रुपए की भूमि से जुड़ा हुआ है ओर यह प्रकरण हिंसक रूप भी ले सकता है याचिकाकर्ता द्वारा भी माननीय उच्च न्यायालय से सुरक्षा की गुहार भी लगाइ गई है आज भी जिस तरह प्रशासनिक अधिकारियों व मिडिया के सामने ही भू स्वामी द्वारा मीडिया और याचिकाकर्ता को धमकाया गया है यह भी चिंता का विषय है

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