राजधानी में गुनाह ही गुनाह!

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नकली दवायें, सट्टेबाजों का सिंडिकेट, खनन माफियाओं का तांडव रोकने में खाकी फिस्ड्डी?
सीएम के अपराधमुक्त राज्य के सपने पर लग रहा ‘ग्रहण’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री राज्य को आदर्श राज्य बनाने का संकल्प ले चुके हैं और उन्हांेने राज्य को अपराधमुक्त करने का जो वचन राज्यवासियांे को दिया है उसका अक्ष राजधानी में तो देखने को नहीं मिल रहा है और जिस तरह से राजधानी के अन्दर नकली दवायें बेचने वाले माफिया, सट्टेबाजों का सिंडिकेट, खनन माफियाओं का तांडव चल रहा है और सट्टे और जुए के अड्डे चलाने वाले सिंडिकेट को पुलिस के कुछ दरोगा और कर्मचारी जिस तरह से अपना खुला संरक्षण देकर सीएम के अपराधमुक्त राज्य के सपने पर ग्रहण लगाने में लगे हुये हैं उसे देखकर तो यह साफ हो रहा है कि ऐसे तत्वों पर या तो पुलिस का प्रेम चल रहा है या फिर वह उनका तांडव रोकने में खाकी फिस्ड्डी हो गई है? राजधानी पुलिस का इकबाल सिर्फ उस समय ही दिखाई देता है जब जनपद मंे कोई अपराध घटित होता है तो उसमें शामिल गुनाहगारों को पकडकर पुलिस जरूर अपनी पीठ थपथपा लेती है लेकिन अपराधियों के मन में पुलिस का कोई खौफ हो ऐसा तो अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है? इससे हैरान करने वाली बात क्या होगी कि राजधानी में सट्टेबाजों और जुए के अड्डे चलाने वालों के साथ नशा तस्करों का बडा सिंडिकेट अपने काले कारोबार को अंजाम देने में लगातार सफल हो रहा है और पुलिस के कुछ अफसर सबकुछ जानते हुए भी जिस तरह से घृतराष्ट्र की भूमिका में है उससे यह साफ हो रहा है कि पुलिस और अपराधियों के गठजोड के चलते राजधानी तो अपराधमुक्त होते हुए नहीं दिखाई दे रही है?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी राज्य पुलिस की कई बार पीठ थपथपा चुके हैं कि वह राज्य में अच्छा काम कर रही है लेकिन जिस तरह से राज्य के कुछ जिलों में अपराध का ग्राफ तेजी के साथ बढ रहा है और नशा माफियाओं पर पुलिस नकेल लगाने में नाकाम साबित हो रही है उससे राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी का प्रदेश को नशामुक्त कराने के संकल्प पर ग्रहण लगता हुआ ही दिखाई दे रहा है? कितनी हैरान करने वाली बात है कि राजधानी में पुलिस, एसओजी व एसटीएफ का लम्बाचौडा तंत्र मौजूद है लेकिन उन्हें भी इस बात की भनक तक नहीं लगी कि सेलाकुई में दवाई माफिया फैक्ट्री मंे नकली दवाईयां बना रहे हैं और जिस तरह से पंजाब पुलिस ने राजधानी मंे आकर नकली दवाई फैक्ट्री पर कार्यवाही की और उसके मालिक को गिरफ्तार किया उससे राजधानी पुलिस व ड्रग विभाग की टीम कटघरे में खडी हुई नजर आ गई और यह सवाल उठा कि जब राजधानी में नकली दवाईयां बनाने का तांडव चल रहा है तो राज्य के कुछ और जनपदों में ऐसा तांडव नहीं चल रहा होगा इसकी क्या गारंटी है? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस अफसरों को आदेश दिये कि जिन अपराधियों ने गुनाह से सम्पत्तियां अर्जित की हैं उन पर गैगेस्टर एक्ट लगाकर उनकी सम्पत्तियों को सीज किया जाये लेकिन राजधानी में तो मुख्यमंत्री के आदेश पुलिस के कुछ दरोगा और सिपाही हवा में उडाते हुए नजर आ रहे हैं? कितनी हैरान करने वाली बात है कि शहर के अन्दर क्रिकेट सट्टेबाजों का बडा सिंडिकेट क्रिकेट सट्टे के अलावा मटका सट्टा तो चला ही रहा है साथ में कुछ कुख्यात सट्टेबाज जुए के अड्डे बेखौफ होकर चला रहे हैं और उन इलाकों की चीता पुलिस को भी इन जुए के अड्डों की जानकारी है लेकिन वह दौलत के लालच में जुआ खिलाने वाले सिंडिकेट से दौलत लेकर उन्हें पुलिस के सारे मिशन की बडी चालाकी के साथ सूचनायें देने का गुप्त खेल भी खेलते हैं? शहर के अन्दर एक चाचा-भतीजा ऐसे हैं जो घर पर ही जुए के अड्डे चलाने से पीछे नहीं हट रहे और जुए के अड्डे के बाहर पुलिस पर निगाह रखने के लिए उनके कुछ गुर्गे गलियों में मंडराते रहते हैं ऐसे में इन तत्वों पर पुलिस का हंटर न चलना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि पुलिस के कुछ अफसर और दरोगा घृतराष्ट्र बनकर गुनाह करने वाले गुनाहगारों को अपना मौन समर्थन दिये हुये हैं? उत्तराखण्ड की राजधानी मंे अगर नकली दवाई बनाने वाले माफियाओं, जुआ, सट्टा और अवैध खनन करने वाले माफियाओं में पुलिस का अगर कोई डर नहीं दिख रहा है तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर पर्दे के पीछे से उन्हें कौन अपनी खुली पनाह दिये हुये है जिससे उनके मन में पुलिस का तिनकाभर भी भय नहीं रह गया? राजधानी में अगर गुनाह ही गुनाह नजर आ रहा है तो इस पर राज्य के मुख्यमंत्री जो खुद गृहमंत्री भी हैं उन्हें इस बात का हिसाब पुलिस अफसरों से लेना चाहिए कि आखिरकार गुनाह करने वाले सिंडिकेटों मंे से कितने गैंगेस्टरों की उन्होंने अब तक अपराध से कमाई गई सम्पत्ति को सील किया और कितने गुनाहगारों की उन्होंने हिस्ट्रीशीट खोली है। राजधानी मंे अपराधियों को सिर्फ अपराध के बाद जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने से राजधानी अपराधमुक्त हो जायेगी यह सम्भव नहीं है?

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