दिल्ली के होटल मालिक की आत्महत्या मंे सुसाईड नोट का गपोल शंख बजा रही मीडिया

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गजबः एक पेपर के एडिशन में सुसाईड नोट नहीं मिला और राजधानी के उसी पेपर में सुसाईड नोट का बजा दिया ढोल
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के अन्दर अफसरशाही के खिलाफ कैसे साजिशों का खेल शुरू हो जाता है यह किसी से छिपा नहीं है? अफवाह फैलाने वाला एक सिंडिकेट हमेशा चर्चाओं में रहा है कि वह पर्दे के पीछे से ऐसा कुचक्र रचता है कि जिससे कुछ राजनेताओं और अफसरों को निशाना बनाया जा सके लेकिन ऐसे चेहरों को बेनकाब करने के लिए कभी भी कोई मिशन नहीं चला जिसके चलते इस सिंडिकेट के हौसले काफी बुलंद हो रखे हैं? दिल्ली के होटल मालिक की आत्महत्या के एक माह बाद उत्तराखण्ड की राजधानी में अपने आपको मीडिया का सुपर बताने वाले चंद संस्थान ने दिल्ली के होटल मालिक की आत्महत्या में उनके द्वारा सुसाईड नोट में उत्तराखण्ड के एक आईपीएस का नाम होने का जो गपोल शंख बजाया है वह हैरान करने वाला है। गजब की बात तो यह है कि जब यह आत्महत्या हुई तो गाजियाबाद से एक समाचार पत्र ने दम भरा कि होटल मालिक की आत्महत्या में पुलिस को कोई सुसाईड नोट नहीं मिला है लेकिन उसी समाचार पत्र ने अपने राजधानी के एडिशन में यह ढोल बजा दिया कि व्यापारी ने आत्महत्या को लेकर एक सुसाईड नोट लिखा था। हालांकि इस सुसाईड नोट को लेकर जिस तरह से मीडिया के कुछ लोगों ने गपोल शंख बजाकर उत्तराखण्ड के अन्दर एक हलचल मचाई है उसको लेकर यह आशंकायें भी पनप रही हैं कि कहीं यह सारा प्रपंच उसी सिंडिकेट ने तो नहीं रचा जो अकसर अफवाहों को जन्म देता रहा है?
उल्लेखनीय है कि ‘क्राईम स्टोरी’ ने तीन दिसम्बर को ही इस बात का खुलासा कर दिया था कि दिल्ली में होटल मालिक की आत्महत्या में पुलिस को मौके से कोई सुसाईड नोट नहीं मिला था लेकिन इसके अगले दिन राजधानी के कुछ समाचार पत्रों में यह गपोल शंख बजा दिया गया कि होटल मालिक ने आत्महत्या के दौरान एक सुसाईड नोट लिखा था जिसे दिल्ली पुलिस ने सील किया था। इन समाचार पत्रों को आखिर कहां से फीडबैक मिला कि होटल मालिक ने आत्महत्या के दौरान सुसाईड नोट लिखा था जिसमें उत्तराखण्ड के एक आईपीएस के नाम का उल्लेख किया गया था? होटल मालिक की आत्महत्या में सुसाईड नोट का जो विस्फोट मीडिया के चंद घरानों ने किया उससे उत्तराखण्ड के अन्दर एक बडी हलचल भी मची और सब एक दूसरे से यही सवाल करने लगे कि आखिरकार सुसाईड नोट में किस आईपीएस का नाम लिखा हुआ था? हांलाकि मामला जब काफी तूल पकडने लगा तो पुलिस के बडे अधिकारी सामने आये और उन्होंने इस मामले में दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर उनसे मामले की सच्चाई जाननी चाही। बहस यह भी चल रही है कि आखिरकार वो कौन सा सिंडिकेट है जो एक बडी रणनीति के तहत अफवाह फैलाने का खेल बडे नाटकीय ढंग से खेलने में माहिर हो रखा है? उत्तराखण्ड के अन्दर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बडा बिगुल बजा रखा है और राज्य की जनता को इस बात का इल्म है कि किन अफसरों ने भ्रष्टाचार से दौलत कमाई है और कौन-कौन अफसर ईमानदारी के लिए पहले पायदान पर हमेशा राज्य की जनता के सामने खडे हुये हैं? उत्तराखण्ड में काफी समय से कुछ अफसरों और मीडिया के कुछ लोगों का पर्दे के पीछे से इतना बडा गठबंधन हो रखा है कि वह अपने विरोधी अफसरों को निशाने पर लेने के लिए कोई मौका नहीं चूकते? उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री और उनकी किचन टीम जिस तरह से राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बडी मुहिम के तहत काम कर रही है उसका आईना राज्य की जनता भी देख रही है लेकिन जिस तरह से राज्य के मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ खुला ऐलान कर रखा है वह कई सफेदपोशों, अफसरों और मीडिया के कुछ लोगों को रास नहीं आ रहा है और यही कारण है कि दिल्ली में एक होटल मालिक की आत्महत्या के मामले में मीडिया के कुछ घरानों ने शोर पीट दिया कि होटल मालिक ने आत्महत्या करने के दौरान एक सुसाईड नोट भी लिखा था जबकि यह साफ होता आ रहा है कि होटल मालिक ने आत्महत्या के दौरान कोई सुसाईड नोट नहीं लिखा था लेकिन इसके बावजूद भी कुछ मीडिया घरानों ने आखिर किसके इशारे पर यह गपोल शंख बजा दिया कि होटल मालिक ने मरने से पहले एक सुसाईड नोट लिखा था?

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