देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री दिखाई दिये हैं जिन्होंने होमगार्डों को भी पुलिस की भांति उनका दर्द समझने का मनसूबा दिखाया है। होमगार्डों की हर ड्यूटी में उनके सेवाभाव को देखते हुए मुख्यमंत्री उनकी पीठ हमेशा थपथपाते आ रहे हैं और उनके मानदेय को भी बढाने में वह कभी कंजूसी नहीं करते जिसके चलते राजधानी के अन्दर होमगार्ड जवानों को बेहतर ड्यूटी करते हुए देखा जा रहा है और होमगार्डों के मन में एक आशा की किरण जाग गई है कि अब उन्हें भी कहीं न कहीं भत्ता पुलिसकर्मियों की भांति मिलने लगेगा। मुख्यमंत्री का मानना है कि होमगार्ड भी लम्बे अर्से से पुलिस की भांति हर मोर्चे पर अच्छा काम करता हुआ दिखाई दे रहा है इसी के चलते होमगार्डों के मन में अब वो भावना नजर नहीं आ रही जो काफी अर्से पूर्व उनके अन्दर अपने मानदेय को लेकर हुआ करती थी।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य के अन्दर सभी सुरक्षाकर्मियों का मनोबल बढाते हुए दिखाई देते हैं और उनके हित की योजनायें वह धरातल पर उतारने के लिए हमेशा अगली पक्ति में खडे हुये रहते हैं जिसके चलते सुरक्षाकर्मियों को भी अब एक आशा की किरण दिखाई देने लगी है कि राज्य के मख्ुयमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो संकल्प लेते और वचन देते हैं उसे वह जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए आगे खडे हुये दिखाई देते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि राज्य को आदर्श राज्य बनाने में सुरक्षाकर्मियों का भी बडा योगदान है इसलिए उनके सामने कोई भी ऐसी समस्या न आये जिस कारण उन्हें अपनी ड्यूटी के दौरान किसी भी चिंता को दिमाग में लाना पडे? पुलिसकर्मियों की राज्य में ताबडतोड भर्तियां और उन्हें एक से एक सुविधा देने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिस तरह से आगे आ रखे हैं उससे राज्य के सभी सुरक्षाकर्मियों के मन में एक बडी आशा दिखाई दे रही है कि सरकार उनके साथ खडी हुई है। उत्तराखण्ड में लम्बे समय से होमगार्ड के जवान अपने आपको उपेक्षित महसूस करते थे कि उनका वेतन उतना नहीं है जितना एक परिवार को पालने के लिए सम्भवत: होना चाहिए। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के होमगार्डों के मन में एक नई आशा का संचार किया है कि अब उन्हें सरकार इतना भत्ता देगी कि उन्हें उस बात की निराशा नहीं होगी कि वह अपने परिवार को किस तरह से कम वेतनमान में पालेंगे?