खुश रहो तुम सदा…

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देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को भी शायद इस बात का इल्म नहीं होगा कि वह मात्र एक साल के भीतर राज्यवासियों के दिलों में ऐसा राज करेंगे कि हर तरफ एक ही आवाज सुनाई देगी कि हे महानायक आप पर पहले भाजपा के दिग्गज नेताओं की नजर क्यों नहीं गई? आवाम का मानना है कि अगर भाजपा के दिग्गज नेताओं ने पुष्कर सिंह धामी को 2०17 में भाजपा की कमान सौंपी होती तो आज उत्तराखण्ड भ्रष्टाचारमुक्त होता और राज्य में विकास की एक नई किरण उदय होती हुई दिखाई देती। मात्र एक साल के भीतर अगर राज्य के युवा मुख्यमंत्री सबका दिल जीतने में प्रथम आ चुके हैं तो इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक लम्बे युग तक पुष्कर सिंह धामी की सत्ता को विपक्ष हिला नहीं पायेगा? धामी की वाणी और बुजुर्गों के प्रति उनकी दरियादिली से आवाम उनका कायल होता जा रहा है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक सरल स्वभाव के मुख्यमंत्री हैं और वह गरीब से गरीब इंसान को भी सीने से लगाने से पीछे नहीं हटते और उनका दयालुपन उस समय देखने को मिल जाता है जब उन्हें किसी रास्ते पर कोई वृद्ध महिला दिखाई देती है तो उनके कदम अपने आप उसके पास रूक जाते हैं फिर वह उस वृद्ध महिला को मां कहकर उससे जब संवाद करते हैं तो हर कोई उस दृश्य को देखकर यह कहने से नहीं चूकता कि पुष्कर सिंह धामी में भी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अक्स दिखाई देता है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अब तक के कार्यकाल में राज्य की जनता को यह देखने को नहीं मिला कि वह अपने आपको मुख्यमंत्री मानकर सत्ता चला रहे हों। पुष्कर सिंह धामी ने राज्यवासियों को साफ संदेश दे रखा है कि वह जन सेवक हैं और सेवा करना ही उनकी पहली प्राथमिकता है क्योंकि सत्ता तो आती जाती है इसलिए इस सत्ता पर किसी भी राजनेता को अहंकार नहीं करना चाहिए। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा कोई मुख्यमंत्री देखने को मिल रहा है जो राज्य के अन्दर सबसे मुलाकात करने के लिए हरदम आगे बढता हुआ दिखाई दे रहा है। पुष्कर सिंह धामी के मन में बुजुर्गों को लेकर जो दरियादिली अब तक देखने को मिली है उसने बुजुर्गों के मन में जीने की एक आशा की किरण जगा दी है और यही कारण है कि कोई भी बुजुर्ग मुख्यमंत्री के सामने अपना दर्द बयां कर अपनी आंखों में आंसू भरता है तो मुख्यमंत्री व उनके सामने आंसू भरकर खडा बुजुर्ग भावकुता में बह जाते हैं और मुख्यमंत्री उस बुजुर्ग के आंसू पोछते हुए उन्हें जिस तरह से अपने सीने से लगाकर उन्हें अपना मान रहे हैं उसने उत्तराखण्ड की राजनीति में पुष्कर ंिसह धामी ने एक नई संस्कृति को जन्म दे दिया है और राज्य की जनता पुष्कर सिंह धामी के इस अनोखे रूप को देखकर उनके कायल होती जा रही है और यह बात भी उभरने लगी है कि जो मुख्यमंत्री मात्र तीन माह के भीतर युवाओं को रोजगार देने के लिए बडा फैसला ले रहा है और हर वर्ग को इंसाफ देने व उनका हक उन्हें दिलाने के लिये बडे-बडे फैसले लेने के लिए तिनकाभर भी अपनी डगर से नहीं भटक रहा है उस राजनेता को अगर पांच साल तक दुबारा सत्ता मिलेगी तो वह राज्य की तकदीर व तस्वीर बदल कर रख देगा। पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल में राज्य के अन्दर रहने वाले बुजुर्गों के आंसुओ ंको पोछने के लिए जिस तरह से अपनी जन सेवक के रूप में दरियादिली को उडेलने के लिए अपनी वचनबद्धता से आगे बढना शुरू किया है उससे राज्य के अन्दर एक नई बहस चल गई है कि पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जो अपने आपको राज्य की जनता का सेवक समझते हैं और वह अब तक के अपने कार्यकाल में किसी के साथ भी द्वेष भावना के साथ पेश नहीं आये हैं यही कारण है कि आज राज्य की जनता उन्हें उत्तराखण्ड का हृदय सम्राट मानकर उनके लिए दुआ कर रही है कि ऐसे मुख्यमंत्री को एक लम्बे युग तक सत्ता पर काबिज रखे जिससे उत्तराखण्ड की युवा पीढी भी एक विश्वास के साथ राज्य में रहे कि अब पुष्कर सिंह धामी के होते हुए उन्हें किसी और राज्य में नौकरी के लिए पलायन करने की जरूरत नहीं पडेगी।

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