डीजीपी माफियाओं पर नकेल लगाने में ‘नाकाम’

0
179

प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी भू और खनन माफियाओं पर नकेल लगाने के लिए राज्य के डीजीपी को आदेश दे चुके हैं जिसके बाद यह आशा बंधी थी कि उत्तराखण्ड में माफियाओं का अंत होगा लेकिन मुख्यमंत्री के विजन पर खाकी राजधानी के अन्दर ही ग्रहण लगाती हुई नजर आ रही है? हैरानी वाली बात है कि छोटे-छोटे मामलों में दरोगाओं पर कार्यवाही करने वाले डीजीपी आखिरकार राजधानी के एक बडे भू-माफिया और उसके साथियों पर कार्यवाही कराने में शत-प्रतिशत नाकाम साबित हुये और उससे यह साफ झलक रहा है कि भू-माफिया और खाकी मेंं कितना बडा गठजोड चल रहा है? भू-माफियाओं पर गैंगेस्टर एक्ट लगाने का दम भरने वाले डीजीपी आखिरकार राजधानी के एक बडे भू-माफिया के सामने क्यों बौने साबित हो गये यह हैरान करने वाली बात है? सरकार के मुखिया जिनके पास गृह विभाग है और वह पुलिस में पारदर्शिता के साथ काम करने का सभी अधिकारियों को आदेश दे रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी अगर कुछ बाहुबली भू-माफियाओं पर पुलिस गैंगेस्टर लगाना तो दूर उन पर कार्यवाही करने के लिए भी अगर आगे नहीं आ रही है तो उससे समझा जा सकता है कि राज्य के डीजीपी भू-माफियाओं पर नकेल लगाने में किस कदर नाकाम हो चुके हैं? एक शराब पीने के मामले में यूट्यूबर ब्लाकर को लेकर जिस तरह से डीजीपी ने उसका मीडिया ट्रायल किया और ऐसे भौकाल मचाया गया मानो डीजीपी और उनकी पुलिस बॉबी कटारिया पर कितना बडा शिंकजा कस देगी? बॉबी कटारिया को उत्तराखण्ड से लेकर दूसरे राज्यों में खोजने वाली राजधानी पुलिस को उस समय बॉबी कटारिया ने आईना दिखा दिया जब वह पुलिस की तमाम रणनीति को भेदते हुए न्यायालय में आत्म समर्पण कर गया और अदालत ने उसके गुनाह को देखते हुए उसे जमानत पर रिहा कर दिया था जिससे उत्तराखण्ड में बॉबी कटारिया को लेकर पुलिस की जबरदस्त फजीहत हुई थी?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भले ही राज्य में माफियाराज खत्म करने का संकल्प लेकर आगे बढ रहे हों लेकिन राज्य के कुछ जनपदों में डीजीपी की पुलिस खनन और भू-माफियाओं पर नकेल लगाने में फिस्ड्डी दिखाई दे रही है? मुख्यमंत्री 2०25 तक उत्तराखण्ड को माफियामुक्त बनाने का संकल्प ले चुके हैं लेकिन उनके इस सपने पर कुछ जनपदों की पुलिस पलीता लगाने में लगी हुई है? हैरानी वाली बात है कि कुछ समय पूर्व राज्य के डीजीपी अशोक कुमार ने ऐलान किया था कि राज्य में सक्रिय भू-माफियाओं पर गैंगेस्टर एक्ट की कार्यवाही की जायेगी उनके इस आदेश से राज्यवासियों को एक आशा की किरण दिखाई दी थी कि अब भू-माफियाओं पर पुलिस का बडा शिकंजा कस देगी। गजब की बात है कि राजधानी में चंद भू-माफिया ऐसे हैं जो कहीं न कहीं पुलिस के साथ एक बडा गठबंधन किये हुये हैं और उनके अपराध पर पुलिस के कुछ लोग पर्दा डालने में विश्वास रख रहे हैं? ‘क्राईम स्टोरीÓ ने कुछ समय पूर्व डीजीपी को आईना दिखाया था कि एक भू-माफिया पर कई मुकदमें दर्ज होने के बाद भी उस पर कार्यवाही नहीं हो रही है? भू-माफिया का सच सामने लाने के बावजूद भी डीजीपी ने इस बडे भू-माफिया को लेकर कोई रणनीति तैयार नहीं की जिससे कि उस पर एक बडा शिकंजा कसा जा सके? छोटे-छोटे भू-माफियाओं पर भले ही पुलिस कार्यवाही करने के लिए आगे आ रही हो लेकिन जिस तरह से बडे भू-माफिया को राजधानी के अन्दर ही अभयदान मिला हुआ है उससे सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है? सरकार के मुखिया जब स्पष्ट कर चुके हैं कि जो भी माफिया हैं उन पर पुलिस सख्त एक्शन अमल में लाये लेकिन उनके आदेशों को डीजीपी की पुलिस क्यों हवा में उडाती आ रही है यह हैरान करने जैसा ही नजर आ रहा है? राजधानी के अन्दर एक पॉवरफुल भू-माफिया के आगे डीजीपी भी क्यों लम्बे अर्से से खामोश हैं यह समझ से परे है क्योंकि जब डीजीपी छोटे-छोटे मामलों की भी समीक्षा करके कुछ दरोगाओं के खिलाफ कार्यवाही कर चुके हैं तो फिर बडे भू-माफिया के खिलाफ हो रखे मुकदमों की समीक्षा करने के लिए क्यों अपने कदम आगे नहंी बढाये यह अब डीजीपी की कार्यशैली पर भी सवाल खडे कर रहा है?

LEAVE A REPLY