भ्रष्टाचार के कैंसर का ऑपरेशन करते पुष्कर

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महानायक उत्तराखण्ड में रच रहे इतिहास
सारथी ईमानदार तो सरकार भी ईमानदार
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक साल से हल्के में आंक रहे काफी सफेदपोश और मीडिया का एक सिंडिकेट उन्हें लम्बे समय से अपने निशाने पर लेने का खेल खेलता आ रहा है लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी सबको नजरअंदाज करते हुए उत्तराखण्ड में जहां विकास का पहिया तेजी के साथ आगे बढाते जा रहे हैं वहीं उन्होंने बडे-बडे भ्रष्टाचारियों के अन्दर समाये कैंसर का ऑपरेशन इस कदर करना शुरू कर दिया है कि भ्रष्ट तंत्र में खलबली मच गई है और भ्रष्टाचारियों को यह आभास हो गया है कि मोदी के सखा पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को जड से उखाड फेंकने का जो संकल्प लिया था उसे अब वह धरातल पर तेजी के साथ उतारने के लिए आगे आ चुके हैं। पुष्कर राज में एक के बाद एक बडे-बडे भ्रष्टाचारियों की गिरफ्तारी से यह बात साफ हो चुकी है कि अब राज्य के अन्दर वर्षों से पनपते आ रहे भ्रष्टाचारियों की जडों पर प्रहार करने के लिए मुख्यमंत्री ने चाबुक अपने हाथ में ले लिया है और राज्य के अन्दर यह बात अब उफान पर है कि उत्तराखण्ड के महानायक बनते जा रहे पुष्कर सिंह धामी राज्य में एक नया इतिहास रचने के मिशन में आगे बढ चुके हैं। राज्य की जनता अब यह कहने से भी नहीं चूक रही कि जब मुख्यमंत्री के सारथी ईमानदार हैं तो फिर सरकार भी तो ईमानदारी से चलेगी। आवाम के मन में पुष्कर सिंह धामी ने एक भावना पैदा कर दी है कि भ्रष्टाचार की दीमक को वह जब तक जड से समाप्त नहीं कर देंगे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे क्योंकि वह सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए नहीं बने हैं बल्कि राज्यवासियों को जो बाइस सालों से भ्रष्टाचार व घोटालों का तांडव सहना पड रहा था उस पर अब पुष्कर का बडा ऑपरेशन शुरू हो चुका है।
राज्य में भर्ती परीक्षाओं में हुई धाँधलियों पर मुख्यमन्त्री पुष्कर सिंह धामी के जीरो टॉलरेंस के सिद्धांत का पालन करते हुए उत्तराखंड एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई की है। यूकेएससीसी द्वारा 2016 में कराई गई वीपीडीओ भर्ती परीक्षा में धांधली की जाँच में आज आरबीएस रावत पूर्व चेयरमैन,सचिव मनोहर कन्याल,पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरएस पोखरिया को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह भर्ती परीक्षा प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही है । 2016 के मामले में लंबे समय से जाँच चल रही थी लेकिन मुख्यमन्त्री के कड़े रुखघ् के बाद जाँच एजेंसियों ने भी तेजी दिखाई। मुख्यमंत्री धामी पिछले कई अवसरों पर बार बार कह रहे हैं कि वो अपने युवा भाई बहनों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे, सरकारी नौकरियों की भर्ती में भ्रष्टाचार का जो दीमक लगा है उसे वे जड़ से मिटा देंगे। इस क्रम में वीपीडीओ भर्ती में 6 वर्ष बाद विधिसम्मत कार्यवाही कर सीएम ने एक बड़ी लकीर खींच दी है।
मुख्यमंत्री धामी ने एसटीएफ की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि “ जाँच एजेंसिया अपना काम कर रही हैं। उत्तराखंड के युवा का हक मारने वाले किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि भविष्य की सभी भर्ती परीक्षाएँ स्वच्छ और पारदर्शी हो। आज की कार्रवाई इस बात की मिसाल है कि भविष्य में कोई इन परीक्षाओं में गड़बड़ी करने की हिम्मत न कर सके“। बतादें कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा दिनांक 6 मार्च 2016 को ग्राम पंचायत विकास अधिकारी चयन परीक्षा करवाई गई उक्त परीक्षा 6 मार्च 2016 को समस्त 13 जनपदों के 236 परीक्षा केंद्रों में संचालित की गई थी। उक्त परीक्षा में कुल 87196 परीक्षार्थियों द्वारा प्रतियोगी परीक्षा में भाग लिया गया था। 30 मार्च 2016 को परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया था। उक्त परीक्षा में धांधली के मद्देनजर विभिन्न शिकायतों के आधार पर उत्तराखंड शासन द्वारा तत्कालीन अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच समिति वर्ष 2017 में गठित की गई थी। जांच समिति द्वारा प्रेषित आख्या के आधार पर सम्यक विचारोंप्रांत , एवं माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के क्रम में उक्त परीक्षा में अनियमितताओं की पुष्टि होने के कारण उक्त परीक्षा परिणाम को निरस्त किया गया। वर्ष 2019 में सचिव कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग के निर्देशानुसार उक्त परीक्षा में हुई अनियमितताओं के संबंध में जांच सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर देहरादून को प्राप्त हुई।
वर्ष 2020 में सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर देहरादून द्वारा खुली जांच में पुष्टि होने पर उक्त परीक्षा में हुई अनियमितताओं की पुष्टि होने पर सतर्कता अधिष्ठान देहरादून में मुकदमाअपराध संख्या 01/20 धारा 420/468/467/120ठ पचब व धारा 13 (1) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग शासन की अनुमति उपरांत पंजीकृत कराया गया। अभियोग पंजीकृत होने के बाद वर्ष 2020 से वर्ष 2022 तक उक्त प्रकरण की विवेचना सतर्कता अधिष्ठान देहरादून द्वारा की जा रही थी। वर्ष 2022 माह अगस्त में माननीय मुख्यमंत्री के निर्देश अनुसार उक्त प्रकरण की विवेचना एसटीएफ को स्थानांतरित हुई। एसटीएफ द्वारा विवेचना को आगे बढ़ाते हुए साक्ष्य संकलन की कार्रवाई की गई। पूर्व में जांच कमेटी द्वारा उक्त परीक्षा से संबंधित ओएमआर शीट को थ्ैस् भेजा गया था एवं थ्ैस् से उक्त व्डत् शीट में छेड़छाड़ होने की पुष्टि हुई थी। विवेचना के दौरान यह भी पाया गया कि उक्त परीक्षा से संबंधित ओएमआर स्कैनिंग/फाइनल रिजल्ट बनाए जाने का का कार्य तत्कालीन सचिव मनोहर सिंह कन्याल के घर पर हुआ था। विवेचना के दौरान अभी तक दो दर्जन से अधिक अभ्यर्थी चिन्हित किए गए हैं और उनके बयान एसटीएफ द्वारा दर्ज किए गए। विवेचना के दौरान कई अहम गवाहों के बयान न्यायालय में भी कराए जा चुके हैं जो केस की अहम साक्ष्य है। विवेचना के दौरान पूर्व में तीन अभियुक्त मुकेश कुमार शर्मा, मुकेश कुमार, राजेश पाल को एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।
एसटीएफ द्वारा पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर आज तत्कालीन अध्यक्ष यूकेएसएसएससी डॉ रघुवीर सिंह रावत पुत्र स्वर्गीय श्री दुर्गा सिंह रावत निवासी 188/1 ऑफिसर सोसायटी वसंत विहार देहरादून। तत्कालीन सचिव यूकेएसएसएससी मनोहर सिंह कन्याल पुत्र प्रताप सिंह कन्याल निवासी वन 169/2 वन विहार शिमला बायपास देहरादून। वर्तमान पद- सँयुक्त सचिव लेखा सचिवालय देहरादून। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक यूकेएसएसएससी राजेंद्र सिंह पोखरिया पुत्र स्वर्गीय प्रेम सिंह पोखरिया निवासी 1/29 कृष्ण पुरम माजरी माफी आईआईपी मोहकमपुर देहरादून को पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। आज जिस तरह से एसटीएफ ने एक बडी कार्यवाही को अंजाम दिया है उससे साफ नजर आ गया है कि धाकड धामी का साफ विजन है कि भ्रष्टाचारी चाहे कोई छोटा हो या बडा हो सब सलाखों के पीछे पहुंचेंगे।

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