राजनीतिक असुरों का संहार करो पुष्कर

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। प्रभु श्रीराम की महानता से शायद ही कोई अनभिज्ञ हो। उनके प्रभुत्व का गुणगान हम हमेशा से सुनते आए हैं। हर किसी व्यक्ति की यह चाहत होती है कि वह प्रभु श्रीराम जैसी ख्याति प्राप्त करें या उसके समकक्ष ही पंहुच सकें। उनकी महानता के प्रतीक के रूप में हम सभी दशहरा का त्यौहार मनाते है। दशहरा ही वो दिवस है जब प्रभु श्रीराम ने असुरों के संहार के अपने क्रम को अंजाम तक पंहुचाया था और राम राज की स्थापना की थी। जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे असुरी शक्तियों से लबरेज कई लोगों ने भी जन्म लिया और उनके संहार के लिए उत्कृष्ट विभूतियां भी अवतरित हुई जिनके कारण आज तक असत्य पर हमेशा सत्य की जीत होती आई है और आने वाले समय में भी जीत सत्य की होगी। हालांकि आज के समय में कुछ जयचंद ऐसे भी है जो यह मान के चलते है कि उनके छद्म षड़यंत्रों की रूपरेखा रचने से जनहित मे कार्य करने वाले इंसान का वह अहित कर सकते है जबकि उन्हें यह पता होना चाहिए कि जनहित में कार्य करने वाला व्यक्ति वो है जिन्होंने जन के हृदय में अपना स्थान सुरक्षित कर रखा है, तो उनका अहित कौन कर सकता है भला …? उत्तराखण्ड के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस पहाड़ी राज्य के हित में कई उल्लेखनीय कार्य कर रहे है और कार्य भी ऐसे जिसकी मात्र कल्पना ही की जा सकती है। भ्रष्टाचार पर पुष्कर का लठ ऐसे बरसता हुआ नजर आ रहा जिसके विषय में कभी किसी ने सोना ही नहीं होगा। जिस प्रकार से किसी वाद को लेकर फास्ट ट्रेक कोर्ट अपनी कार्रवाई करता है ठीक उसी प्रकार से धामी सरकार संगीन मामलों पर तेजी से काम कर रही है। यह तो एक नियम जैसा ही बन चुका है कि यदि कोई जनहित में बढ़िया का करेगा, उसके खिलाफ षड़यंत्र के बीज बोने के लिए कोई न कोई आग आ ही जाएगा, फिर चाहे वह इस काम को पर्दे के पीछे ही क्यों न अंजाम दें। पुष्कर अच्छा काम कर रहें है, और यहीं बात उनके कुछ विरोधियों के हलक से नीचे उतर नहीं रहीं है। कुछ राजनीतिक असुरों के एक कॉकस ने हठधर्मिता का बीड़ा उठाते हुए सीएम के खिलाफ साजिशों का ताना बाना बुनना शुरू कर दिया हैं और इस बात अनुमान साफ लगाया जा सकता है। जो व्यक्ति जनहित में अच्छा काम करता है जनता उसको अपना अराध्य मान लेती है लेकिन अराध्य का कार्य सिर्फ जनहित तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि ऐसी असुरी शक्तियों का संहार करना भी होता है न सिर्फ व्यक्ति विशेष के लिए बल्कि जनता के लिए हानिकारक होते है। कामना सिर्फ इतनी ही कर सकते है कि जिस प्रकार से प्रभु श्रीराम ने असुरों का संहार किया था ठीक उसी प्रकार से उत्तराखण्ड की लोकप्रिय मुख्यमंत्री इस राज्य के राजनीतिक असुरों का भी संहार करें ताकि जिस विकास पथ पर वे राज्य आगे बढ़ा रहे, उस यात्रा में बाधा न आए।
पिछले 22 सालों में उत्तराखण्ड की कमान संभालने वाले प्रत्येक मुख्यमंत्री ने यह दावा तो जरूर किया कि वह इस पहाड़ी प्रदेश से भ्रष्टाचार को जड़ से मिटा देंगे लेकिन धरातल पर उनके यह दावे धाराशायी होते हुए ही दिखे। भाजपा सरकार के बीते कार्यकाल के अंतिम समय में पार्टी हाईकमान ने बड़े मंथन के बाद पुष्कर सिंह धामी को सत्ता की चाबी सौंपी थी। पार्टी हाईकमान का यह मंथन एक मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ और बीते वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तराखण्ड के इतिहास में एक नए अध्याय को जोड़ते हुए लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत की सरकार का निर्माण किया। उत्तराखण्ड की पुष्कर सिंह धामी सरकार गुड गवर्नेंस की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही है लेकिन देखने में आ रहा है कि संगठन से संबंध रखने वाले ही सोशल मीडिया पर उनको टार्गेट करने में लगे हुए और वो भी तब जबकि सबको नजर आ रहा है कि सीएम धामी ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ किस प्रकार से एक्शन मोड में है। फिर चाहे उत्तराखण्ड अधिनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परिक्षाओं में हुई अनियमित्ताओं की जांच हो या फिर दरोगा भर्ती घोटाले की जांच, धामी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उत्तराखण्ड की एक मासूम बेटी के गुनाहगारों को उनके अंजाम तक पंहुचाने के लिए एसआईटी का गठन करके धामी सरकार ने एक कठोर संदेश दिया है। अच्छे कार्य करने वाले लोगों को सम्मान तो बहुत मिलता है लेकिन इसी बीच उनके दुश्मनों की संख्या में भी इजाफा हो जाता है। ऐसे ही इजाफे की सुगबुगाहट अब होने लगी है। इस सुगबुगाहट को दफन करने के लिए सीएम धामी को खुद ही मैदान में उतरना पड़ेगा और इस दशहरे पर उन्हें राजनीतिक असुरों का संहार करना ही होगा और एक मिसाल को स्थापित करना होगा ताकि आने वाले समय में कोई असुरी शक्ति अपना सिर न उठा सके।

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