पॉलिटिकल ऑपरेशन की आहट!

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देहरादून। उत्तराखण्ड में सरकार के मुखिया भले ही भ्रष्टाचार और धोटालों के खिलाफ अपना हंटर चलाने के लिए आगे आ रखे हों लेकिन विधानसभा में हुई बैकडोर भर्तियों, यूकेएसएसएससी पेपर लीक के साथ अन्य भर्ती घोटालों में भाजपा व कांग्रेस के कुछ नेताओं की मिलीभगत होने की आशंकाओं ने उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में हलचल मचा रखी है और जिस तरह से अब संघ से जुडे चंद नेताओं का नाम उछला है उससे प्रदेश की राजनीति में एक नया उबाल देखने को मिल रहा है? बहस यह भी चल रही है कि आखिर संघ के एक पदाधिकारी को लेकर जिस तरह से सोशल मीडिया पर उन्हें निशाने पर लिया गया उसके पीछे आखिर वो कौन चेहरे हैं जो संघ पदाधिकारी की आड में सरकार को ही निशाने पर लाने का चक्रव्यूह रचने के लिए एक बडी रणनीति के तहत आगे आये हैं? उत्तराखण्ड में जिस तरह से भाजपा के कुछ नेताओं पर आरोप का पिटारा फूट रहा है उससे राज्य में पॉलिटिकल ऑपरेशन की आहट सुनाई दे रही है और यह भी चर्चाएं उफान पर हैं कि भाजपा हाईकमान सीएम के मंत्रिमण्डल में जिन चंद चेहरों को लेकर आरोप लग रहे हैं उनके खिलाफ कोई बडा ऑपरेशन चलाकर पुष्कर सिंह धामी को राज्य की जनता के सामने बेदाग होकर सत्ता चलाने के लिए फिर आगे खडा किया जायेगा? राज्य की जनता नवरात्रों में पुष्कर ंिसह धामी का नया रूप देखने की ललक में है कि क्या वह अपने मंत्रिमण्डल में फेरबदल करने के लिए आगे आएगें?
उल्लेखनीय है कि विधानसभा बैकडोर भर्ती, नोब पेपर लीक व अन्य भर्ती घोटालों में भाजपा-कांग्रेस के नेताओं की मिलीभगत के बाद अब संघ से जुड़े नेताओं का नाम उछलने के बाद प्रदेश की राजनीति नयी करवट लेती दिखाई दे रही है। भर्ती घपलों से उत्तराखंड, दिल्ली तक सुनाई दे रही है इसके बाद राज्य में एक बड़े पॉलिटिकल आपरेशन की आहट साफ सुनाई दे रही है? 2०23 के निकाय व 2०24 के लोकसभा चुनाव में इन भर्ती घोटालों के ‘नायकोंÓ की सीधी पड़ती छाया को देख पीएम मोदी की देखरेख में मेगा सर्जरी की तैयारी शुरू हो गयी है। संघ के शीर्ष नेतृत्व भी भर्ती घोटाले से जुड़े मामले की पल पल रिपोर्ट ले रहा है। विधानसभा बैकडोर भर्ती की जांच के बाद धामी कैबिनेट व उत्तराखंड को देख रहे आरएसएस कैडर में बडे बदलाव की संभावना जताई जा रही है? विपक्ष के हमले रोकने व जनता की नाराजगी को दूर करने के लिए भाजपा नेतृत्व चिन्हित नेताओं को किनारे पर बैठाने जा रहा है। इस कड़ी में धामी कैबिनेट में काफी फेरबदल की संभावना भी जताई जा रही है? भर्ती घपले के देशव्यापी खतरे को भांपते हुए भाजपा व संघ आलाकमान उत्तराखंड के बाबत कई विकल्पों पर मंथन में जुट गया है। चूंकि, उत्तराखंड के बेरोजगारों के रोजगार से जुड़े मामले में छलकपट की पूरी फिल्म के खास किरदार अभी भी फुल स्विंग में बालिंग कर रहे हैं। इन किरदारों के खिलाफ जनहितकारी एक्शन नहीं होने पर युवाओं का आक्रोश अब नयी शक्ल अख्तियार करता जा रहा है। देहरादून, हल्द्वानी के अलावा कई कस्बों में जारी आन्दोलन अब नेताओं के व्यक्तिगत विरोध में तब्दील होने की दिशा में बढ़ रहा है। पूर्व विधानसभाध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल को टिहरी में काले झंडे दिखा विरोध की खबरें सामने आ चुकी है। युवा वर्ग रात में थाली बजा विरोध के स्वर तेज कर रहा है। आने वाले कल में जनप्रतिनिधियों के खुले घेराव की खबरें सामने आ सकती है? भाजपा नेतृत्व के लिए उत्तराखंड के इस भर्ती घोटाले में कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के कूदने से भी स्थिति असहज देखी जा रही है। राहुल गांधी व अरविंद केजरीवाल इन घोटालों को राष्ट्रीय स्तर पर उठा कर इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव 2०24 तक जिंदा रखने की रणनीति पर चल रहा है?
यूँ तो, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पेपर लीक मामले में जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह के अलावा किसी बड़े भाजपा नेता का नाम सामने नहीं आया। लेकिन विधानसभा बैकडोर भर्ती में भाजपा के कई नेताओं के (कांग्रेस के भी) नाम सामने आ चुके हैं। इसके अलावा सहकारिता, पुलिस भर्ती व अन्य विभागों में बांटी व खरीदी गई नौकरियों में भी कई नेताओं व अधिकारियों की मिलीभगत भी चर्चा के केंद्र में है। नतीजतन, जनता गहरे आक्रोश में है। वहीं कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के जर्मनी दौरे ने उन्हें सोशल मीडिया पर खूब निशाने पर ले रखा है और सवाल उठ रहा है कि एक ओर तो राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी बेदाग होकर सत्ता चला रहे हैं वहीं दाग लगने के बावजूद मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल का जर्मनी दौरा उन्हें आवाम के कटघरे में खडा कर रहा है जिसका परिणाम आने वाले समय में राज्य की जनता के सामने भी आ सकता है?

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