उत्तराखंड को तपती आग में छोड़ विदेश निकले प्रेमचन्द

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विधानसभा भर्ती घोटाले की जांच से आवाम के निशाने पर मंत्री!
देहरादून। विधानसभा में हुये भर्ती घोटाले की आग में तप रहे उत्तराखंड के वित्त व शहरी विकास मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल ने आज दोपहर सपत्नी जर्मनी की उड़ान भर ली और राज्य में इस भर्ती घपले को लेकर चल रहे तूफान में राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को अकेला छोडकर जिस तरह से नैतिकता की दुहाई देने वाले मंत्री विदेश रवाना हुये हैं उससे उनकी विदेश यात्रा पर राज्य के अन्दर सवालिया निशान लगने शुरू हो गये हैं? हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड के हर रण में राज्य के मुख्यमंत्री सफेदपोशों और मीडिया के एक सिंडिकेट के बीच फसे हुये नजर आ रहे हैं ऐसे में उनके साथ सारथी बनकर खडे होने के बजाए कैबिनेट मंत्री ने जिस तरह विदेश की सैर का पैमाना अपनाया है उससे वह अब यह सवाल तैर रहे हैं कि जिस मंत्री पर एक के बाद एक आरोपों की झडी लग रही है वह राज्य की जनता का सामना करने के बजाए आखिर विदेश जाने के लिए क्यों आगे आ गये भले ही उनका यह दौरा पहले से ही तय था?
मिली जानकारी के अनुसार कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के साथ अपर मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन भी गए है। विदेश यात्रा में कुछ अन्य लोग भी शामिल हैं। वित्त मंत्री प्रेमचन्द अपने काफिले के साथ आज दोपहर 1 बजे एयर इंडिया की फ्लाइट से रवाना हुए। जर्मनी की यात्रा से 24 सितम्बर को भारत लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। कैबिनेट मंत्री की जर्मनी यात्रा पूर्व में ही तय हो गयी थी। लेकिन शासन स्तर पर वित्त मंत्री की इस यात्रा का कोई कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। लिहाजा, कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल की जर्मनी यात्रा किस उद्देश्य से की जा रही है। मंत्री किस मुद्दे पर जर्मनी में बैठकें करेंगे, यह साफ नहीं हो पाया है? गौरतलब है कि शनिवार को ही टिहरी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वित्त मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल को काले झंडे दिखाए। बीते कुछ दिनों से उत्तराखंड की विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्ती के मामले में पूर्व विधानसभाध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल को जबरदस्त मीडिया ट्रायल से गुजरना पड़ रहा है। विधानसभा में सचिव मुकेश सिंघल को प्रमोशन देने व बैकडोर से 72 नियुक्ति देने के मामले में कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल की मीडिया से तीखी नोकझोंक के वीडियो भी वॉयरल हो चुके हैं। इन दिनों, उत्तराखंड में नेेेब पेपर लीक व अन्य विभागीय भर्तियों में घोटाले को लेकर बेरोजगार युवक,संगठन व राजनीतिक दल सड़कों पर उतरे हुए हैं। देहरादून, हल्द्वानी समेत अन्य ग्रामीण कस्बों में चिन्हित नेताओं, अधिकारियों व दलालों के पुतले फूंके जा रहे हैं।
यही नहीं, शनिवार को संघ के प्रांत प्रचारक युद्धवीर सिंह यादव के नाम से नौकरी पर लगे लोगों के नाम की कथित वॉयरल सूची के बाद सत्ता के गलियारों में तूफान मच गया। संघ की तहरीर पर मुकदमा दर्ज होने के बाद मामला और भी संगीन हो गया है। इन सभी घपलों पर सीएम पुष्कर धामी को अकेले ही जूझते देखा जा रहा है। बतादें कि भाजपा व सरकार से जुड़े जिन लोगों के नाम भर्ती घपले में सामने आ रहे हैं उन्हें लेकर जनता में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के भर्ती घोटाले के बाद पूर्व विधानसभाध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल के समय हुई नियुक्तियों की जांच एक समिति कर रही है। तीन सदस्यीय विधानसभा भर्ती जांच समिति घपले से जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर रही है। ऐसे में वित्त मंत्री का विदेश दौरे पर निकल जाना भी लोगों को नहीं पच रहा है। इस बीच, स्पीकर ऋतु खंडूड़ी कह चुकी हैं कि जांच समिति तय समय यानी एक महीने से पहले अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। जांच समिति का गठन तीन सितम्बर 2022 को हुआ था। इधर, जनता को जांच रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है। उधर, पूर्व विधानसभाध्यक्ष व मौजूदा मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल का बेहद नाजुक मोड़ पर नई दिल्ली से जर्मनी की फ्लाइट पकड़ लेने से सत्ता के गलियारों में उनकी विदेश यात्रा की प्रासंगिकता पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं? वहीं इस भर्ती के अलावा उन पर जिस तरह से एक के बाद एक आरोपों की बारिश हो रही है उससे उनके राजनीतिक भविष्य पर एक बडा खतरा मंडराता हुआ दिखाई दे रहा है?

सीएम साहब सरकार की सम्पत्ति खुर्दबुर्द करने वाले मंत्री की करा दो जांच
कोटद्वार(संवाददाता)।उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने की ऋषिकेश में राज्य सरकार की संपत्ति खुर्द बुर्द किये जाने की शिकायत मुजीब नैथानी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लिखे पत्र में की है। उन्होंने लिखा है कि जिला देहरादून के परगना परवादून की तहसील ऋषिकेश के खाता खतौनी के खाता संख्या एक में 279/1 खसरा संख्या राज्य सरकार के नाम अंकित है। उक्त के कॉलम 6 में उक्त भूमि पर स्थगन आदेश के आदेश दर्ज हैं। व भूमि को पूर्वरत्त रखे जाने के भी आदेश हैं। उसके बावजूद तत्कालीन तहसीलदार ऋषिकेश और उप जिलाधिकारी ऋषिकेश के द्वारा उक्त भूमि को वाद रहित बताते हुए नगर निगम में उक्त भूमि के नामांतरण को मंजूरी देने के लिए अनापत्ति प्रदान कर दी गई।
नगर निगम से प्राप्त सूचना के अनुसार भवन कर लिपिक के द्वारा भी उक्त खसरे को प्रतिबंधित खसरा बताया गया। उसके बावजूद नगर निगम में नगर निगम के अधिकारियों ने सरकारी भूमि का नामांतरण पीयूष अग्रवाल पुत्र प्रेमचंद अग्रवाल के नाम कर दिया। क्योंकि यह मामला पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व वर्तमान वित्त मंत्री से सीधे सीधे जुड़ा हुआ है अतरू इस मामले की गंभीरता बढ़ जाती है। आपत्ति हेतु जारी इश्तेहार किस अखबार में दिया गया इसका भी नहीं पता चला है और इश्तहार में खाता खसरा संख्या का उल्लेख छिपा दिया गया। ऐसे में सम्पत्ति कौन सी है यह इश्तहार देख कर पता नहीं चलता है। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री से जांच एवं कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

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