प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की राजनीति का इतिहास रहा है कि राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री कभी भी भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ आगे नहीं बढे जिसके चलते उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर आवाम के मन में हमेशा सरकार को लेकर बडी नाराजगी पनपती रही तथा यह बहस छिडने लगी कि आखिरकार राज्य के कुछ पूर्व मुख्यमंत्री जब खुद को ईमानदारी के पायदान पर खडा कर रहे थे तो वह भ्रष्टों और माफियाओं के खिलाफ गांडीव उठाने के लिए क्यों आगे आने से बचते रहे? उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री के रूप में जब युवा राजनेता पुष्कर सिंह धामी की ताजपोशी हुई तो राज्य के अन्दर चारो ओर यही सशंय बना हुआ था कि जो राजनेता आज तक मंत्री नहीं बना वह मुख्यमंत्री की कुर्सी कैसे संभाल पायेगे? राज्य के अन्दर बनी इस सोच को युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सफल रणनीति के चलते सबको हैरान कर दिया था और उन्होंने राज्य में वर्षों से चली आ रही अधिकांश भर्तियों में हुये घोटाले और भ्रष्टाचार की जांच कराकर यह साबित कर दिया कि वह राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त करने की दिशा में किस तरह से आगे बढ चुके हैं। मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचारियों और माफियाओं पर चल रही कार्यवाही को लेकर राज्य के अन्दर चारो ओर एक ही शोर मचा हुआ है कि देखो-देखो कौन आया… शेर आया, शेर आया। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को राज्य की आवाम अगर शेर का दर्जा दे रही है तो उससे उन सफेदपोशों और मीडिया के एक सिंडिकेट में खलबली मची हुई है जो किसी न किसी बहाने मुख्यमंत्री को राज्य में अस्थिर करने का लम्बे समय से चक्रव्यूह रच रहे हैं?
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने आठ साल के कार्यकाल में भाजपा के किसी भी मुख्यमंत्री के साथ ऐसा स्नेह नहीं दिखाया जैसा स्नेह वह उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ खुले रूप से दिखा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो कि देश भर से भ्रष्टाचार और घोटालों का अंत करने के लिए एक संकल्प के साथ आगे बढ रहे हैं उन प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड से भ्रष्टाचार और घोटालों का संहार करने के लिए पुष्कर सिंह धामी को अपना सखा मानकर उन्हें फ्रीहैंड राजनीति करने के लिए आगे किया हुआ है। पुष्कर सिंह धामी की अब तक मुख्यमंत्री के रूप में दिखाई दी राजनीतिक पारी सौ प्रतिशत शुद्ध और पारदर्शी नजर आ रही है लेकिन उनके बढते रूतबे से भाजपा के ही कुछ लोग और उनके इशारे पर अपनी कलम को मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रयोग करने वाले एक सिंडिकेट का खेल राज्य के अन्दर बार-बार देखने को मिल रहा है? गजब बात यह है कि उत्तराखण्ड में पहली बार ऐसा दिलेर मुख्यमंत्री आया जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली जंग लडने का ऐलान कर रखा है और वह सवा लाख से एक लडाऊ की भूमिका में राज्य के अन्दर दिखाई दे रहे हैं। बाइस सालों से राज्य में हुई काफी भर्तियों में हुये घोटालों को बेनकाब करने का साहस जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी ने दिखा रखा है उससे वह राज्यवासियों की आंखों के तारे बन चुके हैं और मुख्यमंत्री खुद यह बात स्वीकार कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार करने वाला चाहे कितना भी बडा क्यों न हो उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाना उनका पहला कर्तव्य है। मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्दर जिस तरह से एक के बाद एक काफी भर्तियों की जांच एसटीएफ व विजिलेंस को सौंपी है उससे भ्रष्टाचारियों और नकलमाफियाओं के सिंडिकेट में खलबली मची हुई है। मुख्यमंत्री को भले ही कुछ सफेदपोश और मीडिया का सिंडिकेट उन्हें बार-बार अस्थिर करने की साजिश रच रहा हो लेकिन इन सभी साजिशों को हवा में उडाते हुए पुष्कर सिंह धामी दबंगता के साथ राज्य के अन्दर स्वच्छता के सहारे सरकार चलाते हुए नजर आ रहे हैं। चंद भाजपा के नेता जो राज्य के अन्दर हवाबाजी फैला रहे हैं कि नवरात्रों में उत्तराखण्ड के अन्दर एक बडा बदलाव देखने को मिलेगा उन चंद भाजपा नेताओं को इस बात का इल्म होना चाहिए कि जिस पुष्कर सिंह धामी को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना सखा बना रखा है वह सखा राज्य में ऐसी हवाबाजी को नजर अंदाज कर एक शेर की तरह सत्ता चलाकर राज्यवासियों को भ्रष्टाचार से आजादी दिलाने का खुला वचन दे रहे हैं और यही कारण है कि उत्तराखण्ड में अब चारो ओर एक ही शोर मच रहा है कि देखो-देखो कौन आया शेर आया…शेर आया।
