प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की जनता बाइस सालों से भ्रष्टाचार के रावण से लड-लडकर हार चुकी थी और उसे ऐसी कोई आशा दिखाई नहीं दे रही थी कि कोई फरिश्ता आकर उन्हें भ्रष्टाचार के राक्षसों से उनकी रक्षा करेगा। वहीं जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड की कमान युवा चेहरे पुष्कर सिंह धामी को सौंपी तो उन्होंने बाइस सालों से उत्तराखण्ड के अन्दर पनपते आ रहे भ्रष्टाचार के हर राक्षस का अंत करने के लिए धनुषबाण उठा लिया है और संदेश दे रखा है कि भ्रष्टाचार करने वाला चाहे कितना भी बडा क्यों न हो उसे अब सलाखो के पीछे पहुंचाना उनका अब प्रथम कर्तव्य है। यूकेएसएसएससी में हुये भर्ती घोटालों में आयोग के पूर्व सचिव समेत छह के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश दिये गये हैं जिससे राज्य के अन्दर एक भूचाल मचा हुआ है कि अब हर वो चेहरा बेनकाब होगा जिन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार और घोटालों को अंजाम देकर अपने आपको आज तक सुरक्षित रख रखा था। अफसरों के खिलाफ विजिलेंस जांच का आदेश देना सीधेतौर पर इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2०25 तक राज्य को जो भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लिया हुआ है उस पर वह तेजी के साथ आगे बढने के मिशन में लगे हुये हैं।
उत्तराखण्ड में बाइस सालों से राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर शोर तो जरूर मचता रहा लेकिन राज्य के अन्दर किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार और घोटालों के बडे-बडे खिलाडियों को खुला खेल खेलने वालों पर नकेल लगाने का साहस नहीं दिखाया जिसके चलते उनके हौसले इतने बुलंद होते चले गये कि युवाओं के भविष्य का भी वह नोटों में सौदा करने से पीछे नहीं हटे। राज्य में हुई हजारों भर्तियों में जिस तरह से भ्रष्टाचार का काला खेल सामने आया है उसने राज्यवासियों को हैरान कर दिया है कि आखिरकार पूर्व सरकारें आंखों पर पट्टा बांधकर सत्ता चला रही थी कि उन्हें इस बात का इल्म ही नहीं हुआ कि उनके राज्य में युवाओं के भविष्य के साथ किस तरह से खिलवाड किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ रौद्र रूप धारण किये हुये हैं और इसी के चलते पेपर लीक मामले में आयोग के पूर्व सचिव संतोष बडोनी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक नारायण सिंह डांगी और तीन अनुभाग अफसरों के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश देकर साफ संदेश दे दिया है कि राज्य में अब भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम ने युद्ध छेड दिया है।
