प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में लम्बे समय से ग्रेड-पे का मुद्दा उफान पर था और उसी के चलते विधानसभा चुनाव में एक साजिश के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कुछ साजिशकर्ताओं ने पर्दे के पीछे रहकर उन्हें खटीमा में चुनाव हराने का चक्रव्यूह रचा और इस चक्रव्यूह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी फंस गये और उन्हें चुनाव मे हार मिली लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए एक बार फिर पुष्कर सिंह धामी को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया था और उपचुनाव में उनकी जिस तरह से एतिहासिक जीत हुई उससे साफ झलक गया था कि खटीमा में उनके खिलाफ सिर्फ इसलिए चक्रव्यूह रचा गया था कि वह चुनाव हार गये तो उन्हें राज्य की कमान नहीं मिल पायेगी लेकिन साजिशकर्ताओं के अरमानों पर भाजपा हाईकमान ने पानी फेर दिया और पुष्कर सिंह धामी को फिर राज्य का मुखिया नियुक्त किया। मुख्यमंत्री बनते ही पुष्कर ंिसह धामी ने ऐलान किया था कि वह ग्रेेड-पे के मुद्दे को हल करेंगे लेकिन राज्य के अन्दर यह अफवाहें उडाई गई कि मुख्यमंत्री सिर्फ हवाबाजी में ही पुलिसकर्मियों को उलझा रहे हैं लेकिन ऐसी सोच रखने वाले सभी लोगों को मुख्यमंत्री ने अपने एक मास्टर स्ट्रोक से धडाम कर दिया और ग्रेड-पे का जिस अंदाज मंे उन्हांेने हल निकाला उससे राज्य में पुलिसकर्मियों के वह मसीहा बन गये। अब उन पुलिसकर्मियों की भी हसरत पूरी होगी जो हमेशा यह मंथन करते थे कि उनके कंधे पर शायद कभी एएसआई का स्टार नहीं लग पायेगा लेकिन मुख्यमंत्री ने उनके इस सपने को पूरा करने के लिए जिस तरह से एक बडा फैसला लिया है उससे साफ झलक गया है कि मुख्यमंत्री किस विजन के तहत राज्य को आगे बढाने का सपना देख रहे हैं जहां हर कोई खुशहाल ही खुशहाल नजर आयेगा।
बीते रोज राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिसकर्मियांे के ग्रेड-पे को लेकर जिस तरह से बडा फैसला लेते हुए 4600 ग्रेड-पे वाले पुलिसकर्मियांे को दीपावली से पहले एक बडा गिफ्ट दिया है उससे वह पुलिस महकमें में मसीहा बन गये हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर यह आवाज उठने लगी है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वो सीएम हैं जिन्होंने चुनाव से पहले जो वायदा किया था उसे वह धरातल पर उतार रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तराखण्ड में लम्बे समय से राज्य के अन्दर ग्रेड-पे को लेकर काफी बवाल मच रहा था और इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी पुलिसकर्मियों को अपनी ओर खिंचने का विधानसभा चुनाव से पूर्व बडा प्रयास किया था। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने पुलिसकर्मियों के लिए जो सौगात दी थी उस पर पुलिसकर्मी खफा हो गये थे और यही कारण था कि विधानसभा चुनाव के दौरान खटीमा में भी पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा में ग्रेड-पे के मुद्दे को काफी उछाला गया और राज्य के मुख्यमंत्री को हर तरफ निशाना बनाने का जो खेल चलता रहा उसकी गूंज समूचे राज्य में देखने व सुनने को मिलती रही। विधानसभा चुनाव के बाद उपचुनाव में पुष्कर सिंह धामी ने पुलिसकर्मियों से वायदा किया था कि वह ग्रेड-पे के मुद्दे को बेहतर तरीके से हल करेंगे जिसको लेकर पुलिसकर्मियों में लम्बे समय से एक बडी बेचौनी देखने को मिल रही थी कि आखिरकार पुष्कर सिंह धामी उनके 46०० के ग्रेड-पे को लेकर क्या फैसला करेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अपनी किचन टीम के साथ मिलकर पुलिसकर्मियों के 46०० ग्रेड-पे का एक बेहतर विकल्प तैयार किया और इस विकल्प के तहत उन्होंने राज्य में नये रैंक सृजित कर इस जटिल विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस जवानों की ग्रेड-पे की समस्या का समाधान जिस अंदाज से निकाला है उससे वह एक बार फिर उत्तराखण्ड में राजनीति के महापंडित बन गये हैं। पुलिस विभागों में कांस्टेबलों के 17,5०० पद है और हैडकांस्टेबल के 3,44० पद हैं लेकिन राज्य पुलिस में एडिशनल एएसआई का एक भी पद नहीं है जिसको देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस जवानों को समय से पदोन्नति देने के लिए हैड कांस्टेबल रैंक के 175० नये पद सृजित करने तथा एडिशनल एएसआई का नया रैंक सृजित करते हुए 175० नये पद स्वीकृत करने का आदेश दिया है और इन सबका ग्रेड-पे 46०० होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने ग्रेड-पे का मुद्दा जिस तरह से हल किया है उससे वह उत्तराखण्ड में मसीहा की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
