धनसिंह-गणेश की राजनीतिक लड़ाई पहुंची सीएम के दरबार

0
119

उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री धनसिंह रावत और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के बीच जिस तरह से भ्रष्टाचार को लेकर एक दूसरे पर वार किया जा रहा है उससे उत्तराखण्ड की राजनीति में एक नया समीकरण देखने को मिल रहा है। मंत्री के समर्थन में पार्टी के कुछ नेता आगे आये हैं और गणेश गोदियाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की शिकायत दी तो उसके बाद कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दरबार में दस्तक दी और उन्होंने एक पत्र देते हुए साफ कहा कि उन पर जो आरोप लगाये जा रहे हैं उसकी जांच को लेकर वह तैयार है इसलिए वह चाहते हैं कि मंत्री और उनकी जांच कराई जाये। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व मंत्री के बीच भ्रष्टाचार को लेकर चला आ रहा आरोपों के पिटारे की गेंद अब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पाले में आ गई है और अब देखने वाली बात होगी कि मुख्यमंत्री इस मामले में क्या रूख अपनायेंगे?
देहरादून(नगर संवाददाता)। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर विभागीय मंत्री डा. धनसिंह रावत की जांच के साथ साथ उनकी अध्यक्षता वाली मंदिर समिति पर लगाये गये विभिन्न अनियमितताओं की जांच की मांग की है और साथ ही कार्रवाई न होने पर मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठने की भी चेतावनी दी।
इस अवसर पर पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उन्हें शिकायती पत्र सौंपा है और कहा कि समिति के एक वर्तमान सदस्य ने उनकी अध्यक्षता वाली मंदिर समिति पर विभिन्न अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत विभागीय मंत्री से करने के बजाय मेरे राजनैतिक प्रतिद्वंदी धन सिंह रावत जो की वर्तमान सरकार काबिना मंत्री है उनसे की गई है। पत्र में कहा की कैबिनेट मंत्री डा. धनसिंह रावत द्वारा मंदिर समिति के सदस्य की शिकायत का संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी किये गये है जिसका वह स्वागत करते है।
गोदियाल ने पत्र में कहा कि मेरे द्वारा उत्तराखंड राज्य के सहकारिता विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग में कैबिनेट मंत्री धनसिंह रावत के प्राश्रय में हुए तमाम घोटालों को उद्धत करते हुए इन घोटालों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी, जिस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। गोदियाल ने पत्र में कहा है कि सार्वजनिक एवं राजनैतिक जीवन में यह आवश्यक है कि लगाये गये आरोपों पर दोहरा मापदण्ड नहीं अपनाया जाना चाहिए तथा शिकायत की तटस्थ भाव से जांच एवं तदनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे की समाज का लोकतांत्रिक राजनीति मूल्यों एवं राजनीतिज्ञों पर विश्वास बना रहे। गोदियाल ने पत्र में कहा है कि मुझ पर व मेरी अध्यक्षता वाली मंदिर समिति पर लगाये गये आरोपों की जांच के साथ ही कैबिनेट मंत्री धनसिंह रावत के प्रश्रय में सहकारिता विभाग में हुए भर्ती घोटाले, ऋण आवंटन घोटाले तथा स्वास्थ्य विभाग में फर्जी बिलों के आधार र आयुष्मान योजना के तहत हुए घोटालों की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की देखरेख में एक सप्ताह के अंदर पृथक से अलग अलग जांच समितियां गठित की जाये। पत्र में कहा गया कि अन्यथा ऐसा न करने की स्थिति में मुझे भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने एवं अपने मान सम्मान की रक्षा हेतु लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री आवास सम्मुख इस मांग को लेकर घरने पर बैठने पर मजबूर होना पडेगा।

LEAVE A REPLY