रघुनाथ का हरक पर ‘वार’

0
242

जमीन को सरकार के पक्ष मंे अधिग्रहत करने को खोला मोर्चा
फिर निकला शंकरपुर जमीन का जिन्न बाहर
उत्तराखण्ड के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर अभी कर्मकार बोर्ड मंे हुये कथित घोटाले को लेकर एसआईटी की जांच का बिगुल बजा ही था कि भाजपा के लैंसडॉन से विधायक ने कर्मकार बोर्ड में हुये घोटाले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र तक लिखा था। अभी यह मामला जांच के दायरे में है लेकिन इसी बीच जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष ने सहसपुर के शंकरपुर की एक जमीन का जिन्न बोतल से बाहर निकाल दिया और यह आरोप लगाया कि जालसाजी से मास्टर र्माइंड हरक सिंह रावत ने फर्जी मां-बेटा तैयार कर एक सौ सात बीघा भूमि हडपी है और इस जमीन को लेकर उन्हांेने हरक सिंह रावत पर वार करते हुए सरकार से इस जमीन को अधिग्रहत कर जालसाजों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग बुलंद की है और यहां तक आरोप लगाया है कि अगर ऐसा न हुआ तो भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने के दावे हवा-हवाई होंगे। रधुनाथ सिंह नेगी ने जिस जमीन को लेकर हरक सिंह रावत पर वार किया है उस मामले की गूंज वर्षों पूर्व भी उत्तराखण्ड के अन्दर गंूजी थी और जांच को भी शुरू किया गया था लेकिन समय के फेर व हरक सिंह रावत के सत्ता में पॉवरफुल होने के कारण इस जांच का कुछ पता नहीं चल पाया था। अब जिस तरह से एक बार फिर इस जमीन का जिन्न बोतल से बाहर आया है उससे हरक सिंह रावत के सामने एक बार फिर बडा संकट खडा हो सकता है?

विकासनगर(संवाददाता)। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि वर्ष 2002 में डा. हरक सिंह रावत ने राजस्व मंत्री बनते ही मात्र एक साल के भीतर ही शंकरपुर, सहसपुर की 107 बीघा जमीन पर ऐसी नियत भरी की फर्जी सुशीला रानी के नाम से फर्जी हस्ताक्षरित पत्र स्वयं के नाम लिखवाया, जिसमें 7 अप्रैल 2003 को इनके द्वारा जिलाधिकारी को सुशीला रानी के नाम दाखिल खारिज कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में माल कागजात में सुशीला रानी का नाम दर्ज हो गया।
यहां पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि सुशीला रानी का नाम दर्ज कराने से पहले ही बड़ी चालाकी से डा.हरक सिंह रावत ने अपने करीबी पीए, पीआरओ वीरेंद्र कंडारी (समीक्षा अधिकारी) के नाम 5 दिसम्बर 2002 को फर्जी महिला एवं फर्जी बेटा (जो ेकि विकासनगर ब्लॉक का रहने वाला है) प्रस्तुत कर नई दिल्ली में पावर ऑफ अटॉर्नी संपादित करा ली।
उन्होंने कहा कि जबकि सुशीला रानी की मृत्यु वर्ष 1974 में हुई, ऐसे साक्ष्य मिले हैं। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि पावर ऑफ अटॉर्नी से मात्र तीन माह पहले सुशीला रानी उर्फ सावित्री देवी वर्मा ने अपने पुत्र भीमसेन वर्मा के नाम वसीयत संपादित कराई थी, जिसमें उन्होंने हस्ताक्षर के रूप में सावित्री देवी वर्मा लिखा था, लेकिन पावर ऑफ अटॉर्नी में सुशीला रानी लिखा था, इस प्रकार दोनों दस्तावेजों में विरोधाभास था।
उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या दो नाम से प्रचलित व्यक्ति अपने हस्ताक्षर अलग-अलग नाम से कर सकता है। उन्होंने कहा कि पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल करते ही डा. हरक सिंह रावत ने अपने खास राजदार वीरेंद्र कंडारी के जरिए अपनी पत्नी दीप्ति रावत के नाम 4.663 हेक्टेयर यानी 60 बीघा भूमि का बैनामा (रजिस्ट्री) करा दिया ,जिसमें बड़ी चालाकी से पति हरक सिंह के नाम की जगह पिता का नाम दर्शाया गया तथा पता भी गढ़वाल का दर्शाया गया तथा इसी प्रकार अपनी करीबी सुश्री लक्ष्मी राणा के नाम 3.546 हेक्टेयर यानी 47 बीघा भूमि का बैनामा करा दिया, जिसमें पता गढ़वाल का दर्शाया गया, जिससे किसी को कोई संदेह पैदा न हो। उन्होंने कहा कि उक्त फर्जीवाड़े के चलते कई विवाद उत्पन्न हुए एवं उक्त विवादों के चलते वर्ष 2009 में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) द्वारा उक्त भूमि को सरकार के पक्ष में अधिग्रहित करने हेतु उप जिलाधिकारी, विकासनगर को निर्देश दिए थे तथा उक्त फर्जीवाड़े के मामले में थाना सहसपुर में वर्ष 2011 में भी मुकदमा कायम किया गया था। उन्होंने कहा कि अन्य कई घोटाले भी उनके नाम दर्ज हैं।

 

मोर्चा को जगी सीएम पुष्कर से आस
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभालने के बाद जिस तरह से राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त करने का संकल्प लिया हुआ है उसी का परिणाम है कि आज आम आदमी राज्य के मुख्यमंत्री से एक बडी उम्मीद बना चुका है कि अब राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार व घोटालों का खेल नहीं हो पायेगा और राज्य में कुछ पूर्व सरकारों में हुये भ्रष्टाचार व घोटाले भी जरूर बेनकाब होंगे। यही कारण है कि जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रधुनाथ सिंह नेगी ने सहसपुर के शंकरपुर में 107 बीघा जमीन को लेकर उत्तराखण्ड के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री से 107 बीघा जमीन की जांच कराने और जमीन को सरकार में निहित करने की मांग की है। जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष को सीएम पुष्कर सिंह धामी से एक आस है कि वह इस गम्भीर मामले पर सख्त रूख अपनायेंगे।

LEAVE A REPLY