सीएम के बुने जाल में फंस गया विपक्ष

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब सत्ता की कमान हाथों में ली थी तो राज्य के गलियारों में यह बहस शुरू हो गई थी कि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की लम्बी राजनीतिक पारी के भवर में पुष्कर सिंह धामी फंस जायेंगे लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता चलाने के लिए जिस तरह से चाणक्य बनकर अपने कदम आगे बढाये उसे देखकर तो समूची कांग्रेस को यह समझ ही नहीं आया कि आखिरकार उनके हाथों में आने वाली सत्ता की पारी पुष्कर सिंह धामी चंद समय में ही उनके हाथों से खींच लेंगे? पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता को इतने सौम्य रूप से चलाया कि राज्य की जनता उनकी कायल होती चली गई और मात्र कुछ माह के भीतर ही पुष्कर के चक्रव्यूह में सारा विपक्ष इस कदर फंस गया कि उस चक्रव्यूह से उसे बाहर आने का रास्ता नजर नहीं आ रहा है? अभेद सत्ता चलाने के मिशन में जिस तरह से मुख्यमंत्री ने अपने कदम आगे बढाये हैं वह उत्तराखण्डवासियों के लिए तो शुभ संकेत हैं लेकिन भाजपा के ही कुछ बडे राजनेताओं को उनकी यह धमकदार राजनीतिक पारी रास नहीं आ रही है और वह इसी ताक में बैठे हैं कि पुष्कर सरकार में कोई तिनकाभर भी गलत करने के लिए आगे आये तो वह मीडिया के कुछ लोगों से उस छोटी सी गलती को एक पहाड के रूप में परोस कर आवाम के दिलों में बस चुकी पुष्कर सरकार को निशाने पर ले सके?
उत्तराखण्ड में भाजपा के एकमात्र पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ऐसे राजनेता रहे जिनसे कोई भी सीधा सम्पर्क कर उन्हें अपनी पीढा बता सकता था और उन्होंने अपने कार्यकाल में आवाम से लेकर अधिकांश राजनेताओं का भी दिल जीता था क्योंकि कोई भी उनसे आसानी के साथ कभी भी मिल सकता था लेकिन उत्तराखण्ड में जब भी भाजपा की सत्ता आई तो उनके पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवाम को मिलना एक बहुत बडी चुनौती ही हमेशा दिखाई दिया। भाजपा के दो ऐसे पूर्व मुख्यमंत्री थे जो मीडिया में अपनी आलोचना बर्दाश्त ही नहीं करते थे और वह उस मीडिया को अपने निशाने पर लेने से पीछे नहीं हटते थे जो उनके सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार और घोटालों को बेनकाब करने के लिए आगे आ जाते थे। भाजपा का एक पूर्व मुख्यमंत्री तो सत्ता में इतना मदमस्त था कि अगर उनकी सरकार को किसी ने भी अपना निशाना बनाया तो वह उस मीडियाकर्मी को अपने मुख्यमंत्री आवास बुलाकर उसे अपनी ताकत का अहसास कराते थे और उन्हें आतंकित करने का कोई खाना नहीं छोडते थे। एक बार भाजपा के इसी पूर्व मुख्यमंत्री ने शाम के समय एक मीडियाकर्मी को अपने आवास पर बुलाया और उसके बाद उससे उन्होंने अपने कमरे में एकांत भाव में अपनी ताकत और सत्ता का घमंड दिखाते हुए यहां तक कहा था कि वह प्रदेश का राजा है और उसके बिना राज्य में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता और तो और सत्ता के घमंड में पूर्व मुख्यमंत्री ने उस पत्रकार को यहां तक धमकी दी थी कि वह चाहे तो उसका पता भी नहीं चलेगा कि वह कहां चला गया। उत्तराखण्ड में भाजपा के भी कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने घमंड की राजनीति की और उनकी सत्ता जिस तरह से हमेशा के लिए उनके हाथों से फिसल गई वह किसी से छुपा नहीं है? अब उत्तराखण्ड में भाजपा के युवा मुख्यमंत्री जिन्होंने सत्ता चलाने के लिए पहले दिन से ही अपने आपको आवाम का सेवक घोषित कर दिया और एक गरीब से गरीब इंसान को उन्होंने जिस तरह से अपने गले से लगाया वह उनके विशाल हृदय की गाथा बन गई। उत्तराखण्ड में दस माह से समूचे विपक्ष को राज्य के मुख्यमंत्री पर राजनीतिक प्रहार करने के लिए एक भी ऐसा मुद्दा नहीं मिला जिसे वह राज्यभर में पुष्कर सरकार को विलेन बनाकर उस पर राजनीतिक आक्रमण कर पाती। भाजपा सरकारों में मंत्री तक न बन पाने वाले पुष्कर सिंह धामी को जब राज्य के अन्दर सत्ता चलाने का मौका मिला तो उन्होंने इस मौके को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पदचिन्हों पर चलते हुए जिस तरह से राज्य को भ्रष्टाचार से निजात दिलाने का खुला ऐलान किया उससे राज्य की जनता उनकी कायल हो गई और वह पुष्कर सिंह धामी के लिए जा रहे फैसलों से इतनी आनंद दिखाई दे रही है कि उन्हें अब यह विश्वास हो चला है कि उत्तराखण्ड में राजनीतिक का एक युग पुरूष आ गया हे जिसने अपनी राजनीति के चक्रव्यूह में समूचे विपक्ष को फंसा दिया है?

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