सीएम सेवक बनकर कर जीत रहे दिल

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के इतिहास को अगर खंगाला जाये तो शायद ही किसी पूर्व मुख्यमंत्री ने आवाम के दिलों में जगह बनाने के लिए उन्हें अपने पास बिठाया हो लेकिन मात्र दस माह की सत्ता चलाने वाले पुष्कर सिंह धामी ने जिस तरह से गरीब से गरीब परिवार को अपने सीने से लगाया और उनके यहां जमीन पर बैठकर भोजन किया उससे उनकी सोच राज्यवासियों के मन में एक उदारवादी मुख्यमंत्री के रूप में दिखाई देने लगी है। श्रमिक दिवस पर बाइस साल के इतिहास में कोई श्रमिक मुख्यमंत्री आवास के अन्दर झांकने का साहस कर पाया हो ऐसा कभी देखने को नहीं मिला लेकिन युवा जोश से लब्रेज पुष्कर सिंह धामी ने सैकडों श्रमिकों को अपने आवास में बुलाकर जिस तरह से उनका हाथ जोडकर अभिनंदन व आदर किया वह देखते ही बनता था। श्रमिक यह देखकर हैरान हो गये कि एक राज्य का मुख्यमंत्री खुद कटोरी में उन्हें गुलाब जामुन परोस रहा है तो उनके दिल में पुष्कर सिंह धामी को लेकर जो धारणा बनी वह श्रमिकों के चेहरे के देखने से ही साफ हो रहा था और श्रमिकों का यहां तक कहना था कि ऐसा ही नहीं बन जाता कोई पुष्कर।
उत्तराखण्ड के अन्दर अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री अपनी सत्ता के नशे में इतने चूर रहते थे कि वह आवाम से लेकर मीडिया तक को अपना गुलाम समझते थे और अगर किसी ने उनके शासनकाल में हो रहे गलत कार्यों को बेनकाब करने का साहस दिखाया तो उन्हे चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपनी ताकत से उन्हें कूचलने की कोशिश की और यही कारण था कि राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्डवासियों का कभी भी दिल जीत नहीं पाये और उनके मन में सिर्फ एक पीडा रहती थी कि आखिरकार जब राजा ही प्रदेश में हो भ्रष्टाचार व घोटालों पर मौन धारण किये हुये हैं तो वह अपना दर्द आखिर किसे सुनाने के लिए जायें? भ्रष्टाचार व घोटालों को लेकर बाइस सालों में राज्य की काफी जनता न्याय पाने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाती रही और उसके मन में एक ही पीडा रही कि अगर उन्हें ऐसी ही सरकार के साये में जीना है तो इससे तो अच्छा होता कि इस प्रदेश को केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया जाता? देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच और इंसान को पहचानने की एक बडी शक्ति उन्हें मिली हुई है और यही कारण है कि देश की जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना भगवान मानने से भी पीछे नहीं हटती और उन्हें सिर्फ एक बात का पता है कि नरेन्द्र मोदी भारत को भ्रष्टाचार मुक्त करने की दिशा में जिस तरह से आगे ले जा रहे हैं वह उनकी अगली पीढी के लिए शुभ संकेत हैं। मात्र छह माह के लिए पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाना देश के प्रधानमंत्री की ही एक सोच माना जा रहा है और उन्होंने पुष्कर सिंह धामी के वजूद को पहचानते हुए ही उन्हें अपना सखा बनाया और राज्य को एक आदर्श राज्य बनाने का उन्होंने पुष्कर सिंह धामी को मिशन सौंपा। देश के प्रधानमंत्री का आशीर्वाद प्राप्त कर जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड के अन्दर एक नई राजनीति को आवाम के सामने परोसा है उससे राज्य की जनता पुष्कर सिंह धामी की कायल हो चुकी है और पुष्कर सिंह धामी एक ऐसे मुख्यमंत्री बन चुके हैं जिनसे गरीब से गरीब इंसान को एक बडी उम्मीद जग चुकी है कि अगर उनके ऊपर कभी कोई संकट आयेगा तो वह सीधे पुष्कर सिंह धामी के दरबार में जाकर उनसे अपनी पीड़ा बता देंगे। उत्तराखण्ड के अन्दर पुष्कर ंिसह धामी की स्वच्छ राजनीति ने विपक्ष को भी एक संकट में लाकर खडा कर दिया है कि जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी अपनी राजनीतिक पारी खेल रहे हैं उससे साफ दिखाई दे रहा है कि धामी युग एक लम्बे अर्से तक उत्तराखण्ड के अन्दर चलता रहेगा? पुष्कर सिंह धामी को लेकर राज्यवासियों को एक बडी खुशी का अनुभव हो रहा है कि उनके राज में अब उन्हें भ्रष्टाचार की काली छाया में रहने के लिए मजबूर नहीं होना पडेगा क्योंकि ऐसा पुष्कर जन्मों बाद धरती पर आता है।

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