संवाददाता
देहरादून। एबी डिविलियर्स के नाम से शायद ही कोई अनभिज्ञ हो। इस दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज ने अपनी बल्लेबाजी के कारनामों से एक दशक से अधिक के समय तक पूरे विश्व में अपने बल्ले का लोहा मनवाया था। एबी को लोग ’36० डिग्रीÓ बल्लेबाज भी कहते थे क्योंकि वह एक ऐसे खिलाड़ी थे जो मैदान की हर दिशा में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते है। ’36० डिग्रीÓ की संज्ञा सिर्फ क्रिकेट तक ही सीमित नहीं रह गई बल्कि अब तो हर क्षेत्र में जो भी व्यक्ति हर दिशा में बेहतर कार्य करता है, उसको इस संज्ञा से नवाज दिया जाता है। यही कारण है कि ’36० डिग्रीÓ की यह संज्ञा उत्तराखण्ड की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ऊपर भी बिलकुल सटीक बैठती है क्योंकि वे लगातार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विकासपूर्ण कार्य करने में जुटे हुए है। अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सीएम धामी पिछली बार से थोड़े ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे है और इसकी बानगी उनके चंद कड़े फैसले साफ बयां कर रही है। फिर चाहे चारधाम यात्रा को लेकर उनका एक्शन प्लान और अधिकारियों को दी गई नसीहत हो या फिर बाहरी लोगों को यह अल्टीमेटम देना कि वह उत्तराखण्ड को अपनी ऐशगाह समझने की भूल न करें, हर मोर्चे पर वह आक्रामक बल्लेबाज के रूप में ही बल्लेबाजी करते हुए नजर आ रहे है। सीएम धामी की ‘फैन फॉलोईंगÓ (लोकप्रियता) अंदाजा इस बात से साफ लगाया जा सकता है कि जब उनके उपचुनाव लडऩे के सीट छोडऩे की बात उठी तो कई भाजपा विधायकों ने अपने फेवरिट सीएम के लिए अपनी सीट छोडऩे का मन बना लिया। यहीं नहीं बल्कि चर्चाएं तो यहां तक रही कि निर्दलीय विधायकों के साथ साथ कांग्रेसी विधायक भी सीएम धामी के लिए सीट छोडऩे के लिए तैयार थे? जिस सीएम को खुद प्रदेश की आवाम ने अपनी पल्कों पर बैठाया है, उसके खिलाफ कोई कैसे जा सकता है? सीएम धामी के इस रूप को देखकर इस बात का अंदाजा साफ लगने लगा है कि अब वाकई में प्रदेश विकास की ओर बढ़ चला है।
उत्तराखण्ड में हुए विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के कई दिग्गज राजनेताओं ने यहां जनसभाएं की थी और भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की थी। इन्हीं में से कुछ दिग्गजों ने उत्तराखण्ड की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अलग-अलग संज्ञाएं देकर संबोधित किया था। कभी कोई उन्हें ‘फ्लावर नहीं, फायरÓ बताता, तो कभी कोई उन्हें ‘धाकड़ बल्लेबाजÓ कह रहा था। विधानसभा चुनाव के बाद जो परिणाम आए, उसने इन सभी संज्ञाओं को सही साबित करते हुए यह बता किया हकीकत में पुष्कर ‘फ्लावर नहीं फायरÓ है औेर वे ‘धाकड़ बल्लेबाजÓ भी है जिन्होंने आतिशी पारी खेलते हुए भाजपा को उत्तराखण्ड में प्रचंड बहुमत दिलाया। ऐसा नहीं है कि प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद सीएम पुष्कर लंबे समय तक इस जीत का जश्न मनाते रहे हो, बल्कि सत्ता पुुन: प्राप्त करने के बाद वह एक बार फिर से एक्शन मोड में आ गए लगातार प्रदेश हित और जनहित में कड़े फैसले लेने में जुट गए। चुनाव प्रचार के दौरान अपनी जनसभाओं में यह ऐलान किया था कि पुन: सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार उत्तराखण्ड में समान नागरिकता संहिता लागू करेगी। उत्तराखंड में नई सरकार के गठन के बाद जब मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई थी तो बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि हम यूनिफॉर्म सिविल कोड लेकर आएंगे। उन्होंने बताया था कि राज्य मंत्रिमंडल ने राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए एक पैनल के गठन को मंजूरी दे दी गई है। धामी ने यह भी कहा था कि समान नागरिक संहिता लागू करने को मंजूरी देने वाला उत्तराखंड पहला राज्य है।
धामी ने कहा था कि इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनेगी जो इस कानून का एक ड्राफ्ट तैयार करेगी और सरकार उसे लागू करेगी। मंत्रिमंडल में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ था। सीएम ने कहा था कि इस कानून से राज्य में सभी के लिए समान अधिकारों को बढ़ावा मिलेगा। यह सामाजिक सद्भाव को बढ़ाएगा, लैंगिक न्याय को बढ़ावा देगा, महिला सशक्तिकरण को मजबूत करेगा और राज्य की असाधारण सांस्कृतिक-आध्यात्मिक पहचान और पर्यावरण की रक्षा करने में मदद करेगा। इस बात से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो मुख्यमंत्री अपने द्वारा किए गए वादों को लेकर इतना सजग हो कि वह उन्हें पूरा करने के लिए अपनी पहली मंत्रीमंडल की बैठक में उस पर मुहर लगा दे, उसके लिए आवाम के मन में स्नेह जागृत होना स्वभाविक हो जाता है।
