बुजुर्ग महिला को कुर्सी पर ढ़ोने को मजबूर ग्रामीण
नैनबाग (शिवांश कुंवर)। उत्तराखण्ड को विकास के पथ पर ले जाने के लिए पच्चीस साल से हर सरकारें बडे-बडे दावे करती आ रही हैं लेकिन राज्य के कुछ ग्रामीण इलाकों में बार-बार ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं कि जहां वर्षों से एक सड़क तक नहीं है और इसके चलते ग्रामीणों को अपने गांव के बीमार लोगों को कभी चारपाई पर तो कभी प्लास्टिक की कुर्सी पर खतरनाक रास्तों से उन्हें ले जाने के लिए आगे आना पड़ रहा है। हैरानी वाली बात है कि अगर उत्तराखण्ड के अन्दर अभी तक हर गांव में सड़के नहीं पहुंच पा रही है तो यह आवाम को एक बडा दर्द दे रही है। हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री का विजन है कि हर गांव के दूर छोर तक पक्की सड़क बनेगी लेकिन पीडब्लूडी विभाग के मंत्री और अफसरों को आखिर वो गांव कब नजर आयेंगे जहां आज तक सडक नहीं पहुंच पाई है और उसके चलते वहां के ग्रामीणों को अपने गांव के बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को जान जोखिम में डालकर कई-कई किलोमीटर दूर तक उस सफर से होकर गुजरना पडता है जहां हर पल खतरा ही खतरा दिखाई देता है। वहीं टिहरी के नैनबाग तहसील के एक ग्राम में 75 साल से एक सड़क तक नहीं पहुंच पाई और वहां के ग्रामीणों को अपने गांव के मरीजों को कुर्सी और चारपाई पर कई किलोमीटर पैदल ले जाना पडता है जिससे हर पल सफर में खतरा ही खतरा दिखाई देता है।
नैनबाग तहसील के ग्राम खर्क से एक बेहद मार्मिक तस्वीर सामने आई है। गांव की एक बीमार बुजुर्ग महिला को इलाज के लिए ग्रामीणों द्वारा कुर्सी पर बैठाकर कई किलोमीटर पैदल रास्ते से सड़क तक पहुंचाया गया। गांव में आज तक सड़क सुविधा नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों को हर आपात स्थिति में इसी तरह जान जोखिम में डालकर मरीजों को ढोना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी ग्राम खर्क मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। सड़क न होने से बीमार, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। बरसात के समय हालात और भी भयावह हो जाते हैं, जब कच्चे रास्ते फिसलन भरे और खतरनाक बन जाते हैं।
ग्रामीण सुरेश का कहना है “चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याएं भूल जाते हैं। आज तक सड़क नहीं बनी, जबकि कई बार मांग उठाई जा चुकी है। बीमार लोगों को कुर्सी पर उठाकर सड़क तक ले जाना हमारी मजबूरी बन चुकी है। अगर समय पर सड़क होती तो मरीजों और दैनिक कार्य के लिए भी तकलीफ नहीं उठानी पड़ती।
