चुनाव में मुद्दा बनेगा लोकायुक्त

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भ्रष्ट नेता और अफसरों की बेनामी सम्पत्तियां बनी राज?
लोकायुक्त बना तो भ्रष्टों का साम्राज्य हो जायेगा धड़ाम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत सरकार चलाने के लिए मुख्यमंत्री चार साल से आगे आ रखे हैं और उन्होंने दो टूक संदेश दे रखा है कि राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार से दौलत कमाने वालों को किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा। हालांकि यह भी सच है कि राज्य के अन्दर विजिलेंस के पास भ्रष्ट बडे राजनेताओं और अफसरों पर भ्रष्टाचार को लेकर सीधी कार्यवाही करने का अधिकार नहीं है जिसके चलते राज्य के अन्दर आज भी काफी राजनेता और अफसर भ्रष्टाचार का खेल इतने नाटकीय ढंग से खेल रहे हैं कि उसकी भनक मुख्यमंत्री तक को नहीं लग पा रही है जिसका फायदा भ्रष्ट राजनेता और अफसर खुलकर उठा रहे हैं? हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता के साथ सरकार चलाने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा रखे हैं लेकिन उनके विजन को तारतार करने के लिए राज्य में काफी अफसर और नेता ऐसे हैं जो खुलकर भ्रष्टाचार करने के एजेंडे पर आगे बढ़े हुये हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर लम्बे समय से यह बहस चल रही है कि जब राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के साथ सरकार चल रही है तो फिर भ्रष्ट अफसरों और नेताओं पर नकेल लगाने के लिए राज्य में लोकायुक्त के गठन को आखिर क्यों हरी झंडी नहीं दी जा रही है? आश्चर्य चकित बात तो यह है कि काफी अफसर कहने को तो ईमानदारी का चोला ओढे हुये हैं लेकिन उन्होंने भ्रष्टाचार करने का जो सिस्टम इजाद कर रखा है वह काफी हैरान करने जैसा है और इस सिस्टम को तोडने का अगर किसी में कोई मादा है तो वह सिर्फ और सिर्फ लोकायुक्त ही है जिसका गठन पच्चीस साल बाद भी राज्य के अन्दर नहीं हो पा रहा है।
उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार और घोटालों का जो खेल बडे-बडे कुछ राजनेता और अफसर खेलने में माहिर रहे हैं उन्होंने यह जान लिया था कि उन पर लगाम लगाने के लिए कोई भी सरकार कभी आगे नहीं आयेगी। राजनेताओं और अफसरों की इस सोच का ही परिणाम है कि भ्रष्ट नेता और अफसर भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाते चले गये और उन्होंने बेनामी सम्पत्तियां बनाने का जो बडा खेल, खेला उसकी गंूज हमेशा राज्य के गलियारों में उठती रही लेकिन किसी भी सरकार ने ऐसे भ्रष्ट नेताओं और अफसरों बेनामी सम्पत्तियों को खंगालने की दिशा में कोई काम नहीं किया जिसके चलते इनके हौसले इतने बुलंद होते चले गये कि वह अकूत दौलत के मालिक बन बैठे और उन्होंने भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाने का जो दौर एक समय में शुरू किया था वो दौर आज भी बादस्तूर चल रहा है और आम जनमानस का मानना है कि राज्य के अन्दर भले ही विजिलेंस का गठन हो रखा हो लेकिन विजिलेंस के पास वो शक्ति नहीं है जिसके चलते वह उन भ्रष्ट नेताओं और अफसरों पर अपनी निगाह टेढी कर सके जिन्होंने भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाकर बेनामी सम्पत्तियों का किला खडा कर रखा है। उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार से कमाई पर प्रहार करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी ने राज्य के अन्दर एक सशक्त लोकायुक्त का गठन किया था और उससे साफ हो गया था कि राज्य के अन्दर अब भ्रष्ट नेता और अफसर किसी भी सूरत में बच नहीं पायेंगे। हालांकि खण्डूरी की सरकार जाते ही कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में इस लोकायुक्त को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया था और उसके बाद से ही हर चुनाव में कांग्रेस व भाजपा ने लोकायुक्त बनाने का आम जनमानस से वादा किया था लेकिन सरकार बनने के बाद भाजपा ने लोकायुक्त का गठन करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जिसके चलते लोकायुक्त बनाने को लेकर राज्य के अन्दर बार-बार आवाज उठती आ रही है। उत्तराखण्ड में भ्रष्ट राजनेता और अफसर आज भी भ्रष्टाचार से दौलत कमाने के खेल में निपूर्ण हो रखे हैं और सरकार की रडार उन पर कभी नहीं लग रही जिसके चलते ऐसे भ्रष्टाचारियों के हौसले आज भी बुलंद ही नजर आते हैं। अब 2०27 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के अन्दर एक बार फिर लोकायुक्त बनाने की मांग तेज होती जा रही है। कांग्रेस ने जहां ऐलान कर रखा है कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आई तो वह लोकायुक्त का गठन करेंगे तो वहीं कुछ और संगठन भी राज्य के अन्दर लोकायुक्त बनाने की मांग को लेकर अब सडकों पर उतरते जा रहे हैं और उनका दो टूक कहना है कि जब तक लोकायुक्त का गठन नहीं होगा तब तक राज्य में फैला भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो सकता।

सरकार आई तो बनायेंगे लोकायुक्त
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का साफ कहना है कि अगर भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है तो उसके लिए राज्य में लोकायुक्त का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह लम्बे समय से मांग करते आ रहे हैं कि राज्य के अन्दर लोकायुक्त का गठन होना चाहिए क्योंिक जिन राजनेताओं और भ्रष्ट अफसरों ने भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाई है उनकी बेनामी सम्पत्तियों के राज को बेनकाब करने के लिए राज्य के अन्दर लोकायुक्त का होना बेहद जरूरी है। गणेश गोदियाल ने कहा कि 2०27 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में लोकायुक्त का गठन करने का वादा करेगी और राज्य के अन्दर सरकार कांग्रेस की बनी तो लोकायुक्त का गठन तत्काल किया जायेगा।

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