19 मार्च को धामी के हाथ होगी सत्ता

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देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। उत्तराखंड में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद भाजपा हाईकमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सफल राजनीति से बेहद खुश है और उसके मन में धामी की हार को लेकर तिनका भर भी कोई गम नजर नहीं आ रहा क्योंकि धामी ने मात्र छह माह के भीतर उत्तराखंड के अंदर सरकार को लेकर चले आ रहे बडे मिथक को तोड दिया और राज्य के अंदर एक बार फिर भगवा फहराकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार किया है। राजनीतिक गलियारों में भले ही यह शोर मचाया जा रहा हो कि कुछ विधायक मुख्यमंत्री बनने की दौड में आगे बढे हुए है और वह उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक की दौड लगा रहे है लेकिन यह भी चर्चायें आम है कि भाजपा हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी की सीएम का नाम कर लिया है? मौजूदा समय में सिर्फ मंत्रीमंडल को लेकर दिल्ली में मंथन हो रहा है कि किस राजनेता को मंत्री बनाया जाये और किसे नहीं? पुष्कर सिंह धामी के लिए एक के बाद एक विधायकों ने जिस तरह से उन्हें मुख्यमंत्री बनाये जाने की पैरवी कर रखी है और धामी जो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सखा बनकर उनके सपनों का उत्तराखंड बनाने के मिशन में आगे बढे हुए है उससे साफ संकेत मिल रहे है कि मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी की फिर ताजपोशी होनी तय है?
उल्लेखनीय है कि भाजपा जब जब सत्ता में आई तो पार्टी के आधा दर्जन से अधिक विधायक उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक मुख्यमंत्री बनने की दौड में मीडिया के कंधे पर सवार होकर अपना ब्रांडिंग कराने में लगते रहे है। इस बार फिर उत्तराखंड के अंदर भाजपा की सरकार सत्ता में आई तो आधा दर्जन से अधिक विधायकों में मुख्यमंत्री बनने की लालसा फिर जग उठी और वह उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक दौड लगाने में जुटे हुए है और उनकी यह दौड कहां चल रही है इसका भले ही किसी को कोई आभास न हो लेकिन दौड जरूर हो रही है जो कि एक रहस्य में ही नजर आती है।
उत्तराखंड के अंदर सिर्फ एक आवाज सुनाई दे रही है कि जिस मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर भाजपा को सत्ता में पहुंचा दिया उस पुष्कर सिंह धामी को अपनों ने भीतरघात कर हराया हो लेकिन मुख्यमंत्री की कमान उन्हें ही मिलनी चाहिए। पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को भाजपा हाईकमान ने दिल्ली बुलाया है जहां सरकार के गठन को लेकर संभवत: मंथन चल रहा है और यहां तक भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री का नाम पुष्कर सिंह धामी के रूप में तय हो चुका है। सिर्फ राज्य के नये मंत्रीमंडल को लेकर दिल्ली में मंथन चल रहा है। पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को लेकर कुछ अफसरों की नीदें उडी हुई है और उन्हें इस बात का डर है कि अगर पुष्कर सिंह धामी फिर मुख्यमंत्री बन गये तो इस बात से भी राज खुल जायेगा की उन्होंने पुष्कर सिंह धामी को हराने के लिए किस तरह से चक्रव्यूह रचा था?

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