धामी के इकबाल से डर रहे पार्टी के दिग्गज नेता

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में भाजपा के चंद राजनेता प्रदेश की राजनीति में हलचल मचाने के लिए खुद भी पर्दे के पीछे से कोई न कोई साज का तार छेड देते हैं जिसके चलते मीडिया उस तार को छेड-छेडकर राजनीति में बिना बात के कयासबाजी में जुट जाती है और ऐसा दर्शाया जाता है मानो भाजपा हाईकमान ने किसी राजनेता को अपने पास बुलाकर कौन सा ऐसा सिक्रेट प्लान समझा दिया जिससे राज्य की राजनीति में एक हलचल मच जायेगी?
गजब की बात है कि चंद दिन पूर्व सांसद व उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को भाजपा हाईकमान ने दिल्ली बुलाया और इस बुलावे की गूंज चंद समय में ही कैसे मीडिया के बीच गूंजने लगी यह हैरान करने वाली बात है क्योंकि भाजपा हाईकमान मीडिया को सरकुलर तो जारी करता नहीं कि वह अपने यहां किस प्रदेश के अपने राजनेता को बुला रहे हैं। रमेश पोखरियाल निशंक को दिल्ली में बुलाने का ढोल ऐसे पीट दिया गया मानो उन्हें उत्तराखण्ड की सियासत में कितना बडा जिम्मा सौंपा जा रहा हो। यह भी सच है कि जिस तरह से उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पार्टी के बडे-बडे राजनेताओं के सामने अपनी एक बडी लकीर खींच दी है उसे पार करना अब उत्तराखण्ड के दिग्गज नेताओं के बस में नहीं रह गया है क्योंकि रमेश पोखरियाल निशंक से लेकर कुछ बडे नेताओं को जब सत्ता सौंपी गई तो उन्होंने राज्य के अन्दर ऐसा कोई करिश्मा करके नहीं दिखाया जिससे यह सम्भावना बन जाये कि भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड के भविष्य को लेकर कोई बदलाव का मन बना लिया है। रमेश पोखरियाल निशंक विधानसभा चुनाव में भी उस शैली के साथ आगे नहीं आये जिसके लिए उन्हें पहचाना जाता है जबकि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मात्र छह माह के भीतर जिस तरह से राज्यभर में अपने नाम का डंका बजाकर विधानसभा चुनाव को कांग्रेस से बडे टकराव के बीच लाकर खडा कर दिया उससे भाजपा हाईकमान ने भी पुष्कर सिंह धामी को एक कुशल राजनीतिज्ञ मानकर भविष्य की बागडोर सम्भवत: उन्हें ही सौंपने का मन जरूर बना लिया है क्योंकि छह माह के कार्यकाल में न तो भाजपा हाईकमान के सामने पुष्कर सिंह धामी की सरकार का कोई भ्रष्टाचार सामने आया और न ही यह गूंज उठी कि राज्य की ब्यूरोक्रेसी सत्ता पर हावी है यही कारण है कि पुष्कर सिंह धामी का राजनीतिक भविष्य उज्जवल है जिस पर चंद दिन पूर्व भाजपा सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भी अपनी मोहर लगाकर कहा था कि धामी पांच साल नहीं बल्कि पन्द्रह साल राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता संभालेंगे।
राज्य में बाईस का महासंग्राम कौन सा दल जीत पायेगा,इस पर जनता का फलादेश दस मार्च को ही मालूम हो जायेगा,लेकिन इन चुनावों में दोनों राष्ट्रीय दलो के तेज तर्रार नेताओ की नींद उड़ी हुई है। जहाँ भाजपा के प्रत्याशियों ने अपने प्रदेश अध्यक्ष पर भीतरघात का आरोप लगाया है तो वही कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एकेला चलो के साथ पार्टी का बंटाधार कर चुके है। बाईस के महासंग्राम में यदि किसी नेता को लाभ मिल रहा है तो वे है सूबे के मुखिया पुष्कर सिह धामी जिन पर मातृशक्ति के साथ साथ प्रधानमंत्री का भी आर्शीवाद बना हुआ है। दो तीन दिनों से मीडिया में भी छन-छनकर खबरें प्रचारित की गयी कि पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार सासंद निशंक को राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिल्ली तलब किया है,जिसके मायने जितने मुँह उतनी बातें सामने आती रही। भाजपा ने इस बार साठ पार का लक्ष्य दिया लेकिन चुनावों तक भाजपा अपने लक्ष्यों से भटक गयी क्योंकि टिकट की चाह रखने वाले नेताओं ने बागी बनकर पार्टी को नुकसान किया। अब भाजपा हाई कमान अपने गुप्त मिशन के तहत निर्दलीय प्रत्याशियों व बहुजन पार्टी के साथ साथ उक्रांद के जीताऊ उम्मीदवारों को अपने खेमे में लाने पर कार्य कर रही है और उसकी जिम्मेदारी भी राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी निशंक को सौपी गयी है जो हर जगह स्वीकार्य है। युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी की सत्तारूढ होने मे कोई अडचन न आने पाये उससे पहले भाजपा ने सभी को जिम्मेदारी सौपकर धामी का मार्ग प्रशस्त किया है। भाजपा हाई कमान भी जानता है कि इस समय राज्य में भाजपा कई गुटों मे उलझी है और उस उलझन से पार पाना है तो निशंक से अच्छा योद्धा राज्य में दूसरा नही है। यदि पार्टी अपने सीक्रेट मिशन में कामयाब होती है तो धामी के लिए इससे अच्छा अवसर नही मिल पायेगा, ये पार्टी हाई कमान भी दबे स्वर में कबूल कर चुका है कि राज्य में चालीस सीटों पर कमल खिलाने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी की महत्वपूर्ण भूमिका मे रहे है।

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