भाजपा कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप की जंग

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में हुये विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की खामोशी और बीस साल से चले आ रहे दो मिथक इस बार टूट पायेंगे या नहीं इसको लेकर भले ही राज्य के अन्दर सट्टा बाजार गर्म हो रखा हो लेकिन ईवीएम के खुलने से पहले ही आये दिन भाजपा व कांग्रेस में तेजी के साथ वॉक-युद्ध उत्तराखण्ड की राजनीति में बडी तपिश बनाये हुये है? सरकार बनाने के दोनो ही बडे ही राजनीतिक दल दांवे करते आ रहे हैं तो वहीं राज्य के अन्दर यह बहस भी चल रही है कि इस बार बसपा, उक्रांद व निर्दलीय भी सरकार के गठन में अपनी बडी भूमिका निभा सकते हैं? हालांकि यह अभी सब कयासबाजी है लेकिन आरोप प्रत्यारोप का खेल जिस तरह से कांग्रेस व भाजपा में शुरू हो रखा है उससे राज्यवासी हैरान हैं कि आखिरकार इस बार हुये चुनाव में दोनो ही राजनीतिक दलों को शंकाओं का पहाड़ क्यों नजर आ रहा है?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि पांच साल एक राजनीतिक दल ने सत्ता संभाली तो उसके बाद पांच साल तक दूसरे राजनीतिक दल ने सत्ता संभाली। हालांकि इस बार चुनाव प्रचार में भाजपा की ओर से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर भाजपा के सभी दिग्गज नेताओं ने मंच से यही ऐलान किया कि उत्तराखण्ड के अन्दर पांच साल एक दल को और पांच साल दूसरे दल को सत्ता सौंपने का राज्यवासियों को अब परित्याग करना चाहिए जिससे कि राज्य के अन्दर विकास की गंगा बह सके। उत्तराखण्ड में दो बडे मिथक आज भी एक रहस्य की तरह राज्यवासियों के मन में तैरते हुये दिखाई दे रहे हैं। सरकार के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बार-बार ऐलान करते आ रहे हैं कि इस बार बीस साल से चले आ रहे दोनो मिथक राज्य की जनता तोडने के लिए आगे आ चुकी है उनका दावा है कि राज्य में जहां प्रचंड बहुमत की सरकार भाजपा बनायेगी वहीं खटीमा से वे खुद चुनाव जरूर जितेंगे। हालांकि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल व नेता प्रतिपक्ष प्र्रीतम सिंह भी दम भरते आ रहे हैं कि राज्य के अन्दर कंाग्रेस की सरकार सत्ता में वापसी करेगी। दोनो ही राजनीतिक दल अपनी-अपनी सरकारें बनाने का दम भर रहे हैं और कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री आये दिन कभी ईवीएम तो कभी बैलेट पेपर को लेकर भाजपा की घेराबंदी करने में लगे हुये हैं। इतना ही नहीं कांग्रेेस ने तो अपने दस्तों को ईवीएम पर नजर रखने के लिए उन्हें वहीं तैनात किया हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी हरीश रावत पर कटाक्ष करने से पीछे नहीं हट रहे हैं और वह यहां तक कह चुके हैं कि दस मार्च के बाद हरीश रावत को घर पर ही बैठना पडेगा और वह जो मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं वह मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की तरह बन जायेगा। दस मार्च को ईवीएम से तय हो जायेगा कि सत्ता किसकी रहेगी और बीस साल से चले आ रहे मिथक का शोर भी थम जायेगा लेकिन अभी दोनो राजनीतिक दलों का वॉक-युद्ध चरम पर दिखाई दे रहा है।

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