अंकिता हत्याकांड में जनभावनाओं को देख मास्टर स्ट्रोक खेल सकती है सरकार!

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सीबीआई जांच के आदेश पर टिकी सबकी नजरें?
उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में मचा है ‘तूफान’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में अचानक अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने को लेकर एक बडा तूफान मच गया है। मैदान से लेकर पहाड़ तक विपक्ष सरकार को अंकिता मामले में सीबीआई जांच कराने को लेकर दबाव की राजनीति करने के एजेंडे पर आगे बढ़ा हुआ है। सरकार बार-बार ऐलान कर चुकी है कि एसआईटी की जांच से सुप्रीम कोर्ट तक संतुष्ट नजर आया था इसलिए इस मामले में सीबीआई जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं पिछले कुछ समय से उर्मिला सनावर के सोशल मीडिया पर मचाये गये बवण्डर ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर एक बडा संग्राम मचा दिया और उससे उत्तराखण्ड से लेकर देश के कुछ राज्यों में अंकिता भंडारी को न्याय दिये जाने को लेकर मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए धरने-प्रदर्शन और आंदोलन हो रहे हैं और राज्य के अन्दर चार मार्च को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान होने से सरकार भी अब इस प्रकरण में कभी भी मास्टर स्ट्रोक खेलकर मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए यह कहकर आदेश दे सकती है कि एसआईटी की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मोहर लगाई लेकिन जनभावनाओं को देखते हुए सरकार इस मामले मंें सीबीआई जांच कराने के लिए तैयार है? सरकार के आदेश पर उत्तराखण्ड से लेकर देशभर की नजरें लगी हुई हैं कि उत्तराखण्ड के दबंग मुख्यमंत्री कब अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच कराने का मास्टर स्ट्रोक खेलेंगे?
भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने कुछ दिन पूर्व सोशल मीडिया पर आकर अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा के एक बडे नेता के नाम का खुलासा करते हुए उन्हें कथित वीआईपी होने का ढोल पीट दिया था। भाजपा के दिग्गज नेता को वीआईपी बताकर उर्मिला ने उत्तराखण्ड की सियासत में एक बडा भूचाल मचाकर रखा हुआ है। उर्मिला सनावर ने जिस दिन से अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम का खुलासा सोशल मीडिया पर किया है तबसे उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में एक बडा भूचाल मचा हुआ है और हर तरफ एक ही आवाज बुलंद हो रही है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का नाम सामने आने के बाद इसकी जांच सीबीआई से कराई जाये। इस मामले में कथित रूप से वीआईपी का नाम सामने आने पर भाजपा के दिग्गज राजनेताओं के सामने एक बडा संकट आकर खडा हो रखा है। चार जनवरी को सर्वदल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराये जाने को लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच करने का ऐलान किया हुआ है। सर्वदल के इस ऐलान से एक बडी हलचल मची हुई है और उसी के चलते ऐसी संभावनायें प्रबल होने लगी है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जनभावनाओं को देखते हुए इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का यह कहकर मास्टर स्ट्रोक खेल सकते हैं कि एसआईटी की जांच से हत्याकांड में शामिल पांचो हत्यारों को आजीवन सजा हो रखी है। वहीं आम जनमानस के मन में शंकाओं का जो दौर चल रहा है उसके चलते वह इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए अपनी हामी भर कर विपक्ष के हाथो आये इस मुद्दे को खत्म कर सकते हैं?
अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने हत्यारों को कडी से कडी सजा दिलाने के लिए जांच का जिम्मा एसआईटी को सौंपा था। एसआईटी ने इस मामले में बारिकी से जांच को आगे बढाया और उसके बाद उसने कड़ी से कडी जोडते हुए इस हत्याकांड में हर सबूत को जुटाने का बडा ऑपरेशन चलाया था। एसआईटी को अपनी जांच में कभी भी कोई ऐसा वीआईपी नजर नहीं आया जिसको लेकर राज्य के अन्दर हो-हल्ला मचाया जा रहा था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के परिजनों को भरोसा दिला रखा था कि इस अपराध में जो भी शामिल होगा उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। मुख्यमंत्री इस जांच पर खुद अपनी नजर बनाये हुये थे और उसी का परिणाम था कि एसआईटी ने न्यायालय के अन्दर मजबूत चार्जशीट पेश करके हत्यारों को सलाखों के पीछे रखने का एक बडा शिकंजा कसा था। इस मामले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई तो न्यायालय ने एसआईटी की जांच को सही करार देते हुए सीबीआई से जांच कराने की याचिका को नामंजूर कर दिया था। न्यायालय ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में पांचो गुनाहगारों को आजीवन कारावास की सजा सुनवाई तो सरकार ने इसे बडी जीत बताया था। हालांकि अंकिता के परिजन और उत्तराखण्ड क्रांति दल हत्यारों को फंासी की सजा दिलाये जाने की मांग पर अडे हुये थे।

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