पीएम के आने से खिले पीडितों के चेहरे
मोदी-धामी साथ मिलकर बिखेरेंगे मुस्कान
मौसम खराब होने से पीएम का हवाई सर्वे रद्द
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड से असीम लगाव रखने वाले देश के प्रधानमंत्री हर संकट और आपदा के समय राज्यवासियों के संकटमोचन बनकर उनके सामने आकर खडे हो जाते हैं। अपने मित्र और सखा धामी को हर संकटकाल से आजादी दिलाने के लिए मोदी हमेशा अगली पक्ति में खडे हुये नजर आते हैं जिसके चलते उत्तराखण्ड में आया बडा संकट भी चुटकियांे में मोदी और धामी की जुगलबंदी के चलते हवा-हवाई होता रहा है यह किसी से छिपा नहीं है। जोशीमठ में जब आवाम और व्यापारियों के सामने एक बडा संकट आकर खडा हुआ था तो देश के प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को अपना सहारा देकर जोशीमठ के संकट को ऐसे दूर किया था मानो वहां कोई संकट आया ही न हो। मानसून ने उत्तराखण्ड के आधा दर्जन से अधिक जनपदों में आपदा के तांडव से सरकार और आपदा का दंश झेलने वाले परिवारों के सामने एक बडा संकट आकर खडा हो गया तो इस संकट से मुख्यमंत्री और आपदा पीडितों को उभारने के लिए देश के प्रधानमंत्री आगे आये और उन्होंने आपदा के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए दून में अपनी दस्तक दी तो उनके आने से आपदा पीडितों के चेहरे खिलखिला गये। इस आपदा में जिस तरह से मोदी-धामी साथ मिलकर आगे आये हैं उससे वह आपदा पीडितों के चेहरों पर बडी मुस्कान बिखेरने का संकल्प लेकर आगे बढे हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि आपदा से त्राहीमान हुये उत्तराखण्ड को फिर सवारने के लिए मोदी और धामी की जुगलबंदी एक नया अध्याय लिखने को बेताब है।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उत्तराखंड आये और यहां पर आकर उन्होंने आपदा पीड़ितों के आंसू पूछने का काम किया और साथ ही एक हाई लेवल बैठक भी की। इस बैठक के बाद केंद्र सरकार उत्तराखंड को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मांग पर कोई बड़ा आर्थिक पैकेज का ऐलान कर सकते हैं उत्तराखंड के लोग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्य प्रणाली से तो खुश है ही साथ ही साथ अब प्रधानमंत्री आकर उनका सहारा बनेंगे राज्य के लिए यह सुखद बात है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले से ही आपदा ग्रस्त क्षेत्र की चिंता कर रहे थे और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उत्तराखंड आकर यहां का हाल जानने के लिए दून आये और उन्होंने हवाई सर्वे से आपदा का सच देखने की रणनीति बनाई थी लेकिन आखिरी समय में मौसम खराब होने के कारण प्रधानमंत्री का हवाई सर्वे सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिया गया। वहीं आपदा पीडितों के जख्म पर मरहम लगाने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ आपदा पीडितों का हमदर्द बनने के लिए आर्थिक सहायता के लिए पूरा खाका खींच लिया।
उत्तराखण्ड के गढवाल और कुमांऊ में पिछले कुछ समय पूर्व भारी बारिश के चलते बादल फटने से कुछ जिलों में आपदा का जो तांडव मचा उसे देखकर उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर के लोग भी हैरान हो गये। आपदा का कहर इतना भयावह था जिसे देखकर हर कोई यह सोचने पर मजबूर हो गया कि सरकार कैसे आपदा पीडितों को नये इलाके में बसाने के लिए आगे बढेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में आई इस भयंकर आपदा का सामना एक दिलेर राजनेता के रूप में किया और उन्होंने आपदाग्रस्त इलाकों में खुद मोर्चा संभालकर वहां अपनी देखरेख में युद्ध स्तर पर बचाव व राहत कार्य का जो ऑपरेशन चलाया उसे देखकर आपदा पीडितों को विश्वास हो चला था कि मुख्यमंत्री उनके रक्षक हैं और इस आपदा की धडी में वह उन्हें नये रूप से बसायेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन परिवारों को पांच-पांच लाख रूपये की आर्थिक सहायता तुरंत दिलाई जिन्होंने इस आपदा में अपना घर और सबकुछ गवां दिया था। मुख्यमंत्री ने आपदा पीडितों को विश्वास दिलाया है कि उन्हें दूसरे स्थानों पर बसाया जायेगा। उत्तराखण्ड में आई इस दिल दहला देने वाली आपदा की सारी दास्तां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सुना चुके हैं और यही कारण है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आपदा के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए एक्शन में आ गये हैं और उन्होंने आज देहरादून में आकर जहां हवाई सर्वे कर आपदा का सारा सच अपनी आंखो से देखना था लेकिन आखिरी समय में मौसम खराब होने के कारण प्रधानमंत्री का हवाई दौरा रद्द कर दिया गया। वहीं उन्होंने जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी से आपदा की सारी दास्तां सुनी और उसके बाद उन्हांेने आपदा पीडितों के चेहरे पर बडी मुस्कान लाने के लिए एक बडा प्लान तैयार किया जिससे कि उत्तराखण्ड फिर गुलजार हो सके। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर जिस तरह से उत्तराखण्ड मे आई आपदा के संकट से मुख्यमंत्री को बडा सहारा देने के लिए आगे आये उससे उन साजिशकर्ताओं में भी एक बडी खलबली मच गई जो मुख्यमंत्री के खिलाफ हमेशा साजिशों का भोपू बजाते रहते हैं।

