देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में पिछले तीन सालों से शानदार अंदाज में सरकार चला रहे मुख्यमंत्री ने राजनीति में इतनी लम्बी लकीर खींच दी है कि उसे पार करना अब किसी भी राजनेता के बस में नहीं दिखाई देगा क्योंकि जिस अंदाज में मुख्यमंत्री ने आवाम का दिल जीतते हुए स्वच्छता के साथ सरकार चलाने का हुनर दिखा रखा है उससे आज उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर में मुख्यमंत्री का राजनीतिक इकबाल बुलंदियों पर दिखाई दे रहा है। स्वच्छता और पारदर्शिता के साथ सरकार चलाने के लिए आगे बढते जा रहे मुख्यमंत्री पर आज राज्य की जनता अभेद विश्वास कर रही है और मौजूदा दौर मे जब निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है तो राज्य के अन्दर यह आवाज खुलकर सुनाई दे रही है कि भाजपा का हर नेता धामी की धाक से ही चुनाव लडने के लिए आगे खडा हुआ दिखाई देगा। बहस चल रही है कि राजधानी में मेयर पद के उम्मीदवार के लिए भाजपा के पास आधा दर्जन से अधिक राजनेताओं के नामों की सूची है लेकिन यह भी शीशे की तरह साफ है कि दून में मेयर उम्मीदवार के चुनाव में आवाम सीएम के चेहरे पर ही मतदान करने के लिए आगे आयेगी? भाजपा के अन्दर कोई भी राजनेता ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है जिसका आवाम के बीच इतना भौकाल हो कि वह खुद के बल पर मेयर पद का चुनाव जीतने की ताल ठोक सके? राजनीतिक गलियारों में यह भी शोर मच रहा है कि तत्कालीन राजधानी के मेयर के कार्यकाल में शहर के अन्दर स्मार्ट सिटी का जो खिलखिला हुआ रूप देखने को मिलना चाहिए था वह सैकडो करोड खर्च होने के बाद भी वैसा का वैसा ही दिखाई दे रहा है जिसको लेकर आवाम के मन मे यह नाराजगी तो पनप रही है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ खेल ही खेल हुआ है और कुछ नहीं?
उत्तराखण्ड में निकाय चुनाव का डंका बज चुका है और निकाय चुनाव को जीतने के लिए भाजपा व कांग्रेस ने अपनी-अपनी गोटियां बिठानी शुरू कर दी है। भाजपा व कांग्रेस में नेताओं की इतनी लम्बीचौडी कतार देखने को मिल रही है जो मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष के लिए अपनी उम्मीदवारी कर चुके हैं। दोनो ही पार्टियों में काफी राजनेता ऐसे हैं जो मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष की टिकट पाने के लिए अपनी दौड उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक लगा रहे हैं। भाजपा के अन्दर निकाय चुनाव लडने वाले उम्मीदवारों की कतार लम्बी दिखाई दे रही है और इसी के चलते सरकार और संगठन ने एक साथ बैठकर चुनाव मैदान में उतारने वाले प्रत्याशियों के नामों पर लम्बा मंथन चिंतन करने के बाद अपनी सूची दिल्ली भाजपा हाईकमान के पास भेज दी है और इस सूची के जारी होने पर कोई भी विद्रोह का झंडा नहीं उठा पायेगा यह भाजपा दिग्गज नेताओं को आभास है। दिल्ली से उम्मीदवारों के चयन से यह बात साफ होगी कि उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए उत्तराखण्ड के राजनेताओं ने नहीं बल्कि दिल्ली में भाजपा हाईकमान ने अपनी मोहर लगाई है। उत्तराखण्ड सरकार व भाजपा संगठन ने निकाय चुनाव में उम्मीदवारों के टिकट की गेंद भाजपा हाईकमान के पाले में इसलिए भी डाल दी है क्योंकि अगर उत्तराखण्ड से उम्मीदवारों के नाम का चयन होता तो पार्टी के काफी नेता सडकों पर अपनी नाराजगी दिखाने के लिए भी आगे आने से नहीं चूकते इसलिए अब उम्मीदवारों के नामों को हरी झंडी भाजपा हाईकमान के यहां से ही मिलनी है? वहीं कांग्रेस में प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी उत्तराखण्ड कांग्रेस के छत्रपों ने अपना गुणाभाग लगा रखा है और देखने वाली बात होगी कि क्या कांग्रेस के दिग्गज नेता ऐसा फार्मूला बनायेंगे कि जिन्होंने विधानसभा का चुनाव लडा और वह चुनाव हार गये उन्हें वह मेयर का उम्मीदवार बनाये या न बनायें?
निकाय चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा राजनीतिक तापमान देहरादून मे गर्माया हुआ दिखाई दे रहा है और यह बात उठ रही है कि इस चुनाव में सरकार कमल खिला पायेगी या फिर कांग्रेस इन निकाय चुनाव में अपनी जीत का सफर तय करेगी? बहस यह चल रही है कि उत्तराखण्ड में मौजूदा दौर की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का राजनीतिक इकबाल इतना बुलंदियों पर है कि आवाम उन्हें अपना राजनीतिक मसीहा मानने लगा है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राजनीति के इतने बडे चाणक्य बन चुके हैं कि वह हार की आशंका वाले उम्मीदवारों को भी विधानसभा चुनाव में जितवाकर अपने नाम का डंका बजा चुके हैं। उत्तराखण्ड की राजधानी में मेयर उम्मीदवार कौन होगा इसको लेकर सोशल मीडिया पर तेजी के साथ एक बहस छिडी हुई है और इस बात को लेकर भी संग्राम मचा हुआ है कि क्या भाजपा एक बार फिर शहर के तत्कालीन मेयर रहे सुनील उनियाल गामा को अपना प्रत्याशी बनाने के लिए अपना महामंथन कर चुके हैं या फिर पार्टी कुछ और उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने के लिए फैसला ले चुकी है? उत्तराखण्ड की राजनीति में एक बडा नाम बन चुके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन निकाय चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों को चुनावी रणभूमि में जीताने के लिए खुद मोर्चा संभालेंगे यह भी साफ नजर आ रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ऐलान कर चुके हैं कि निकाय चुनाव में भाजपा जीत का परचम लहरायेगी।

