बेरोजगार संघ के कंधे पर बंदूक रखकर किसने शहर को जलाने का रचा था षडयंत्र?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला था जब किसी संघ का पुलिस के साथ शहर की सडकों पर खुला तांडव हुआ था? शहर के घंटाघर के समीप हुआ यह तांडव उस दौरान कश्मीर के पत्थरबाजों की याद ताजा कर गया था क्योंकि बेरोजगार संघ के काफी युवाओं ने जिस तरह से पुलिस पर पथराव का खुला तांडव किया था उसे देखकर यह बहस शुरू हो गई थी कि क्या राजधानी में भी कश्मीर जैसे हालात पैदा करने की साजिश का तानाबाना बुना गया था जिसके चलते धरना प्रदर्शन की आड में युवाओं द्वारा पुलिस पर खुलेआम पथराव कर सरकार और पुलिस महकमे को खुली चुनौती देकर यह वार्निंग दे दी थी कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वह सरकार के साथ ईंट से ईंट बजा देंगे? बेरोजगार संघ के कंधे पर बंदूक रखकर किसने शहर को जलाने का षडयंत्र रचा था इसको लेकर एक लम्बे समय से आशंकाओं का दौर चलता रहा लेकिन पुलिस महकमे ने सिर्फ पथराव करने वालों को जेल भेजने तक ही अपने आपको सीमित रख लिया था? बहस यह चलती रही कि आखिरकार इतने बडे आंदोलन को फडिंग करने के पीछे आखिरकार वो कौन साजिशकर्ता थे जिन्हें बेनकाब करने की दिशा में सिस्टम भी सहम गया था? बार-बार जन संघर्ष मोर्चा डेढ साल से पुलिस पर पथराव करने के पीछे साजिश रचने वालों के चेहरे बेनकाब करने और आंदोलनकारियों को फडिंग करने वालों के खिलाफ बडी कार्यवाही और उन पर रासूका लगाने की मांग करती आ रही है अब साल खत्म होने जा रहा है तो एक बार फिर जन संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री से इस साजिश की सारी परते खोलने के लिए बडी जांच की मांग उठाई तो सीएम ने भी संदेश दे दिया कि साजिशकर्ताओं के खिलाफ जांच कराकर उन पर सख्त कार्यवाही अमल मे लाई जायेगी। अब यह बात उठ रही है कि मुख्यमंत्री को इस साजिश की जांच एसटीएफ को सौंपनी चाहिए जिससे हर उस साजिशकर्ता का चेहरा बेनकाब हो सके जिसने सरकार और सिस्टम को ललकारने का दुसाहस किया था।
याद है कि बीते वर्ष फरवरी 2०23 में बेरोजगार संघ द्वारा सरकार को ललकारने के लिए एक बडी रैली का आयोजन किया गया था और जब गांधी पार्क के बाहर बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार सैकडों बेरोजगारों के साथ वहां डटे हुये थे तो पुलिस ने उन्हें वहां से हटने के लिए कहा क्योंकि शहरभर में जाम से आवाम के मन में सिस्टम को लेकर एक बडी नाराजगी दिखाई दी थी। पुलिस प्रशासन को बेरोजगार संघ ने ललकारते हुए जब पुलिस के साथ अपना विवाद शुरू किया और उसके बाद वहां पुलिस और बेरोजगार संघ के बीच बडा टकराव हुआ और जब बेरोजगार संघ की ओर से पुलिस पर कश्मीर के पत्थरबाजों की तर्ज पर पथराव शुरू हुआ था तो पुलिस को भी लाठीचार्ज करने के लिए विवश होना पडा था। शहर के बीच में पुलिस पर जिस शातिराना अंदाज में पथराव हुआ था उससे यह बहस चल गई थी कि आखिरकार वो कौन ताकतें ऐसी हैं जो पर्दे के पीछे से बेरोजगार संघ को सरकार से टकराने के लिए उन्हें अपना हथियार बनाये हुये थे? इस पथराव के पीछे किसी ने फडिंग का खेल तो नहीं खेला इसके लिए खूब शोर मचा लेकिन सरकार और सिस्टम ने इसमें कोई जांच नहीं कराई थी और जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी इस साजिश की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते आ रहे हं और वह बार-बार यह मांग कर रहे हैं कि जिन्होंने आंदोलन को फडिंग कर पथराव और आंदोलन की रूपरेखा तैयार की थी उनके खिलाफ बडी जांच कराकर उन पर कार्यवाही कराई जाये। अब मुख्यमंत्री ने इस मामले मे सख्त रूख अपनाते हुए मामले की जांच कराने का आदेश दिया है।
जन संघर्ष मोर्चा प्रतिनिधिमंडल ने मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर बेरोजगार आंदोलन को फंडिंग करने वाले जलसाजों व पत्थरबाजों पर रासुका लगाने व उच्च स्तरीय जांच को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए।
इस अवसर पर नेगी ने कहा कि मोर्चा द्वारा छह मार्च 2०23 को बेरोजगारों के आंदोलन को फंडिंग करने वाले व पत्थर बरसाने वाले पत्थरबाजों को चिन्हित कर इनके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई को लेकर आंदोलन किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी। इस दौरान नेगी ने कहा कि उक्त फंडिंग मामले का पर्दाफाश होना देशहित में बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि उक्त फंडिंग मामले को मोर्चा पूर्व में तीन अप्रैल 2०23 को तत्कालीन डीजीपी अशोक कुमार के समक्ष भी रख चुका है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई इस मामले में नहीं हो पाई द्य इतना अवश्य हुआ कि डीजीपी के निर्देश पर एसएसपी द्वारा विवेचक को फंडिंग मामले पर भी संज्ञान लेने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है और मोर्चा डेढ़ वर्ष से अधिक समय से इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रयासरत है।
इस दौरान नेगी ने कहा कि अगर इसी प्रकार फंडिंग के माध्यम से आंदोलन हुए तो उत्तराखंड जैसे प्रदेश को जे एंड के जैसा प्रदेश बनने में देर नहीं लगेगी। नेगी ने स्पष्ट किया कि अगर आंदोलन में कोई फंडिंग नहीं हुई है तो एसएसपी, डीआईजी का बयान निश्चित तौर पर दुर्भाग्यपूर्ण है तथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अब एक बार फिर जनसंघर्ष मोर्चा मुख्यमंत्री से रूबरू होकर इस मामले की बडी जांच कराने की मांग उठाने आगे आया तो मुख्यमंत्री ने इसका सच सामने लाने के लिए जांच कराने का आदेश दिया है।

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