जागेश्वर धाम में पुजारियों की ‘हटधर्मिता’

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हाथ मंे कलावा बांध बोलते लाओ पैसे
तिलक लगाया तो बोल रहे थाली में डालो रूपये
सीएम के धर्माटन विजन पर ग्रहण लगाते पुजारी!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड में धर्माटन को एक नई पहचान दिलाने की दिशा में लम्बे समय से आगे आ रखे हैं और उनके इस विजन को देखकर राज्य के धर्माटन को एक नये पंख लग रहे हैं जिससे उत्तराखण्ड के अन्दर धार्मिक स्थलों के आसपास के दुकानदारों का रोजगार भी खूब चल रहा है और उसी के चलते दुकानदारों के चेहरे गुलजार हो रखे हैं। अल्मोडा के जागेश्वर धाम को एक नया रूप देने के लिए देश के प्रधानमंत्री ने वहां आकर एक बडा संदेश दिया था जिसके चलते मुख्यमंत्री ने जागेश्वर धाम को नया रूप देने के लिए बडे विजन के साथ वहां काम शुरू करा रखा है। हैरानी वाली बात है कि जिस जागेश्वर धाम की प्रसिद्धि देशभर मंे विख्यात है उस मन्दिर के काफी पुजारियों की हठधर्मिता देखकर वहां आने वाले श्रद्धालु भी हैरान हैं कि आखिरकार पुजारी कलावा और टिका लगाने की दक्षिणा मांगने के लिए खुद क्यों श्रद्धालुओं को बोलकर उन्हें हैरान कर रहे हैं? गजब की बात है कि अपने आप श्रद्धालु के हाथ मे पुजारी कलावा बांध रहा है और उसे भगवान शिव के दर्शन करने से पहले ही दक्षिणा मांगने के लिए श्रद्धालु के सिर पर खडा हो रहा है तो वहीं कोई भी पुजारी किसी श्रद्धालु को टिका लगाकर उसे थाली में दक्षिणा रखने के लिए बोलता है। सवाल यह है कि श्रद्धालु जो देश के कोने-कोने से मन्दिर में श्रद्धा के साथ माथा टेकने जाते हैं तो फिर श्रद्धालुओं से जबरन दक्षिणा मांगने का कुछ पुजारियों द्वारा किये जाने वाला कृत्य श्रद्धालुओं को आस्था के पथ पर काफी पीडा दे रहा है? सवाल यह भी खडे हो रहे हैं कि ऐसे पुजारी तो मुख्यमंत्री के धर्माटन को आगे बढाने के विजन पर ग्रहण लगा रहे हैं? अगर वहां के पुजारियों के दक्षिणा मांगने के खेल को जानना है तो वहां सिस्टम को कुछ लोगों को श्रद्धालु बनाकर वहां भेजा जाये तो उससे यह सच सामने आ जायेगा कि मन्दिर के कुछ पुजारी किस तरह से श्रद्धालुओं के साथ अपनी हठधर्मिता दिखा रहे हैं।
अल्मोडा के जागेेश्वर धाम मे भगवान शिव और देवी-देवताओं के दर्शन करने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु वहां जाते हैं और आस्था के इस पथ पर उन्हें जाकर जो सुकून मिलता है वह हमेशा उनके लिए अलौकिक ही रहता है। जागेश्वर धाम मन्दिर का रूप देखकर ही श्रद्धालुओं को आभास होता है कि वह शायद देवो की नगरी मे आ गये हैं। बीते रोज राजधानी से दो परिवार जागेश्वर धाम मन्दिर मे भगवान के दर्शन करने के लिए गये और अपनी आस्था रखते हुए उन्हांेने वहां अपने कदम रखे तो वहां का नजारा हर बार की तरह उन्हें अद्भुत और अलौकिक नजर आया लेकिन पहली बार ऐसा देखने को मिला कि जैसे ही भगवान शिव के दर्शन करने के लिए मन्दिर के द्वार पर वो परिवार पहुंचे तो वहीं एक-दो पुजारियों ने उनके हाथ पर जबरन कलावा बांधना शुरू किया और अभी कलावा बंधा भी नहीं था कि वह अपनी दक्षिणा मांगने लगे तो यह देखकर श्रद्धालुआंे ने कहा पहले वह भगवान के दर्शन कर लें फिर उन्हें दक्षिणा देते हैं। मन्दिर में भगवान के दर्शन करने के बाद पुजारी फिर उनके सामने दक्षिणा मांगने के लिए खडा हो गया तो उस परिवार ने उसे दक्षिणा दे दी। वहीं खडे एक पुजारी ने तिलक लगाने की बात कही और तिलक लगाकर फिर दक्षिणा मांग ली। मन्दिर के अन्दर पुजारियों का यह रूप और हठधर्मिता श्रद्धालुओं को काफी पीडा पहुंचा गई।
यहां दर्शन करने के बाद एक ओर शिवालय की ओर जब काफी श्रद्धालु वहां भगवान के दर्शन कर बाहर आये तो बाहर बैठा एक पुजारी तिलक लगाकर सबसे दक्षिणा थाली मे रखने का इशारा कर रहा था उसका यह रूप देखकर भी यह समझ नहीं आ रहा था कि मन्दिर मे किसी भी श्रद्धालु से दक्षिणा मांगने का क्या औचित्य है जबकि खुद श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से किसी भी पुजारी को कुछ भी देने के लिए हमेशा आगे रहता है? सवाल यह है कि देश के कोने-कोने से जिस महादेव के मन्दिर मे श्रद्धालु पूजा करने के लिए आ रहे हैं अगर वहां श्रद्धालुओं से पुजारी दक्षिणा मांगने के लिए हठधर्मिता दिखा रहा है तो यह आस्था के पथ पर आने वाले श्रद्धालुओं के मन को पीडा दे रहा है ऐसे मे राज्य के मुख्यमंत्री को चाहिए कि वह मन्दिर मे ऐसा सख्त प्रशासक बिठाये जो ऐसे पुजारियों द्वारा कीे जा रही हठधर्मिता पर अंकुश लगाये और कोई भी पुजारी श्रद्धालुओं से दक्षिणा लेने के लिए अपनी हठधर्मिता न दिखा पाये।

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