बुलेट ट्रेन की तरह दौड रहा धामी का विकास

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने जनसेवक की भूमिका में सत्ता चलाने का जो विजन अपना रखा है उस विजन को देखकर राज्य के आंदोलनकारियों से लेकर हर कोई गदगद नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री ने रात-दिन एक कर उत्तराखण्ड को विकास की ऐसी उडान दी है कि उसे देखकर उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर के लोग मुख्यमंत्री की स्वच्छ राजनीति को देखकर गदगद हो रखे हैं। मुख्यमंत्री ने तीन साल से राज्य के अन्दर विकास की जो दौड लगाई है उसे देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूक रहा कि मुख्यमंत्री के विकास की दौड बुलेट ट्रेन की तरह नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ने विकास की जो नई गाथा लिखनी शुरू कर रखी है उसने विपक्ष के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी हैं और उन्हें यह समझ ही नहीं आ रहा कि अब राज्य में जब निकाय चुनाव सिर पर हैं तो वह भाजपा के खिलाफ चुनाव में किन मुद्दों को लेकर उन पर आक्रामक होगी जिसके चलते उसे जीत का ताज मिल सके?
उत्तराखण्ड की कमान जब एक सैनिक पुत्र को सौंपी गई थी तो उन्होंने एक करोड से ज्यादा राज्यवासियों को विश्वास दिलाया कि वह उनके सपनों का उत्तराखण्ड बनायेंगे तो आंदोलनकारियों के मन मे एक आशा की किरण जाग गई थी और मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारियों से किये गये संकल्प को पूरा करने के लिए खुद एक बडे विजन के तहत काम किया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्डवासियों से किये गये वायदों को एक-एक कर धरातल पर उतारने का जो सिलसिला शुरू किया उससे वह आवाम की नजरों मे सुपर सीएम बन गये। धामी से उम्मीदों की उडान भरने के लिए अब उत्तराखण्डवासियों को यकीन हो चला है कि राज्य बनने के बाद वह जिस उत्तराखण्ड को देखने की चाहत रखते थे उनके सपनों का उत्तराखण्ड अब उन्हें मिलने लगा है।
उत्तर प्रदेश से अलग हुये उत्तराखण्ड मे एक नई अलख जगेगी ऐसी सोच आंदोलन से राज्य को हासिल करने वाले आंदोलनकारियों के मन मे उठी थी लेकिन राज्य बनने के बाद उत्तराखण्ड कभी भी शहीद आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड बनने की दिशा मे आगे नहीं बढ़ पाया था जिसको लेकर धामी राज से पहले तक आंदोलनकारियों को आंदोलन की राह पर एक बार फिर चलते हुए देखा गया था? उत्तराखण्ड मे फैले भ्रष्टाचार और घोटालों का काला साम्राज्य स्थापित होने से आवाम के मन मे आक्रोश की ज्वाला भडकती रही और वह यह सोचने के लिए मजबूर होते रहे कि अगर उन्होंने सम्पूर्ण राज्य की जगह केन्द्र शासित राज्य मांगा होता तो आज उनका उत्तराखण्ड एक नया उत्तराखण्ड बन गया होता?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मिलकर उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने के विजन मे अपने कदम आगे बढाये हुये हैं। वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ सदेंश दे रखा है कि इक्कीसवीं सदी का का अगला दशक उत्तराखण्ड का होगा। डबल इंजन सरकार उत्तराखण्ड को विकास की राह पर इतनी तेजी के साथ आगे ले जा रही है जिसके बारे मे किसी ने शायद कल्पना भी नहीं की थी। उत्तराखण्ड से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का असीम लगाव होने के कारण ही उत्तराखण्ड मे बडी-बडी विकास योजनायें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की झोली मे डाली गई हैं और वह इन योजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर लाने के लिए एक बडे विजन के साथ काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए खुद व अपनी टीम को उसकी समीक्षा के लिए मैदान मे उतार रखा है। मुख्यमंत्री राज्य के तेरह जिलों मे विकास की एक नई गाथा लिखने के लिए हमेशा अगली पक्ति मे खडे हुये दिखाई दे रहे हैं। हर क्षेत्र मे उत्तराखण्ड को नम्बर वन पायदान पर खडा करने के लिए मुख्यमंत्री ने दिन-रात एक कर रखा है और उनके इस विजन को देखकर राज्यवासियों की उम्मीदों को एक नये पंख लगते हुए दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौजूदा दौर में गांव चली सरकार का जो दौर शुरू किया है उससे गांव में रहने वाले लोगों को उम्मीद जग गई है कि जब सरकार उनके द्वार पर खडी है तो गांव का विकास अब रूक नहीं सकता और गांव में हो रहे विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का कोई खेल न खेल पाये इसके लिए गांव में डेरा डालने वाले सभी अपर सचिव धरातल पर हो रहे कामों को ग्रामीणों के साथ परखने में जुटे हुये हैं और ग्रामीणों को उन्होंने यह विश्वास दिला दिया है कि अगर उन्हें किसी भी निर्माण कार्य में कोई भ्रष्टाचार या घोटाला नजर आता है तो वह तत्काल इसकी शिकायत करें। मुख्यमंत्री ने सरकार चली गांव की ओर का जो नारा दिया है उससे अब गांव का स्वरूप उसी तर्ज पर बदलना तय माना जा रहा है जैसे शहरों को स्मार्ट करके विकास की एक नई लकीर खींची जा रही है।

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