राजधानी मंे चंद दरोगाओं का राग आईपीएस बनो तो चलेगा बार!

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कप्तान साहब शहर मंे शराब बार चलाने का गजब है पैमाना?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने राज्य को भ्रष्टाचार, घोटालों से मुक्त कर उसे आदर्श राज्य बनाने के लिए भले ही संकल्प ले रखा हो लेकिन राजधानी में चंद दरोगाओं ने लाखों रूपये बार की फीस जमा करने वालों को अपना नया राग सुनाया है कि आईपीएस बनो तो ही शहर के अन्दर शराब का बार चला पाओगे नहीं तो उनका शराब बार चलाना सम्भव नहीं होगा? कप्तान साहब शहर में शराब बार चलाने का कुछ दरोगाओं ने जो गजब का पैमाना बनाया है उससे सरकार की छवि को धुमिल करने का तांडव चल रहा है? कप्तान साहब क्या उन दरोगाओं के चेहरे पहचानेंगे जो शहर मे ंहोटल रेस्तराओं में बार चलाने वाले काफी संचालकों को ज्ञान बांट रहे हैं कि अगर उन्हें शहर में बार चलाना है तो उन्हें आईपीएस बनना होगा? हैरानी वाली बात है कि कुछ शराब बारों को तो समय से पहले ही बंद कराने के लिए पुलिस के कुछ दरोगा अपनी बोहें तानकर होटल व रेस्तराओं मंे धमक पडते हैं लेकिन बडी पहुंच रखने वाले कुछ चेहरों के शराब बारों को सुबह तक बंद कराने के लिए भी कप्तान साहब की खाकी अगर आगे नहीं आ रही है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री के आदर्श राज्य बनाने के सपनों पर किस तरह से ग्रहण लगाया जा रहा है? मुख्यमंत्री का साफ संदेश है कि व्यापार करने वाले किसी भी व्यापारी को पुलिस अपना तांडव न दिखाये जो नियमानुसार अपने व्यापार को अंजाम दे रहे हैं लेकिन उनके ही आदेश को राजधानी पुलिस के कुछ दरोगा अगर हवा में उडा रहे हैं तो उससे सवाल खडा होता है कि राजधानी में पुलिस कप्तान ऐसे दरोगाओं पर कार्यवाही करने के लिए क्यों आगे नहीं आ रहे जो कुछ बार संचालकों के पास जाकर उन्हें यह ज्ञान बांट रहे हैं कि अगर राजधानी में शराब बार चलाना है तो पहले वह आईपीएस बने तभी राजधानी में उनका बार चल पायेगा?
राजधानी में लम्बे समय से देखने में आ रहा है कि पुलिस के कुछ दरोगा काफी होटल व रेस्तराओं में शाम ढलते ही धमक पडते हैं और वहां वह ज्ञान बांटते हैं कि वह हुक्का तो नहीं पिला रहे और इसी को लेकर वह होटल व रेस्तराओं को ऐसे खंगालते हैं मानो उनके पास कितनी बडी सूचना हो कि होटल व रेस्तरा में हुक्के के अन्दर कितना नशीला पदार्थ मिलाकर युवा पीढी को पिलाया जा रहा हो? शहर में कई रेस्तराओं और कैफे का तो पुलिस के कुछ दरोगाओं ने यह हाल बना दिया है कि वह अकसर उनके ठिकानों पर छापेमारी के लिए पहुंच जाते हैं जिसके चलते वहां बैठे परिवार व ग्राहक पुलिस का तमतमाया हुआ चेहरा देखकर वहां दुबारा आने से ही तौबा कर लेेते हैं जिसके चलते छोटा मोटा व्यापार करने वालों के सामने अपने परिवार को पालने का एक बडा संकट आकर खडा हो रखा है लेकिन शहर में चंद रेस्तरा व कैफे ऐसे हैं जहां पुलिस की छाया भी नहीं पहुंचती और उनके साथ जिस तरह से वीआईपी व्यवहार किया जाता है वह हैरान करने जैसा ही हमेशा नजर आया है। सवाल यह है कि आखिरकार जहां समूची सरकार मौजूद है वहां पर भी अगर कुछ रेस्तरा व होटलों, कैफों में पुलिस हुक्के और शराब परोसने को लेकर जिस तरह से वहां अकसर छापेमारी के लिए पहुंच जाती है वह छोटे व्यापारियों के लिए हमेशा अपने व्यापार को चलाने के संकट में खडा हुआ दिखाई देता है। वहीं कुछ कैफे और लॉज ऐसे हैं जहां पुलिस अपने कदम आगे बढाना ही नहीं चाहती क्योंकि उन्हें इस बात का भय रहता है कि अगर उन्होंने कुछ कैफे या लॉज में हुक्का व शराब बार को लेकर अपनी जांच पडताल के लिए कदम आगे बढाये तो उनके सामने अपनी कुर्सी को बचाये रखना एक बडी चुनौती हो जायेगा? गजब की बात तो यह है कि शहर के कुछ दरोगा कुछ पॉवरफुल लोगों के इशारे पर काफी होटल, लॉज व कैफांे को अपना निशाना बना रहे हैं और उनके नियमानुसार चल रहे बार में जाकर वह संचालक को यह ज्ञान दे रहे हैं कि अगर वह आईपीएस बन जायें तो शहर में उनका बार चल सकता है नहीं तो उनके सामने बार चलाना मुश्किल हो जायेगा? सिस्टम के आगे काफी कैफे व रेस्तरा संचालकों के सामने अपना व्यापार करना एक बडी चुनौती बना हुआ है क्योंकि कुछ पॉवरफुल लोग इस मिशन में आगे आ रखे हैं कि अधिकांश बारों को वह समय से पहले ही बंद करा दें या फिर उन्हें बार-बार ऐसे नियम कानून पढाये जायें जिसके चलते वह अपने बार को चलाने में असमर्थ हो जायें? पुलिस कप्तान वैसे तो दम भरते हैं कि सबके लिए एक ही पैमाना है और अगर किसी ने भी नियम विरूद्व बार चलाये तो उन पर कार्यवाही होगी लेकिन पुलिस कप्तान को भी इस बात का इल्म है कि अगर उन्होंने चंद कैफे व लॉज में चल रहे बार में शराब परोसने व हुक्का चलाये जाने को लेकर उनके संचालकों को पुलिसिया रौब दिखाया तो उनकी कप्तानी भी संकट में पड सकती है यही कारण है कि राजधानी में काफी बार चलाने वालों को तो नियम का पाठ पढवा रहे हैं लेकिन कुछ पॉवरफुल लोग ऐसे हैं जो देर रात तक अपने यहां बार व डांस का आयोजन कराते हैं और पुलिस कप्तान और उनकी टीम वहां कदम रखने से भी धबराती है?

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