मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दी नसीहत

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देहरादून(संवाददाता)। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि चिन्तन करें और भगवान ने हमारे देश की सबसे बडी सेवा है और सभी नीतियां व एक्ट बनाने है और आज भी अपने आपको एक विद्यार्थी समझता हूं। प्रधानमंत्री स्वयं सीखने वाले श्रोताओं की ओर बैठते है और कहीं न कहीं नोट बुक का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। जो हमें विरासत में मिला है उसे हमें आगे बढ़ाना है। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को नसीहत भी दी।
यहां मसूरी में सशक्त उत्तराखंड एट द रेट 2०25 के अंतर्गत चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए अधिकारियों को नसीहत दी और कार्य शैली में बदलाव लेने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यह हमारी आदत में होना चाहिए और व्यक्ति में कितनी भी तीव्र बुद्धि हो लेकिन चिंतन जरूरी है। एक दिन में हजारों विचार आते है और जो इधर से उधर होते रहते है और इन्हें भी नोट करने की जरूरत है। कभी कभी अपने दिमाग से सोचता हूं और हम करने वाले है। अधिकारियों के लिए कोई काम असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि स्लाइड चलाते है और उससे भी ज्ञान मिलता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक कहावत है कि अपने सिर की बला दूसरे के सिर पर डाल दो और इससे बचने की जरूरत है और एक विभाग दूसरे विभाग पर कार्यों को डालता है और इस और आत्म चिंतन करने का काम करेंगें और विभागों में काम का सरलीकरण का नाम दिया गया है और वास्तव में मन से चिंतन करना होगा। सोल्यूशन फाईटर का नाम मुख्य सचिव ने दिया है।
उन्होंने कहा कि साल भर का मूल्यांकन होता है और रिपोर्ट ऐसी लिखी जानी चाहिए कि साल भर काम किया और उसके आधार पर सेवा का कार्य भी होना चाहिए और सप्ताह में चार दिन वह भ्रमण पर रहते है और लोगों के बीच जाते है और विकास का फीडबैक लेते है और मुख्य सचिव संधु के मार्गदर्शन में कई निर्णय लिये और जब यह दिल्ली से आये तो उनके मन में 5०-5० चल रहा था और आज बेहतर रूप से काम हो रहा है और फाइलों का विभागीय स्तर पर निपटारा किया जाना चाहिए और मेरे पास जो फाइल आती है लेकिन सभी में आवश्यक कार्यवाही व अन्य टिप्पणियां लिखी होती है और निर्णय लेने के लिए कुछ नहीं होता है और निर्णय लेने की क्षमता आवश्यक है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि यदि आपके बेटा व बेटी कभी सवाल करते है कि आप उत्तराखंड में रहे और आपने कौन सा ऐसा अच्छा काम किया और उसने भी सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पोस्ट का कोई महत्व नहीं होता है और कार्य करने की ललक आवश्यक है। जिलाधिकारी चमोली ने बद्रीनाथ में शानदार कार्य करते हुए मास्टर प्लान का काम किया और कभी नहीं कहा कि हमें यहां से बदल दो और आज भी अच्छा काम कर रहे है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड छोटा राज्य है और हर किसी के बारे में जानकारी मिल जाती है और बडे राज्यों में पता नहीं लग पाता है और यहां पर स्वाभाविक रूप से पता चल जाता है और कौन क्या कर रहा है और किससे दोस्ती हो रही है और पत्रकारों से नाराज चल रहे है और सरकार से भी नाराज रहते है। मुख्यमंत्री दो चार लोगों से घिरे होते है और उनके अलावा किसी की नहीं सुनते है और किसी न किसी तरह से मुख्यमंत्री से बात करा दो की भी चर्चा चलती रहती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के दिमाग में छोटी बडी चीजें आती रहती है। उन्होंने कहा कि पहले हम भी कुछ कह देते थे लेकिन अब कुछ कहने के लिए सोचना पडता है और बचपन में कांटे का नदी में डालकर मछली मारते थे। उन्होंने कहा कि आज योजनाये बनाते है और लोगों में संदेश जा रहा है कि देहरादून बेसड योजनायें है अब योजनायें जो बनती है पर्वतीय जनपदों के हिसाब से बनती है और भारत सरकार व नीति आयोग के स्तर पर कार्य कर रहे है और हाइडिल पर काम कर सकते है और बागवानी के क्षेत्र में काम कर सकते है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड प्रदेश का मौसम काफी मेल खाता है और एक जैसा है और वहां पर सेब ही सेब दिखाई देते है और हम इस दिशा में सोच नहीं सकते है और हिमाचल प्रदेश में विधानसभीाकुल्लू, मनाली सहित 15 -16 स्थानों पर गया और उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश से बेहतर राज्य है। उन्होंने कहा कि मसूरी में जगह नहीं मिलने वाली है ऐसे हालत बन गये है। जो हमें विरासत में मिला है उसे हमें आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि काफी समय से चिंतन शिविर के बारे में सोच रहे थे और दो बार चिंतन शिविर में किन्ही कारणों से व्यवधान हो गया। उन्होंने कहा कि रामनगर और नैनीताल के बाद अब मसूरी में चिंतन शिविर किया गया है।

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