खाकी को धोखा देने को पहना व्यापारी का चोला!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की राजधानी में नासूर की तरह फैल चुके क्रिकेट सट्टे के मकडजाल में काफी व्यापारी और युवा पीढी जिस तरह से फंस चुके हैं उससे उन्हें बाहर लाने के लिए कुछ पुलिस अफसरों में कोई दिलचस्पी क्यों नजर नहीं आ रही यह तो हैरान करने वाली बात है लेकिन यह भी एक बडा सत्य है कि पुलिस के कुछ दरोगाओं ने कुछ बडे सट्टेबातजों को ज्ञान दिया है कि अगर उन्हें अपना धंधा करना है तो वह व्यापारी का चोला पहन लें और यह दिखाना शुरू कर दें कि उनका तो सट्टे के कारोबार से कोई लेना देना नहीं है और वह अपनी दुकान में बैठकर अपना व्यापार कर रहें हैं? लगभग आधा दर्जन टॉप के सट्टेबाजों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए भले ही व्यापारी होने का चोला पहन लिया हो लेकिन अगर इनके नेटवर्क पर पुलिस अफसर अपनी रडार लगायें तो उन्हें इस बात का इल्म हो जायेगा कि व्यापारी का चोला पहनने वाले कुछ टॉप के सट्टेबाज अपने ही प्रतिष्ठान से क्रिकेट सट्टे का खुला काला धंधा कर रहे हैं? बहस यह भी छिड रही है कि अगर पुलिस अफसरों को बडे सट्टेबाजों पर अपना दयाभाव रखना ही है तो फिर उन छोटे-मोटे सट्टेबाजों पर वह क्यों रात-दिन शिकंजा कसते रहते हैं जो सिर्फ चंद रूपयों के लिए बडे सट्टेबाजों के गुलाम बनकर उनका काम देखते हैं?
उत्तराखण्ड की राजधानी के पुलिस कप्तान दलीप कुंवर अपराधियों व सट्टेबाजों पर बडा प्रहार करने के लिए हर समय तैयार तो दिखाई देते हैं लेकिन न जाने वो कौन सी अदृश्य शक्तियां हैं जो उन्हें सट्टेबाजों के खिलाफ बडा ऑपरेशन चलाने से रोक रही है? पुलिस कप्तान जब उधमसिंहनगर में तैनात थे तो उन्होंने वहां भी अपराधियों और सट्टेबाजों और बडे जुआरियों पर नकेल लगाने के लिए एक के बाद एक कई ऑपरेशन किये थे। राजधानी में तैनाती के बाद उन्होंने सख्त रूख दिखाया था कि वह हर गुनाह करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कडी कार्यवाही करेंगे और किसी को भी बक्शा नहीं जायेगा। पुलिस कप्तान ने अपराध से दौलत कमाने वाले गुनाहगारों पर गैंगेस्टर, हिस्ट्रीशीट की कार्यवाही करने का भी खुला ऐलान किया था और यहां तक दम भरा था कि जिन्होंने गुनाह से दौलत कमाई है उन पर गैंगेस्टर लगाकर उनकी सम्पत्तियों को 14/ए की कार्यवाही में सीज किया जायेगा। गजब की बात है कि कुछ सट्टेबाजों पर मुकदमों की बडी बाड़ लगी हुई है लेकिन उसके बावजूद भी उनके खिलाफ हिस्ट्रीशीट न खोलना कई सवालों को जन्म दे रहा है? राजधानी के अन्दर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि पुलिस के कुछ दरोगाओं ने शहर के आधा दर्जन टॉप के सट्टेबाजों को ज्ञान दिया कि वह हमेशा पुलिस अफसरों की निगाह में रहते हैं इसलिए वह कोई व्यापार खोल लें जिससे कि यह साफ हो सके कि वह व्यापार कर रहा है और उसका सट्टे से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है? चर्चा है कि आधा दर्जन सट्टेबाजों ने पुलिस के कुछ अफसरों की आंखों में धूल झोंकने के लिए भले ही व्यापारी बनने का चोला पहन लिया हो लेकिन यह भी शीशे की तरह साफ है कि व्यापारी का चोला पहनने वाले आधा दर्जन से अधिक सट्टेबाजों का असली धंधा क्रिकेट पर सट्टे की बुक लगाने का है? अगर पुलिस कप्तान चाहें तो राजधानी में नासूर की तरह फैल चुके सट्टेबाजों के सिंडिकेट को मात्र चंद दिनों में ही नेस्तनाबूत कर सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें गुप्त रणनीति के तहत ऑपरेशन चलाना पडेगा?

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