पुष्कर मंे ‘जिगरा’

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में बाइस सालों से राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री राज्य को स्वीजरलैंड बनाने से लेकर भ्रष्टाचारमुक्त उत्तराखण्ड का सपना राज्यवासियों को दिखाते आये लेकिन अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री गद्दी के मोह में खुद भी भ्रष्टाचार की चाश्नी में लिपटकर उसका आनंद लेते रहे और उनके साथ कुछ अफसरों ने जिस तरह से भ्रष्टाचार का खुला तांडव किया वह किसी से छिपा नहीं रहा। उत्तराखण्ड के चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों ने जिस तरह से कुछ बडे अफसरों का मोह रखा और उन्हें भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दी उसी का परिणाम है कि चंद पूर्व मुख्यमंत्री अपने करीब रहने वाले भ्रष्ट अफसरों के कारण उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक खूब बदनाम हुये और उसी के चलते उनकी कुर्सी भी हमेशा के लिए चली गई। वहीं राज्य में युवा चेहरे पुष्कर सिंह धामी को जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया गया तो उन्होंने अपने आपको उत्तराखण्ड का सेवक मानकर सत्ता चलाने के लिए अपने कदम आगे बढाये और राज्यवासियों को एक संदेश दिया कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लडेंगे चाहे इसका परिणाम कुछ भी निकले क्योंकि वह गद्दी के मोह में राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार, घोटाले और माफियाओं पर अपनी नजर नहीं फेर सकते। राजनीतिक पिच पर धाकड पारी खेलने का पुष्कर में जो जिगरा देखने को मिल रहा है उसी का परिणाम है कि राज्य में भ्रष्टाचार के बडे-बडे मगरमच्छ सलाखों के पीछे पहुंच रहे हैं और गुनाह करने वाले कुछ और मगरमच्छों को भी अब भय सताने लगा है कि उन्हें भी पुष्कर राज में सलाखों के पीछे जाना पड सकता है। उत्तराखण्ड में किसी ने भी इस बात की कल्पना नहीं की थी कि जिस युवा चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया गया है वह चंद समय में ही राजनीति का इतना बडा खिलाडी बन जायेगा कि उस तक पहुंचना कुछ बडे राजनेताओं के बस में नहीं रहेगा?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब राज्य में भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ हुंकार लगाई थी तो यह बहस चली थी कि ऐसी हुंकार तो राज्य के कुछ पूर्व मुख्यमंत्री भी लगाते रहे लेकिन उनके कार्यकाल में जिस तरह से भ्रष्टाचार और घोटालों के साथ आवाम को माफियाराज देखने को मिला उससे राज्य की जनता एक ही सवाल कर रही थी कि अलग राज्य की मांग शायद सही नहीं थी और अगर यह राज्य केन्द्रशासित होता तो आज राज्य अपने एक नयेपन में दिखाई देता और उत्तराखण्ड में कोई भी राजनेता भ्रष्टाचार व घोटालों का खेल नहीं खेल पाता। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड को 2०25 तक आदर्श राज्य बनाने के साथ उसे भ्रष्टाचार व नशामुक्त करने का भी ऐलान कर रखा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उस समय एक बडा हौसला दिखाया जब उन्होंने यूकेएसएसएससी भर्ती मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी और साफ संदेश दिया कि भ्रष्टाचार करने वाला गुनाहगार सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जायेगा तब तक यह मामला बंद नहीं होगा। मुख्यमंत्री का यह ऐलान बडे-बडे भ्रष्टाचारियों के पेट में दर्द कर गया और उन्हें यह लगा कि अब पुष्कर राज में उनके गुनाह कभी न कभी बेपर्दा हो जायेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना सखा बनाया तो मुख्यमंत्री ने नरेन्द्र मोदी के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में झोंक दी। यूकेएसएसएससी मामले में जब राज्य के डीजीपी दावा कर रहे थे कि यह जांच अब अपने अंतिम दौर मे है तो उसके बाद मुख्यमंत्री के कडे रूख को भांपकर एसटीएफ ने भ्रष्टाचार के तीन बडे मगरमच्छों को सलाखों के पीछे पहुंचाया तो उससे उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में एक बडा संदेश चला गया कि पुष्कर सिंह धामी एक बडे विजन के तहत सत्ता चला रहे हैं और वह अपने राज्य को देश के अन्दर अग्रणीय राज्य बनाने केे मिशन में तेजी के साथ आगे बढते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजनीतिक पिच पर जिस तरह से हर बॉल को पिच से बाहर फेंकने का हौसला दिखा रखा है उससे राज्य के अन्दर बडे-बडे सफेदपोशों में एक खलबली मची हुई है और उन्हें यह डर सता रहा है कि जिस तरह से मुख्यमंत्री राजनीतिक पिच पर धाकड पारी खेलते हुए बडे-बडे फैसले लेने का जिगरा दिखा रहे हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि वह उत्तराखण्ड के अन्दर एक साफ सुथरी और सधी हुई राजनीतिक पारी खेलने का प्लान तैयार कर आगे बढ रहे हैं।

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