उत्तराखण्ड में पुष्कर ही पुष्कर का शोर

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक साल के भीतर जिस तरह से आवाम से किये गये वायदों को पूरा करने का अम्बार लगा दिया उससे राज्य के आधा दर्जन भाजपा के दिग्गज नेताओं को अपनी ही राजनीति पर खतरा मंडराता हुआ नजर आ रहा है क्योंकि जिस विजन के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आगे बढते जा रहे हैं और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को उन्होंने धरातल पर उतारने का संकल्प पूरा करना शुरू किया है उससे मुख्यमंत्री के बढते रूतबे को देखकर मीडिया धराने के कुछ मीडियाकर्मियों को तीखी मिर्च लगी हुई है और वह अपने कुछ साथियों से यह इच्छा पाले हुये हैं कि किसी तरह से भी राज्य के अन्दर महानायक की भूमिका में नजर आ रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को निशाने पर लिया जाये? हालांकि ऐसा सपना देखने वाले मीडिया के सिंडिकेट को आईना दिखाना होगा कि जो राज्य का मुख्यमंत्री गरीब से गरीब इंसान को अपने गले से लगाकर उसका दर्द हर रहा है उन्हें किसी राजनेता के इशारे पर निशाने पर लेने का राज्य में तो सही पत्रकारिता करने वाले ऐसी साजिश में फंसने वाले नहीं है?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में इक्कीस सालों से मीडिया के कुछ लोग एक सिंडिकेट बनाकर काम करते आ रहे हैं और वह सरकार की कमियों को अपना हथियार बनाकर उसे कैश करने का खेल खेलते रहे हैं। ऐसे सिंडिकेट के पास मात्र कुछ सालों के भीतर कैसे अकूत दौलत आ गई यह अपने आपमें कई सवालों को जन्म देता आ रहा है? उत्तराखण्ड में पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री न बनने देने के लिए मीडिया का एक सिंडिकेट कुछ राजनेताओं के हाथो में खेलता रहा और इसी के चलते पुष्कर सिंह धामी को खटीमा में चुनाव हरवाने के लिए एक बडा तानाबाना बुना गया था साथ ही उन्हें खटीमा के अन्दर आवाम की नजरों में सिंडिकेट मीडिया ने जिस तरह से निशाने पर लिया वह भी किसी से छिपा नहीं है? खटीमा में पुष्कर सिंह धामी की हुई हार के बाद मीडिया के सिंडिकेट ने एक बडे राजनेता को उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनवाने के लिए खूब शोर मचाया था और कुछ मीडिया ऐसे राजनेताओं के हाथों में खेल रही थी जो खुद मुख्यमंत्री बनने का सपना पाले हुये थे? भाजपा हाईकमान ने ऐसे मीडियाकर्मियों को आईना दिखाते हुए उत्तराखण्डवासियों के दिलों में राज करने वाले पुष्कर सिंह धामी को एक बार फिर राज्य का मुख्यमंत्री बनाकर उन सब राजनेताओं को यह संदेश दे दिया था कि पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड में एक लम्बे युग तक सत्ता पर काबिज रहेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक साल के भीतर विकास के पहिये को जिस बुलट ट्रेन की तरह आगे बढाया उससे मीडिया के एक सिंडिकेट को तीखी वाली मिर्ची लगी हुई है और वह अब यह प्रपंच और खुसर-पुसर कर रही है कि 2०24 में उत्तराखण्ड के अन्दर एक नया अध्याय लिखा जायेगा? मीडिया के सिंडिकेट ने अफवाहों का जो ढोल पीट रखा है उससे साफ दिखाई दे रहा है कि पुष्कर राज में उनका वो खेल परवान नहीं चढ पा रहा है जो वह खेल राज्य के कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में खेलते आ रहे थे? मीडिया का यह सिंडिकेट इतना शातिर है कि वह अपने संस्थान में तो राज्य के मुखिया के खिलाफ कोई शब्द नहीं बोलता लेकिन मीडिया के अन्दर वह अफवाहों का खेल खेलकर मुख्यमंत्री को निशाने पर रखने की साजिश में जरूर आगे बढे रहते हैं?
हालांकि इस सिंडिकेट के दिन अब खत्म हो चुके हैं और सरकार पारदर्शिता के साथ आगे बढ रही है तथा यह सिंडिकेट जो कुछ लोगों की खनन व शराब के बार के लाइसेंसों की फाइलें लेकर बडे-बडे खेल किया करता था वह अब पुष्कर राज में टॉय-टॉय फिस्स होता हुआ दिखाई दे रहा है इसलिए उनमें मुख्यमंत्री के बढते रूतबे को देखकर मिर्ची लगी हुई है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक साल के भीतर जिस तरह से राज्य को पारदर्शिता व स्वच्छता के साथ चलाने के लिए अपने कदम आगे बढाये हैं उससे उन चंद राजनेताओं के सीएम बनने का सपना भी फुस्स हो चुका है जो लम्बे अर्से से अपने आपको मुख्यमंत्री बनने की कगार में खडा करने से पीछे नहीं हटते थे? चंद नेताओं ने तो मीडिया में अपनी ब्राडिंग के लिए कुछ मीडियाकर्मियों को सेवा शुल्क देकर अपने साथ मिला रखा है लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड में समूची मीडिया और आवाम को एकसाथ लेकर चलने की दिशा में जिस तरह से आगे बढते जा रहे हैं उससे उनकी प्रसिद्धि देखकर कुछ छुटभैय्यों के पेट में दर्द हो रहा है कि मीडिया के कुछ लोग कैसे मुख्यमंत्री को महानायक बना रहे हैं। ऐसे छुटभैय्यों को यह समझना चाहिए कि जो मुख्यमंत्री एक साल के भीतर अपने ऊपर एक भी दाग नहीं लगवा पाया उसे आखिरकार कैसे मीडिया का कोई व्यक्ति अपने निशाने पर लेकर उन्हें कटघरे में खडा कर सकता है?

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