पुष्कर के विकास से घबराई कांग्रेस

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में कांग्रेस ने चम्पावत में उपचुनाव में अपना बेहद कमजोर प्रत्याशी खडाकर कहीं न कहीं राज्य में तेजी से हो रहे विकास के पहिये को तीस दिन तक जाम करके रख दिया है? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जबसे विकास के पथ पर आगे बढते हुए राज्यवासियों के हित में फैसले करने शुरू किये हैं उन फैसलों में से कुछ फैसलों पर कांग्रेस धामी के विकास पर क्यों शोर मचाने में जुटी हुई है जिसको लेकर भी राज्यवासियों के मन में कांग्रेस को लेकर एक बडी नाराजगी पनपने लगी है? बहस चल रही है कि अगर पुष्कर ंिसह धामी ने लाखों गरीब परिवारों को कैबिनेट की बैठक में एक साल में तीन गैस सिलेण्डर देने का ऐलान कर दिया तो इससे चम्पावत में कौन सी आचार संहिता का उल्लंधन हो गया यह समझ से परे है? कांग्रेस आचार संहिता का उल्लंधन करने को लेकर तो ऐसा ढोल पीट रही है मानो यह सारे गैस सिलेण्डर चम्पावत की जनता को दिये जाने हो जिससे वहां का चुनाव प्रभावित हो जायेगा? पूर्ण बहुमत की सरकार के मुखिया क्या चम्पावत में इतने कमजोर हैं कि कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेता उन्हें चुनाव हराने का भौपू बजा रहे हैं? अगर कांग्रेस इस उपचुनाव में राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने अपना प्रत्याशी न खडा करते तो उससे राज्य के अन्दर कांग्रेस का इकबाल बढता और यह साफ होता कि कांग्रेस शुद्ध परम्परा के साथ मुख्यमंत्री के उपचुनाव को लेकर राज्य के विकास को बाधित नहीं करना चाहती?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भीतरघातियों के चलते खटीमा का उपचुनाव क्या हारे कांग्रेस के कुछ नेता तो उन्हें इतना हल्का आंकने लगे कि वह चम्पावत में होने वाले उपचुनाव में पुष्कर सिंह धामी को हराने का दावा करने लगे और हैरानी इस बात की है कि जो कांग्रेस मुख्यमंत्री को चुनाव में हराने का दम भर रही है उसने चम्पावत में अपना इतना कमजोर प्रत्याशी उतारा है जिसको लेकर चम्पावत की जनता भी एक सुर में यह कहने से पीछे नहीं हट रही कि समूचा चम्पावत पुष्कर सिंह धामी के साथ खडा है और इस उपचुनाव में उनकी एतिहासिक जीत होनी निश्चित है। राज्य के अन्दर पुष्कर सिंह धामी तेजी के साथ विकास का पहिया आगे बढाते जा रहे हैं लेकिन इस विकास में भी कांग्रेस सरकार पर उंगलियां उठाने से पीछे नहीं हट रही और बीते रोज जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी कैबिनेट की बैठक में लाखों गरीब परिवार की महिलाओं को एक वर्ष में तीन नि:शुल्क गैस सिलेण्डर देने और किसानों को बीस प्रतिशत बोनस देने का ऐलान किया तो कांग्रेस आग बबूला हो गई और उसके कुछ राजनेता इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंधन कहने के लिए आगे आ गये। सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार यह घोषणा चम्पावत के लिए तो थी नहीं फिर कांग्रेस क्यों इस मामले में पुष्कर सरकार को कटघरे में खडा कर रही है? उत्तराखण्ड के अन्दर विधानसभा चुनाव के समय ऐसा होता तो यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंधन माना जाता लेकिन एक मात्र उपचुनाव में इस घोषणा को आचार संहिता का उल्लंधन मानना भाजपा और राज्य की जनता को हैरान कर रहा है? राज्य के अन्दर इस बात को लेकर भी बहस चल रही है कि जो कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पूर्व दम भर रही थी कि राज्यवासियों ने भाजपा को सत्ता सेे बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना लिया है और राज्य में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आयेगी तो कांग्रेस के इस दावे को राज्य की जनता ने ही आईना दिखाकर कांग्रेस को ही पांच साल का वनवास दे दिया। अब चम्पावत से राज्य के मुख्यमंत्री चुनाव लड रहे हैं जिन्होंने मात्र छह माह के भीतर भाजपा को सत्ता का सुख दिला दिया और अब पुष्कर सिंह धामी को उपचुनाव में कांग्रेस किस आधार पर चुनाव हराने का ख्वाब देख रही है यह तो कांग्रेस के नेताओं को भी शायद समझ नहीं आ रहा? उत्तराखण्ड के अन्दर अब यह शोर भी मच रहा है कि अगर कांग्रेस बडा दिल रखते हुए प्रचंड बहुमत की सरकार के मुखिया पुष्कर ंिसह धामी के सामने अपना कोई प्रत्याशी न खडा करती तो राज्यवासियों के मन में कांग्रेस को लेकर एक बेहतर सोच बनती और उनके मन में यह धारणा भी पैदा होती कि कांग्रेस राज्य के विकास में बाधा न पडे इसके लिए उन्होंने अपना प्रत्याशी मुख्यमंत्री के सामने चुनाव में नहीं उतारा? वहीं चम्पावत में पुष्कर सिंह धामी के सामने कांग्रेस प्रत्याशी का जितना वैसा ही दिखाई दे रहा है जैसा एवरेस्ट पर चढने जैसा होता है।

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