और नगर निगम ने दिये भुगतान के आदेश

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कोटद्वार(संवाददाता)। देवी रोड स्थित मोटर नगर में आधुनिकतम बस अड्डे के मामले में नगर पालिका से लेकर नगर निगम बनने तक के समय के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही आम जनता पर भारी पड़ रही है। हालात यह रहे कि मौजूदा नगर निगम प्रशासन माध्यस्थ न्यायाधिकरण (आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल) में भी सही तरीके से मामले की पैरवी नहीं कर सका, जिससे आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने नगर पालिका व नगर निगम को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्यदायी संस्था के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 12 करोड़ का भुगतान करने के आदेश नगर निगम को दिए हैं। नगर निगम अब उक्त निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण में जाएगा।
वर्ष 2०13 में तत्कालीन सरकार की संस्तुति पर उस समय की नगर पालिका (अब नगर निगम) ने पीपीपी मोड पर आधुनिकतम बस अड्डे के निर्माण कराने का कार्य एक संस्था को सौंपा बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) बस अड्डे का निर्माण कराकर नगर पालिका को सौंपना था, लेकिन संस्था ने पूरी जमीन उपलब्ध न कराने का तर्क देते हुए वाद दायर कर दिया। कार्यदायी संस्था का तर्क थी कि बस अड्डे के निर्माण के लिए पालिका प्रशासन ने अनुबंध के अनुसार न तो पर्याप्त भूमि उपलब्ध करवाई और न ही उक्त परिसर में स्थित दुकानों को ही हटवाया। संस्था ने आधे अधूरे निर्माण कोटद्वार की देवीरोड स्थित मोटर नगर में अधूरा पड़ा नगर निगम का बस अड्डा संवाद पर आठ करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही। वर्ष 2०17 में यह मामला आर्बिट्रेशन कोर्ट में विचाराधीन था। बीते 1० मई को आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने कार्यदायी संस्था रामेश कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को 12 करोड़ की धनराशि देने के आदेश कर दिए। नगर आयुक्त केएस नेगी ने कहा कि निगम इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय मॉडल पर कार्यदायी संस्था को मोटर नगर की भूमि को 25 वर्षों के लिए अनुबंध पर दिया गया था।
इसके लिए पालिका ने मोटर नगर की 1.838 हेक्टेयर भूमि में से 1.5०3 हेक्टेयर भूमि कार्यदायी संस्था को मुहैया करा दी थी। अनुबंध की शर्तों के तहत मार्च 2०15 तक कार्यदायी संस्था की ओर से में वाद दायर करेगा। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता मुजीब नैथानी ने कहा कि यदि कार्य संस्था को पूरी भूमि नहीं मिली तो संस्था ने निर्माण कार्य कैसे शुरू किया कार्यदाई संस्था ने जिला पंचायत में तक नक्शा पास नहीं कराया गया जो की विधि के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।
मुजीब नैथानी ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस सार्वजनिक स्थान को एक ग्रुप विशेष को बेचने की तैयारी की जा रही है। इसीलिए इसे कानूनी पचड़े में फंसा कर विवादित बनाया जा रहा है। नियम के अनुसार नगर निगम को उल्टे रूपये 5० करोड़ रुपए हर्जाने मिलना चाहिए साथ ही मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। जिससे इस पूरे मामले का सच जनता के सामने आना चाहिए कि किस प्रकार से मोटर नगर को पीपीपी मोड पर दिया गया और किन शर्तों के साथ दिया गया।

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