देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार की कमान संभाले पुष्कर ंिसह धामी राज्य के विकास के लिए आये दिन मंथन व चिंतन करते हुए आगे बढ रहे हैं और पहली बार ऐसा देखने को मिला जब मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं का वैलकम किया तो देश से चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड आया जिसे देखकर सरकार भी हैरान हो गई और उसे आखिर में श्रद्धालुओं को यात्रा में अपना रजिस्ट्रेशन कराने का संदेश देना पडा। बहुमत की सरकार के मुखिया चम्पावत में उपचुनाव लडने के लिए मैदान में उतर चुके हैं और आज कांग्रेस की प्रत्याशी निर्मला गहतोडी ने पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ जब अपना नामांकन किया तो इस नामांकन में कांग्रेस ऐसा भौकाल नहीं दिखा पाई जिससे कि यह दिखाई दे कि उपचुनाव में मजबूती के साथ कांग्रेस पुष्कर सिंह धामी से चुनाव लडने के लिए आगे आई है? बहस शुरू हो गई है कि आखिरकार जो मुख्यमंत्री समूचे उत्तराखण्ड के महानायक बन चुके हैं उनसे कांग्रेस अपनी कमजोर प्रत्याशी के बल पर कैसे चुनाव जितने का ढोल पीट रही है यह समझ से परे है?
उल्लेखनीय है कि भाजपा की ओर से राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उपचुनाव लडने के लिए मैदान में आ चुके हैं और उनके साथ समूची सरकार, संगठन एकसाथ खडा हुआ दिखाई दे रहा है लेकिन कांग्रेस के अन्दर जिस तरह से बडी गुटबाजी देखने को मिलती आ रही है उसकी छाया आज निर्मला गहतोडी के नामांकन के दौरान भी साफ देखने को मिल गई जब कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत व कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह भी अपनी प्रत्याशी के नामंाकन के दौरान चम्पावत नहीं पहुंचे? उत्तराखण्ड के अन्दर एक बहस चल रही है कि जो कांग्रेस लम्बे अर्से से आपसी गुटबाजी में ही लीन हो रखी है और चंद समय पूर्व ही हुये विधानसभा चुनाव में उसके कई दिग्गज नेता चुनावी रणभूमि में ढेर हो गये वह कांग्रेस कैसे चम्पावत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उपचुनाव में हराने का ख्वाब देख रही है यह हैरान करने वाली बात है? कांग्रेस के अन्दर आपसी तनातनी का ही परिणाम है कि कांग्रेस के कुछ नेता अपनी पार्टी को बाय-बाय कहकर भाजपा में शामिल हो गये और यह भी सवाल खडे हो रहे हैं कि जब उत्तराखण्ड में भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार है तो फिर कांग्रेस ने उपचुनाव में आखिर क्या सोचकर अपना प्रत्याशी मुख्यमंत्री के खिलाफ उतारा है यह राज्यवासियों की समझ में भी नहीं आ रहा है? सवाल खडे हो रहे हैं कि मात्र एक सीट को लेकर कांग्रेस का सारा कुनबा मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव में उतरने के लिए आखिर किस सोच के साथ आगे आया है यह चम्पावत की जनता को भी समझ नहीं आ रहा है? चम्पावत में चारो ओर पुष्कर सिंह धामी का डंका बज रहा है और सबसे अहम बात यह है कि चंद समय पूर्व ही भाजपा के पूर्व विधायक कैलाश गहतोडी ने कांग्रेस के कद्दावर नेता हेमेश खरकवाल को चुनावी रणभूमि में हराया था और अब उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लडने से साफ इंकार कर दिया था लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आखिर क्या सोचकर अपनी कमजोर प्रत्याशी निर्मला गहतोडी को उत्तराखण्ड के महानायक बन चुके पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ चुनाव में उतारने के लिए अपने कदम आगे बढाये यह एक रहस्य ही बना हुआ है? पुष्कर सिंह धामी के नामांकन के दौरान भाजपा के दिग्गज नेताओं का जमावडा और उनके रोड-शो में चप्पे-चप्पे पर आवाम का जनसैलाब देखकर कोई भी यह अंदाजा लगा सकता है कि चम्पावत के लोग किस तरह से पुष्कर सिंह धामी को अपनी पलकों पर बिठा चुके हैं? वहीं आज कांग्रेस प्रत्याशी निर्मला गहतोडी ने जब अपना नामांकन किया तो उस नामांकन के दौरान कांग्रेस का वह भौकाल नहीं दिखाई दिया जिसके दम पर वह दम भर रही थी कि उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी पुष्कर सिंह धामी को चुनाव हरा देंगी?
