पुष्कर का होगा चम्पावत

0
113

देहरादून(संवाददाता)। स्वयं के हित को दरकिनार रखते हुए जनहित को सर्वोपरि समझ कर उस पर कार्य करने वाला व्यक्ति एक नया अध्याय लिख जाता है और उस अध्याय की प्रत्येक पंक्ति चीख-चीख कर उसके व्यक्तिगत बलिदान की गाथा सुनाती है। इस कथन का एक उदारहण उस समय देखने को मिला था जब उत्तराखण्ड के विधानसभा चुनाव का परिणाम सामने आया था। जहां भाजपा को लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत प्राप्त हुआ था। हैरान करने वाली बात तो यह रही थी कि जिस व्यक्ति के चेहरे के दम पर भाजपा ने चुनाव लड़ा था, उस शख्सियत को खुद अपनी ही विधानसभा से हार का मुंह देखना पड़ा। बातें उठने लगी कि भाजपा के इतिहास में यह कोई नई घटना नहीं है क्योंकि इससे पूर्व भी ऐसा हो चुका है कि जिसके चेहरे के दम पर भाजपा चुनाव लड़ी वह व्यक्ति ही चुनाव हार गया हो। पूर्व जो भुवन चंद्र खण्डूरी के साथ हुआ था ठीक वैसा ही हाल ही में हुए चुनाव में सीएम पुष्कर सिंह धामी के साथ हुआ। धामी की हार पर विभिन्न प्रकार के तर्क सुनने को मिले। किसी ने कहा कि धामी ने पूरे प्रदेश में भाजपा को जोर शोर से प्रचार किया लेकिन अपनी विधानसभा में उन्होंने वह जोर नहीं लगाया, तो कुछ ने भीतरघात का तर्क दिया। कारण जो भी रहा हो लेकिन आज के समय में वह पराजित हुआ व्यक्ति ही राज्य को मुखिया और इसका सबसे बड़ा कारण है उसकी विराट शख्सियत जिसका मुरीद समूचा भाजपा हाईकमान है। अल्प समय में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जो विकास ब्यार चलाई है वह किसी से छिपी नहीं है। अब वह चम्पावत से उपचुनाव की ताल ठोंकने जा रहे है। जानकारों का मानना है कि चम्पावत की अधिकांश जनता विकास के नाम पर अपने मत का इस्तेमाल करेगी और इन्हीं मतों के आधार पर सीएम धामी चम्पावत पर फतह हासिल करने में कामयाब होंगे।
हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव के बाद जिस प्रकार से भाजपा को अकल्पनीय जीत हासिल हुई है, उसने कई मिथकों और कुछ तथाकथित राजनीतिक परंपराओं को तोड़ दिया है। हालांकि भाजपा अपने ‘मिशन 6०$Ó को भले ही पूरा न कर पाई हो लेकिन लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता प्राप्त करते ही उसे एक नया इतिहास रच दिया। यह जो इतिहास रचा गया है, इसकी पटकथा की रचना करने वाले और कोई नहीं बल्कि प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ही है, जिन्होंने अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व और विकासपूर्ण सोच के चलते उत्तराखण्ड की जनता के दिल में अपनी एक अलग जगह बनाई और अपनी पार्टी के लिए लोगों को मतदान करने के लिए प्रेरित किया। जिसका परिणाम आज सबके सामने है। अपनी विधानसभा खटीमा से चुनाव हारने के बावजूद जिस प्रकार से भाजपा हाईकमान ने प्रदेश की बागडोर फिर से पुष्कर सिंह धामी के हाथों में सौंपी है, वह यह बताने के लिए काफी है कि हाईकमान को उनके उपर कितना विश्वास है। यह विश्वास हवाहवाई नहीं है, बल्कि इस विश्वास को पुष्कर सिंह धामी ने कमाया है। प्रदेश के अंदर पार्टी के लगभग सभी पदाधिकारी व नेता इस बात से संतुष्ट है कि हाईकमान ने धामी को सीएम बनाया है और इसका प्रमाण उस समय देखने को मिल गया था जब सीएम के उपचुनाव की बात उठी तो कई विधायक उनके लिए अपनी सीट छोडऩे के लिए तैयार हो गए थे। उपचुनाव की पिक्चर अब साफ हो गई है और सीएम धामी चम्पावत विधानसभा से चुनाव लडऩे जा रहे है। उत्तराखण्ड की राजनीति को गहराई से जानने वाले जानकारों की माने तो सीएम धामी अपनी साफ और स्वच्छ छवि, विकासपरक सोच और कड़े फैसले लेने सामथर्य के बूते पर आवाम के बीच अपनी एक अलग पहचान बना चुके है और यही पहचान अब मत बनकर चम्पावत के उपचुनाव में बरसेगी और सीएम पुष्कर सिंह धामी की जीत को सुनिश्चित करेगी?

LEAVE A REPLY