विपक्ष के विधायक पुलिस अफसरों से खफ ा

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संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश को एक आदर्श राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ रहे हैं और उन्होंने राज्य की ब्यूरोक्रेसी को साफ संदेश दिया है कि वह सरकारी फोन हर कीमत पर उठायें लेकिन सीएम के आदेशों को उत्तराखण्ड के कुछ पुलिस अधिकारी व छोटे कर्मचारी हवा में उडाते हुए नजर आ रहे हैं और खाकी के इस अपमान को लेकर जिस तरह से कुछ द्घशद्ब6द्मद्ध द्घश/द्म;स्रद्मह्यड्ड में नाराजगी पनपने लगी है उससे अब यह सवाल भी खडे होने लगे हैं कि सरकार को अब ऐसे अफसरों व छोटे कर्मचारियों को अपना इकबाल दिखाने का समय आ गया है जो उनके आदेशों को ही रद्दी की टोकरी में रख रहे हैं? एक विधायक ने तो अफसरों की बैठक में यहां तक अपना दर्द बयां कर दिया कि गाडी में विधायक का बोर्ड लगा होने के बावजूद पुलिस का छोटे से छोटा कर्मचारी भी उन्हें सलाम करने की जहमत नहीं उठाता जो कि एक विधायक का अपमान ही है? अब देखने वाली बात होगी कि क्या राज्य के मुखिया कुछ खाकीधारियों द्वारा किये जा रहे विधायकों के अपमान को लेकर सख्त रूख अपनायेंगे?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की ब्यूरोक्रेसी को अपना साफ संदेश दिया कि विधायकों का सम्मान करना उनका दायित्व है और यह भी आदेश दिये कि हर अफसर व कर्मचारी सरकारी फोन पर आने वाली हर घंटी को जरूर उठाये और अगर वह व्यस्त हों तो उसके बाद उस फोन नम्बर पर वह कॉल करें लेकिन लगता है कि पुलिस के कुछ अफसरों व छोटे कर्मचारी पूर्व सरकारों में चले आ रहे अपने हिटलरशाही रवैय्ये को बदलने के लिए तैयार ही नहीं है और यही कारण है कि कुछ पुलिस अफसर व छोटे कर्मचारी आम इंसान तो क्या चंद विधायकों के फोन भी उठाने की जहमत नहीं कर रहे जिससे मुख्यमंत्री के आदेश किस तरह से हवा में उडाये जा रहे हैं इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है। हरिद्वार में जिस तरह से विपक्ष के कुछ विधायकों ने बैठक कर हरिद्वार में कानून व्यवस्था के तार-तार होने पर चिंता जताई वहीं यह आरोप भी लगाया कि पुलिस के कुछ अफसर विधायकों का फोन भी नहीं उठाते। खाकी के रवैय्ये से सरकार को कटघरे में किया जा रहा है ऐसे में अब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिनके पास खुद गृह विभाग है उन्हें इस बात का मंथन और चिंतन करना पडेगा कि ऐसे कौन पुलिस अफसर व कर्मचारी हैं जो विधायकों का अपमान कर रहे हैं?

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