मशीन खरीद घोटाले पर कांग्रेस आक्रामक

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देहरादून(संवाददाता)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में घोटाले हो रहे और इसमें सबसे बड़ा कुंभ में खरीदी गई एमआरआई मशीन घोटाले का है। उन्होंने हरिद्वार कुंभ मेले और दून अस्पताल में खरीदी गई मशीनों पर सवाल खड़े किये है। उन्हेांने कहा कि 4 करोड़ की मशीन 9 करोड़ में चीनी कंपनी से खरीदी गई है और इसमें बड़ा घोटाला जो पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने कहा कि एमआरआई मशीनों की खरीद घोटाले व कॉआपरेटिव बैंक भर्ती घोटाले की सीबीआई से जांच की जानी चाहिए और स्वास्थ्य मंत्री को इन मामलों में नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
यहां सुभाष रोड़ स्थित एक होटल में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने इन मामलों की सरकार से सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि चहेतो को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है जिसे किसी भी दशा में सहन नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री डा. धन सिंह रावत के विभागों में घोटाले ही घोटाले हो रहे हैं लेकिन किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि डा. धन सिंह रावत को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार से हरिद्वार में कोरोना काल में टेस्टिंग जांच में भारी घोटाला हुआ है लेकिन आज तक किसी पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। इस अवसर पर उत्त्तराखण्ड कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने इस बड़े घोटाले के पर्दाफाश का दावा किया है। करन मेहरा ने कागजात पेश करते हुए कहा कि स्वास्थ महकमे में बोस्टन ईवीवाई हैल्थकेयर साल्यूशन मुंबई कंपनी ने एमआरआई मशीन सप्लाई में किया बड़ा घोटाला किया है। उन्होंने कहा कि 3.2० करोड़ की एमआरआई मशीन 9 करोड़ में बेची गई।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में कुंभ मेले में यह एमआरआई घोटाला हुआ है। उन्होंने कहा कि इस कंपनी ने यूनाईटेड इमेजिंग संघाई की चाईनीज एमआरआई मशीनें कुंभ मेला में एवं गवर्मेंट दून मेडिकल कॉलेज, दोनों जगह में 3.2० करोड़ की मशीन 9-9 करोड़ों में बेची गयी। प्रदेश अध्यक्ष माहरा ने कहा कि अधिकारियों ने इस चाइनीज कंपनी के साथ मिलकर आंख बंद करके केवल ऐसा कमाने के लिए उत्तराखंड प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के सभी नियम कानूनों को तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के हिसाब से निविदा में ऑफर की गई मशीन तीन साल से इंडिया में लगी हुई होनी चाहिए एवं अच्छे से काम भी कर रही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिसके लिए निविदा डालने वाली कंपनी को अपने सीए से स्टाप सिग्नेचर करवाकर एक सर्टिफिकेट देना भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में लगे होने की शर्तों के साथ साथ मशीन का खरीदने वाले अधिकारी के ऑफिस में या जहां मशीनें लगी हुई हो उस हॉस्पिटल में फिजिकल डिमॉन्सट्रेशन करना भी अनिवार्य होता है नहीं तो निविदा निरस्त कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि उस वक्त तक इस चाइनीज कंपनी की हिंदुस्तान में एक भी एमआरआई मशीन नहीं लगी हुई थी फिर भी इसको पास कर दिया। उन्होंने कहा कि फिलिप्स रीजनल मैनेजर कमल उप्रैती, इरबिस रिजनल मैनेजर महेश शर्मा आदि कंपनियों ने लगातार निविदा के नियम कानूनों का हवाला देते हुए सचेत करते हुए सभी अधिकारियों को शिकायती पत्र भी लिखे पर करोड़ों रुपए के इस खेल में किसी भी अधिकारी के कान पर जूं भी नहीं रेंगी है। उन्होंने कहा कि बोस्टन ईवीवाई कंपनी उस सीए सर्टिफाइड पेपर नहीं लगाया तो उसे पास कैसे कर दिया गया एवं अगर पेपर लगाया है तो जब हिंदुस्तान में एक भी इंस्टालेशलन नहीं थी तो वो पेपर भी कहीं फर्जी तो नहीं लगाया। यह भी जांच का विषय है कि कुंभ मेला टेंडर में फर्जी कागज भी लगाए हुए हैं। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि कुम्भ में त्जचबत घोटाले की तो फौरी जांच हुई, इसमें तत्कालीन मेला अधिकारी स्वास्थ्य सहित दो अधिकारियों की संलिप्तता होने से इनको सस्पेंड भी किया गया पर बोस्टन ईवीवाई कंपनी एवं अधिकारियों की मिलीभगत से हुए करोड़ों रुपए के इस एमआरआई घोटाले में कुछ भी नहीं हुआ।उन्होंने कहा कि यह भी जांच का विषय है कि तत्कालीन प्रोक्योरमेंट पॉलिसी की सभी शर्तों को बायपास करने वाले मेला अधिकारी स्वास्थ्य एवं बिना फिजिकल डिमॉन्सट्रेशन लिए इसके डिमॉन्सट्रेशन को पास करने वाली टीम ने करोड़ों रूपए के इरा एमआरआई खरीद घोटाले में, कम्पनी के साथ पूरी मिलीभगत करके रिफुरबिस्ड (पुरानी) मशीन को नया बता कर सप्लाई करके, उत्तराखंड सरकार एवम स्वास्थ्य महकमे से यह भी एक और घोटाला किया हो। माहरा ने कहा कि बोस्टन ईवीवाई कंपनी के पास 9 करोड़ के रेट को न्यायोचित ठहराने के कोई सबूत नहीं हैं क्योंकि वो लोग प्राइवेट हॉस्पिटल में एमआरआई मशीन के इसी मॉडल को 4 करोड़ के आसपास बेच रहे हैं। कम्पनी से सभी पदेजंससंजपवदे की जीएसटी चंपक बिल की सर्टिफाइड कॉपियां मांगने से साफ पता लग जायेगा। जो भी साबित करता है कि कुंभ की इस एमआरआई खरीद में करोड़ों का खेल हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करोड़ों रुपए के इस एमआरआई घोटाले की भी जांच करवाई जाए एवं पैसों के लिए आंख बंद करके सभी नियम कानूनों को दरकिनार करते हुए एमआरआई खरीद में तत्कालीन अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही करते हुए बोस्टन ईवीवाई कंपनी को भी तुरंत ब्लैक लिस्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि यह भी ज्ञात हुआ है कि इसी बोस्टन ईवीवाई कंपनी ने डीजी हैल्थ के एक टेंडर में फर्जी कागज लगाए हुए हैं।

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