कांग्रेसी विधायक भी धामी के मुरीद

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में कांग्रेस सत्ता में आने के लिए बडे-बडे दावे कर रही थी और यहां तक दम भर रही थी कि राज्य की जनता ने भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना लिया है इसके चलते कांग्रेस के चंद नेता चुनाव परिणाम आने से पूर्व ही अपने आपको राज्य का मुख्यमंत्री और मंत्री साबित करने में जुटे हुये थे? वहीं छह माह में उत्तराखण्ड की जनता के दिलों पर राज करने वाले पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा चुनाव में जिस तरह से कांग्रेस को चुनावी रणभूमि में चारो खाने चित कर दिया उससे कांग्रेस के अन्दर भीतरघात को लेकर एक बडा महासंग्राम मचा हुआ है और इसी महासंग्राम का परिणाम है कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने अपनों के खिलाफ ही बगावत का झंडा उठा लिया है जिसके चलते कांग्रेस टूट की कगार पर खडी हुई दिखाई दे रही है? कांग्रेस प्रदेश प्रभारी को लेकर कांग्रेस के अन्दर बगावत का माहौल दिखाई दे रहा है और यही कारण है कि कांग्रेस के कुछ विधायक पुष्कर सिंह धामी की दरियादिली में इस कदर कैद होते हुए दिखाई दे रहे हैं कि वह हाथ का साथ छोडकर भगवामय होने का मन बना चुके हैं। चर्चा यहां तक है कि कांग्रेस के चार-पांच विधायक पार्टी से बगावत की राह पर जाने के लिए तैयार हैं और अपनी भविष्य की राजनीति को लेकर वह देर रात देहरादून पहुंच गये और आज सुबह से ही इन चंद विधायकों की गोपनीय बैठक चल रही है कि उन्हें अब किस ओर आगे बढना है? कांग्रेस के आधा दर्जन से अधिक विधायकों को पार्टी के अन्दर अपना भविष्य नजर नहीं आ रहा और यही कारण है कि वह भगवामय होने के लिए मंथन व चिंतन में आगे बढते जा रहे हैं और अगर यह विधायक हाथ का साथ छोडकर पुष्कर सिंह धामी के साथ आकर खडे हो गये तो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने पुष्कर सिंह धामी का इकबाल और बुलंद हो जायेगा।
उत्तराखण्ड में सत्ता की चाबी हमेशा भाजपा व कांग्रेस के हाथों में ही रही और सपा, बसपा, उक्रांद और आप ने उत्तराखण्ड की सत्ता पर अपना कब्जा जमाने के लिए इस विधानसभा चुनाव में एडी-चोटी का जोर लगाया और सत्ता पाने के लिए सबसे ज्यादा कांग्रेस के कुछ नेता आतुर दिखाई दिये और उन्होंने तो चुनाव से पूर्व ही ऐलान कर दिया था कि राज्य में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आ रही है और भाजपा का राज्य से सुपडा साफ हो जायेगा। हालांकि छह माह से सत्ता चलाने और चुनाव की कमान संभालने वाले पुष्कर सिंह धामी ने शुरूआती दौर में ही ऐलान कर दिया था कि उत्तराखण्ड के अंदर चारो ओर भाजपा का डंका बज चुका है और प्रदेश में भाजपा की सरकार आने से कोई नहीं रोक पायेगा। उत्तराखण्ड में सपा, बसपा, उक्रांद और आप जो चुनावी समीकरण को लेकर बडे-बडे दावे कर रही थी वह भाजपा की चुनावी रणनीति के आगे धडाम हो गई और जो कांग्रेस सत्ता में आने का डंका पीट चुकी थी उसे भी राज्य की जनता ने पांच साल बाद भी सत्ता सौंपने से इंकार कर दिया। उत्तराखण्ड के अन्दर मात्र छह माह के भीतर पुष्कर सिंह धामी का चला जादुई करिश्मा कांग्रेस के कुछ विधायकों को अपनी पार्टी से बगावत करने की राह पर ले आया है? चुनाव खत्म होते ही कांग्रेस के अन्दर एक बडी बगावत चल रही है और कांग्रेस हाईकमान ने जिस तरह से कुमंाऊ से ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष दिया है उससे गढवाल की राजनीति करने वाले कांग्रेस के कुछ विधायकों में बडी नाराजगी देखने को मिल रही है। गढवाल में शंातप्रिय और सरल स्वभाव के चकराता से विधायक प्रीतम सिंह भी पार्टी के चंद दिग्गज नेताओं से बेहद नाराज और आहत हैं और धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने जिस तरह से कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के खिलाफ मोर्चा खोला है उससे राज्य के अन्दर यह चर्चायें और आशंकायें पनप रही हैं कि क्या आने वाले दिनों में कांग्रेस में बडी फूट के चलते पार्टी टूटने के कगार पर तो नहीं खडी हो जायेगी? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो कि सरलता के साथ सत्ता चलाने में विश्वास रखे हुये हैं और विपक्ष के नेताओं को वह खुलकर सम्मान देते हुए दिखाई दे रहे हैं उससे कांग्रेस के कुछ विधायक पुष्कर सिंह धामी की दरियादिली में कैद होते हुए नजर आ रहे हैं? पुष्कर ंिसह धामी के प्रति कांग्रेस के चंद विधायक बडी आस्था दिखा रहे हैं और उसी के चलते यह सम्भावनायें प्रबल होती जा रही हैं कि आने वाले कुछ दिनों में गढवाल व कुमांऊ से कांग्रेस के लगभग चार से पांच विधायक हाथ का साथ छोडकर भगवामय होकर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ सकते हैं? चर्चा यहां तक है कि कांग्रेस के चंद विधायक आज अपनी भविष्य की राजनीति को लेकर दून में गोपनीय बैठक कर रहे हैं जिसके बाद साफ हो जायेगा कि कांग्रेस का उत्तराखण्ड के अन्दर राजनीतिक भविष्य क्या होगा?

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