उत्तरकाशी के जंगलों में फैलती आग से घबराते जानवर

0
151

उत्तरकाशी(संवाददाता)। उत्तराखंड के सबसे घने जंगल उत्तरकाशी की इस बार शामत आगई हैं। जिला मुख्यालय के वरूणावत की तलहटी व निम रोड पर भड़की आग से जहां वनों को भारी नुकसान हो रहा है वही वनों में भड़की आग शहर की बस्तियों तक पहुंचने लगी है। जिले में वनों की आग टकनोर रेंज, मुख्यम ,धरासू एवं यमुना वन प्रभाग और टौंस वन प्रभाग में धुआं के गुब्बारे साफ दिखाई दे रहे हैं। आग के अंगारों से बचने के लिए वन्य जीव उच्च हिमालय की ओर भाग रहे हैं।
शनिवार को यमुना घाटी में आई तूफान के बाद उत्तरकाशी जिले के टौंस , यमुना वन प्रभाग सहित समूचे जिले के रेंजों में आग ने तांडव मचा रखा। भाजपा नेता लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने वनों आग की लपेटों पर चिंता जताई उन्होंने कहा कि यदि अप्रैल माह में वनों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है तो मई-जून में क्या हाल होंगे। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के कुल क्षेत्रफल 54834 वर्ग किलोमीटर में से 34434 वर्ग किलोमीटर हिस्से में वन क्षेत्र है। अकले उत्तरकाशी में 88: क्षेत्रफल में वन है। किसी भी देश मे आदर्श पर्यावरण के लिए 33: भूभाग में जंगल होने चाहिय। देश मे 1952 में पहली बार जब अपने देश की वननीति बनी तब देश मे कुल 23: वनक्षेत्र ही थे जो अब घटकर मात्र 11: प्रतिशत ही बच गए हैं। अगर जंगलों की आग इसी तरह प्रतिवर्ष यों ही भीषण रूप लेती रहे तो बचे खुचे जंगलों को समाप्त होने में समय नहीं लगेगा।
उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। उत्तरकाशी निम के जंगलों व जिला मुख्यालय से लगे वरुणावत पर लगी भीषण आग की लपटें तो मानों आसमान को छूने को लालायित हैं। उत्तरकाशी जिले का महकमा और उसके मुखिया कहीं चौन की नींद सो रहे हैं। समूचे उत्तराखंड में इस सीजन में आग की 1००० से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। करोड़ों की वन उपज व हरियाली नष्ट हो चुकी हैं। वन्य जीव जंतुओं के लिए जंगलों की आग एक भयंकर आपदा से कम नहीं। मुझे लगता है कि उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग अब वनविभाग के लिए चिंता का विषय नहीं रह गया है। उत्तराखंड के जंगलों का आग से जलना अब नियति बन चुका है। जिले जिले शहर शहर जंगल जंगल से आग पसर कर समूचे गढ़वाल व कुमायूं मंडल को अपने आगोश में ले चुकी है।
समूचा उत्तराखंड धुयें की आगोश में हैं। वनविभाग के आग बुझाने के तमाम दावे जंगलों की भीषण आग के आगे बौने साबित हो रहे हैं। जंगलों की आग के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं? और जंगलों की आग आखिर बुझाए कौन? ये दो सवाल यक्षप्रश्न की तरह आज से नहीं दसकों से अनुत्तरित हैं।

LEAVE A REPLY